Jaipur: हाईकोर्ट ने निगम की विजिलेंस टीम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने अतिक्रमण से जुड़े एक मामले में नगर निगम ग्रेटर जयपुर की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने नगर निगम की आयुक्त रुक्मणी रियार की कार्रवाई के ब्योरे से असंतुष्ट होकर उन्हें फटकार लगाई और साथ ही उनके अधीन काम कर रही विजिलेंस टीम के अधिकारियों में भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया। इस फैसले ने नगर निगम ग्रेटर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब नगर निगम के अधिकारियों के सामने चुनौती है कि वे कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाने के काम को सही तरीके से लागू करें।
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान कहा कि निगम आयुक्त रुक्मणी रियार ने अतिक्रमण हटाने के लिए जिन कार्रवाईयों की जानकारी कोर्ट को दी, उससे यह स्पष्ट हो रहा है कि कार्रवाई में गंभीरता की कमी है और प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। कोर्ट का कहना था कि निगम की विजिलेंस टीम के अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, जो अतिक्रमण हटाने के प्रयासों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर रहे हैं। यह स्थिति गंभीर है, क्योंकि यह सीधे तौर पर शहर की अव्यवस्था और नागरिकों को होने वाली समस्याओं से जुड़ी हुई है।
हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर नगर निगम के अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति जताई और आयुक्त से इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब तलब किया। कोर्ट ने कहा कि नगर निगम के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चले, ताकि किसी भी प्रकार का अवैध फायदा न लिया जा सके। इसके अलावा, कोर्ट ने निगम आयुक्त को निर्देश दिया कि वे इस प्रक्रिया में सुधार लाने के लिए शीघ्र प्रभावी कदम उठाएं।
इस आदेश के बाद नगर निगम के कार्यकर्ताओं और अधिकारियों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि कोर्ट के इस सख्त आदेश से निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों को अब अपनी छवि सुधारने और जनता के बीच विश्वास पुनः स्थापित करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।
अतिक्रमण हटाने का मामला पिछले कुछ समय से शहर के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। जयपुर के कई इलाकों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि यह शहर की अव्यवस्था का मुख्य कारण बन गया है। हाईकोर्ट का यह आदेश नगर निगम के लिए एक चुनौती है, क्योंकि अब उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करके शहर में व्याप्त अतिक्रमण की समस्या को सुलझाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
साथ ही, कोर्ट ने निगम की विजिलेंस टीम के भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी कड़ी टिप्पणी की, जिससे निगम के भीतर के अधिकारियों के प्रति लोगों का विश्वास और भी कमजोर हो सकता है। अब देखना होगा कि निगम आयुक्त और संबंधित अधिकारी इस आदेश के बाद किस प्रकार की कार्रवाई करते हैं और अतिक्रमण की समस्या को सुलझाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।





