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Jaipur: हाइड्रोलिक रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे भगवान जगन्नाथ

Admindelhi1
15 July 2026 8:44 AM IST
Jaipur: हाइड्रोलिक रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे भगवान जगन्नाथ
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जयपुर में आस्था का महापर्व, गुरुवार को निकलेगी जगन्नाथ रथयात्रा

जयपुर: आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया के अवसर पर गुरुवार को गुलाबी नगरी भगवान जगन्नाथ की भक्ति में सराबोर रहेगी। शहर में एक ओर गुप्त वृंदावन धाम के तत्वावधान में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकलेगी, वहीं गोविंददेवजी मंदिर में भगवान गौर गोविंद को करीब 250 वर्ष पुराने चांदी के रथ में विराजमान कर पारंपरिक रथयात्रा महोत्सव मनाया जाएगा। दोनों आयोजनों में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

गुप्त वृंदावन धाम की ओर से निकाली जाने वाली रथयात्रा में इस बार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रिमोट आधारित हाइड्रोलिक रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। आयोजकों के अनुसार आधुनिक तकनीक से तैयार इस रथ की ऊंचाई रिमोट के माध्यम से आवश्यकता अनुसार कम या अधिक की जा सकेगी, जिससे मार्ग में आने वाले बिजली के तारों और अन्य अवरोधों के बीच भी रथयात्रा सुरक्षित रूप से निकाली जा सके। पुरी की परंपरा के अनुरूप रथ को लाल और पीले रंग के विशेष वस्त्रों से सजाया गया है।

रथयात्रा जयपुर होटल से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए श्री शिव सत्संग भवन, रामनिवास बाग पहुंचेगी, जहां भगवान की महाआरती के साथ यात्रा का समापन होगा। गुप्त वृंदावन धाम के अध्यक्ष अमितासना दास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण वृंदावनवासियों के निष्काम प्रेम से भावविभोर हो गए थे। उसी दिव्य प्रेम की स्मृति में प्रतिवर्ष भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है। रथयात्रा से एक दिन पूर्व विभिन्न मंदिरों में परंपरा अनुसार विशेष मंदिर मार्जन सेवा (सफाई अभियान) भी आयोजित किया गया।

उधर गोविंददेवजी मंदिर में सुबह 6 बजे से विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ रथयात्रा महोत्सव शुरू होगा। पूजा-अर्चना के बाद भगवान गौर गोविंद को करीब 250 वर्ष पुराने चांदी के रथ में विराजमान कर मंदिर परिसर की चार प्रदक्षिणाएं कराई जाएंगी। यह परंपरा करीब ढाई सौ वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है और जयपुर तथा ब्रज क्षेत्र की धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है।

मंदिर परंपरा के अनुसार ठाकुर श्री गोविंददेवजी का श्रीविग्रह वृंदावन में श्रील रूप गोस्वामी को प्राप्त हुआ था। बाद में श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने स्वरूप के रूप में अष्टधातु से गौर गोविंद का विग्रह तैयार करवाकर वृंदावन भेजा, जिसे गोविंददेवजी के दाहिने पार्श्व में स्थापित किया गया। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन के दौरान श्री चैतन्य महाप्रभु इसी गौर गोविंद विग्रह में समाहित हो गए थे। इसी आस्था के चलते प्रतिवर्ष गौर गोविंद की विशेष पूजा और रथयात्रा निकाली जाती है।

रथयात्रा महोत्सव से पूर्व गोविंददेवजी मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और श्री बलभद्र के समक्ष आकर्षक फूल बंगला झांकी सजाई गई, जिसमें हरिनाम संकीर्तन का भाव प्रस्तुत किया गया। यह झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। पूरे शहर में रथयात्रा के दौरान 'जय जगन्नाथ' के जयघोष के बीच भक्ति और आस्था का माहौल रहेगा।

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