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Jaipur: एकात्म मानवदर्शन में नारी सम्मान का उल्लेख : दीया कुमारी

Admindelhi1
21 Sept 2026 10:47 AM IST
Jaipur: एकात्म मानवदर्शन में नारी सम्मान का उल्लेख : दीया कुमारी
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दीया कुमारी ने नारी सम्मान और सहभागिता पर रखे विचार

जयपुर: पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति के महिला प्रकोष्ठ की ओर से रविवार को कांस्टीट्यूशनल क्लब में ‘एकात्म मानवदर्शन एवं स्त्री विमर्श’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी मुख्य अतिथि रहीं, जबकि भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्य वक्ता के रूप में जुड़ीं।

दीया कुमारी ने कहा कि भारतीय समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वावलंबन और निर्णय प्रक्रिया में सहभागिता समाज की प्रगति के प्रमुख आधार हैं। महिलाओं को समान अवसर देने के साथ उनके नेतृत्व को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाएं घरेलू दायित्वों के साथ सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं।

स्मृति ईरानी ने कहा कि महिलाओं को केवल सुविधाएं उपलब्ध कराना ही सशक्तीकरण नहीं है, बल्कि शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता, नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिला अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम होती है तो उसका प्रभाव परिवार और समाज के साथ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है।

उन्होंने एकात्म मानवदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति के विकास को परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसी समग्र दृष्टि से महिला की भूमिका को भी व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता है। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को महत्वपूर्ण बताते हुए समकालीन चुनौतियों के समाधान के लिए संवाद, सामाजिक जागरूकता और संस्थागत प्रयासों पर जोर दिया।

समिति के अध्यक्ष प्रो. मोहन लाल छीपा ने कहा कि एकात्म मानवदर्शन व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की अवधारणा प्रस्तुत करता है। भारतीय चिंतन परंपरा में नारी को समाज की सक्रिय और महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में देखा गया है। उन्होंने समकालीन संदर्भों में महिला सहभागिता के नए आयामों पर विमर्श की आवश्यकता बताई।

विशिष्ट अतिथि संगीता जांगिड़ ने कहा कि महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी बढ़ाना परिवार और समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नीता बूथरा ने कहा कि स्त्री विमर्श को भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों में समझने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का संचालन नर्बदा इन्दौरिया ने किया। इस अवसर पर समिति के उपाध्यक्ष नीरज कुमावत, गजेंद्र ज्ञानपुरिया, सचिव प्रतापभानू सिंह शेखावत, राजेश रावत, डॉ. जय सिंह राठौड़, अम्बरीष प्रजापति सहित महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद् और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं एवं नागरिक मौजूद रहे।

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