राजस्थान
Jaipur : शिक्षा में संस्कृति, मर्यादा और विज्ञान का समावेश जरूरी - देवनानी
Tara Tandi
2 Jun 2025 10:49 AM IST

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Jaipur जयपुर । राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी रविवार को एक दिवसीय दौरे पर हनुमानगढ़ पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सूरतगढ़ रोड़ स्थित श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय में नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया और मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षा, राष्ट्रवाद, तकनीकी प्रगति और सांस्कृतिक मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर सर्व सिख समाज और सिंधी समाज द्वारा विधानसभा अध्यक्ष का अभिनंदन भी किया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने जंक्शन स्थित जीएम होटल में वैश्य समाज और हनुमानगढ़ टाऊन में पूज्य सिंधी पंचायत और भारतीय सिंधु सभा के सम्मान समारोह में भी शिकरत की।
श्री देवनानी ने जाहरवीर गोगा जी की पावन धरती को नमन करते हुए अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान किसी भी राज्य से पीछे नहीं है। उन्होंने निजी शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों के योगदान की सराहना की, लेकिन यह भी जोड़ा कि सम-विकसित परिवर्तन जरूरी हैं, विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों में जहां संभावनाए अधिक हैं। उन्होंने समाज में गिरावट के लिए शिक्षण संस्थानों को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जैसे विद्यार्थी तैयार होगा, वैसा ही भावी समाज बनेगा।
पाठ्यक्रम में किया बदलाव, वीर-वीरांगनाओं को दिया स्थान
पूर्व शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए श्री देवनानी ने बताया कि उन्होंने 200 से अधिक वीर एवं वीरांगनाओं के नामों को पाठ्यक्रम में जोड़ा था। साथ ही उन्होंने कहा कि उस समय अकबर को ‘महान’ कहा जाता था, मैंने पाठ्यक्रम से वह अध्याय हटाकर महान महाराणा प्रताप को जोड़ा। उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हमें नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले तैयार करने होंगे। शिक्षा को आत्मनिर्भर बनाना होगा।
ऑपरेशन सिंदूर और राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर
श्री देवनानी ने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की तकनीकी दक्षता ने चीनी तकनीकों को मात दी और आतंकवादी ठिकानों को सटीकता से नष्ट किया। श्री देवनानी ने मेधावी छात्रों को इंगित करते हुए कहा कि निपुणता केवल अपने और नौकरी के लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए होनी चाहिए। मैं जीऊंगा तो देश के लिए, इस राष्ट्रवाद की भावना को विद्यार्थियों और आमजन में जगाना होगा। उन्होंने तक्षशिला, नालंदा, अजन्ता-एलोरा, और रामायण-महाभारत में विज्ञान के उल्लेखों को भारत की प्राचीन वैज्ञानिक समृद्धि का प्रमाण बताया।
शिक्षा में चाहिए संस्कृति, मर्यादा और विज्ञान का समावेश
श्री देवनानी ने कहा कि वह शिक्षा में संस्कृति, मर्यादा और विज्ञान के तीन स्तरीय म्यूचुअल परिवर्तन की वकालत करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जीवन मूल्यों और देशभक्ति से भी जुड़ी होनी चाहिए।
देश सर्वोपरि, आलोचना करने वालों को पुनर्विचार करना चाहिए
उन्होंने कहा कि कुछ लोग विदेश जाकर देश की आलोचना करते हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। देश रहेगा तो हम रहेंगे, देश सर्वोपरि है। हर नागरिक को सीमा पर जाकर लड़ने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपने आसपास सतर्क रहना चाहिए और जासूसी जैसे खतरों पर नजर रखनी चाहिए।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी जरूरी
उन्होंने कहा कि भारत एक भावनात्मक देश है और आज के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में भी भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता बनी हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा शुरू की गई एक पेड़ मां के नाम पहल और ऑपरेशन सिंदूर को भावनात्मक दृष्टिकोण से प्रेरित बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से सैनिकों का मनोबल और जनता का जुड़ाव दोनों बढ़ते हैं।
श्री देवनानी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अर्थव्यवस्था और विकास संबंधी दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि 2014 में भारत पूरे विश्व में 11वीं अर्थव्यवस्था थी, आज चौथे स्थान पर है। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना सिर्फ प्रधानमंत्री का नहीं, हम सभी का संकल्प होना चाहिए।
सम्मान और अभिनंदन समारोह में अनेक गणमान्य उपस्थित
इस अवसर पर हनुमानगढ़ विधायक श्री गणेशराज बंसल सहित अनेक जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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