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Jaipur: जयपुर डेयरी का कायाकल्प, 133 करोड़ के आधुनिकीकरण से नई पहचान

Admindelhi1
13 Jun 2026 11:55 AM IST
Jaipur: जयपुर डेयरी का कायाकल्प, 133 करोड़ के आधुनिकीकरण से नई पहचान
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133 करोड़ की लागत से जयपुर डेयरी में हुए बड़े सुधार

जयपुर: राजधानी जयपुर में दुग्ध उत्पादकों और उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (जयपुर डेयरी) के संयंत्र का 133 करोड़ की भारी-भरकम लागत से पूरी तरह आधुनिकीकरण और नवीनीकरण (मॉर्डनाइजेशन) कर दिया गया है। अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस नए प्लांट का उद्घाटन जल्द ही होने जा रहा है, जिससे जयपुर सहित आसपास के जिलों में दूध और घी की आपूर्ति व्यवस्था बेहद मजबूत हो जाएगी।

इस नए मेगा प्लांट के भव्य उद्घाटन समारोह की तैयारियों को परखने के लिए राज्य के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने संयंत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। मंत्री कुमावत ने प्लांट के चप्पे-चप्पे का जायजा लिया और अधिकारियों से प्रोसेसिंग यूनिट्स की कार्यप्रणाली को समझा। निरीक्षण के बाद उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को उद्घाटन समारोह की तैयारियों को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डेयरी मंत्री ने बताया कि प्रोसेसिंग प्लांट का कार्य अंतिम चरण में जल्द ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इसका उदघाटन करेंगे।

इस निरीक्षण के दौरान राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) की प्रबंध संचालक (एमडी) श्रुति भारद्वाज और जयपुर डेयरी के प्रबंध संचालक (एमडी) मनीष फौजदार भी मौजूद रहे। इन अधिकारियों ने मंत्री को आधुनिकीकरण के बाद आई नई तकनीकों और बढ़ी हुई क्षमताओं की तकनीकी जानकारी दी।

डेयरी मंत्री कुमावत ने बताया कि इस नवीनीकरण के बाद जयपुर डेयरी प्लांट की ताकत और उत्पादन क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है। दूध को संसाधित (प्रोसेस) करने की क्षमता अब 12 लाख लीटर से बढ़कर 20 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है। साथ ही दूध के पाउच पैक करने की क्षमता 10 लाख लीटर से बढ़कर 16.50 लाख लीटर प्रतिदिन पहुंच गई है। कुमावत ने बताया कि इसके अतिरिक्त, संयंत्र में आधुनिक बॉयलर और मशीनरी स्थापित की गई है, जिसकी सहायता से प्रति घंटे लगभग 70 मीट्रिक टन भाप तथा घी, बटर, डेय वाटर जैसे विभिन्न दुग्ध उत्पादों का निर्माण किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अब यह संयंत्र क्षेत्रीय दुग्ध उद्योग के लिए एक आधुनिक उदाहरण के रूप में स्थापित होगा।

इस आधुनिकीकरण से न केवल जयपुर के लाखों उपभोक्ताओं को समय पर हाइजीनिक और उच्च गुणवत्ता वाला दूध मिल सकेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों पशुपालकों से भी अधिक मात्रा में दूध खरीदा जा सकेगा। प्रसंस्करण क्षमता बढ़ने से दूध खराब होने की समस्या खत्म होगी और डेयरी उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद मिलेगी।

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