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Jaipur: जयपुर एसएमएस अस्पताल की बड़ी सफलता, पहली बार किया गया बाल लिवर ट्रांसप्लांट

Admindelhi1
31 Aug 2026 6:26 PM IST
Jaipur: जयपुर एसएमएस अस्पताल की बड़ी सफलता, पहली बार किया गया बाल लिवर ट्रांसप्लांट
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एसएमएस अस्पताल के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, बच्चे का सफल लिवर ट्रांसप्लांट

जयपुर: सवाई मानसिंह अस्पताल में प्रदेश के सरकारी क्षेत्र में पहली बार सफल बाल लिवर प्रत्यारोपण किया गया। लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी एवं एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने 14 वर्षीय किशोर का सफलतापूर्वक लिवर प्रत्यारोपण कर उसे नया जीवन दिया। इसके साथ ही ब्रेन डेड 9 वर्षीय बालिका के अंगदान से प्राप्त किडनी का भी जटिल परिस्थितियों के बीच सफल प्रत्यारोपण किया गया।

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि

29 अगस्त को जोधपुर में 9 वर्षीय बालिका को ब्रेन डेड घोषित किया गया था। परिजनों की सहमति से उसके अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद बालिका का लिवर और किडनी जयपुर के एसएमएस अस्पताल लाए गए। चिकित्सकों की टीम ने दोनों अंगों के प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की।

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी ने इसे मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस सफलता से प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही अत्याधुनिक और जटिल अंग प्रत्यारोपण की सुविधाएं उपलब्ध कराने की नई राह खुली है।

यूरोलॉजिस्ट डॉ. शिवम प्रियदर्शी ने बताया कि ब्रेन डेड डोनर से प्राप्त किडनी की संरचना सामान्य से अलग थी। दाईं ओर की किडनी में रीनल वेन सामान्य से छोटी थी और दो रीनल आर्टरीज मौजूद थीं। प्रत्यारोपण के दौरान यह भी सामने आया कि किडनी में दो यूरेटर्स थे। इसके अलावा किडनी प्राप्त करने वाले मरीज को पहले से यूरेथ्रा में स्ट्रिक्चर की समस्या थी।

चिकित्सकों ने बेंच सर्जरी के दौरान आईवीसी पैच की मदद से छोटी रीनल वेन को लंबा किया। दोनों रीनल आर्टरीज को एक ही पैच पर लेकर उनका पुनर्निर्माण किया गया और इसे एक्सटर्नल इलियाक आर्टरी से जोड़ा गया। दोनों यूरेटर्स के निचले सिरों को आपस में जोड़ने के बाद उन्हें ब्लैडर से जोड़ा गया। असामान्य शारीरिक संरचना और कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद चिकित्सकों की टीम ने किडनी प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक पूरा किया।

एसएमएस अस्पताल में हुए इन दोनों प्रत्यारोपणों को प्रदेश के सरकारी चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे जटिल अंग प्रत्यारोपण के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर रहने वाले जरूरतमंद मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में ही उपचार की नई उम्मीद मिली है।

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