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Jaipur: अवैध खनन के खिलाफ सरकार की सख्ती, चंबल में 40 स्थल हाईटेक निगरानी में

Admindelhi1
10 Sept 2026 6:09 PM IST
Jaipur: अवैध खनन के खिलाफ सरकार की सख्ती, चंबल में 40 स्थल हाईटेक निगरानी में
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40 संवेदनशील स्थलों पर हाईटेक निगरानी, चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर रोक

जयपुर: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध बालू-बजरी खनन और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों तथा केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों के तहत सरकार ने अधिकांश महत्वपूर्ण अनुपालन पूरे कर लिए हैं। बुधवार को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में हुई बैठक में अब तक की कार्रवाई और आगामी न्यायालयीन सुनवाई की तैयारियों की समीक्षा की गई।

सरकार ने अभयारण्य क्षेत्र में 40 अत्यधिक संवेदनशील स्थलों की पहचान की है। इन स्थानों पर अवैध खनन और परिवहन पर नजर रखने के लिए हाई-मास्ट टावर, ऑप्टिकल फाइबर तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तापीय रात्रि-दृष्टि वाले कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही नदी के बदलते स्वरूप और नए रास्तों की पहचान के लिए मानसून के बाद नियमित ड्रोन सर्वे भी कराया जाएगा।

तकनीकी निगरानी के साथ मौके पर सुरक्षा भी बढ़ाई जा रही है।

धौलपुर, सवाई माधोपुर, बूंदी, करौली और कोटा जिलों में चिन्हित 40 संवेदनशील स्थलों पर पांच-पांच सशस्त्र होमगार्ड जवानों की तैनाती के लिए बजट स्वीकृत और आवंटित किया जा चुका है। यानी इन स्थानों पर कुल 200 सशस्त्र जवान तैनात किए जाने की व्यवस्था की गई है।

राजस्व, पुलिस, वन और खनन विभाग की संयुक्त टीमें उपखंड स्तर पर सप्ताह में दो बार आकस्मिक निरीक्षण करेंगी। इन टीमों के पास जीपीएस और शरीर पर लगाए जाने वाले कैमरे होंगे, ताकि कार्रवाई की निगरानी और रिकॉर्डिंग भी की जा सके।

अवैध खनन की सूचना आमजन भी दे सकें, इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऑनलाइन सार्वजनिक सूचना पट और राजस्थान संपर्क-181 पर क्यूआर कोड आधारित शिकायत व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके माध्यम से लोग स्थान की जानकारी के साथ फोटो और वीडियो भी गोपनीय रूप से भेज सकेंगे।

सरकार वैध बालू के विकल्प के रूप में एम-सैंड इकाइयों को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रही है। वहीं अभयारण्य सीमा से जुड़े राजस्व क्षेत्रों को वन क्षेत्र के रूप में अधिसूचित करने की संभावनाओं की जांच के लिए जिला स्तरीय समितियां बनाई गई हैं।

मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को 31 अगस्त तक की कार्रवाई का अद्यतन विवरण तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें अवैध खनन के मामलों, जब्त वाहनों और मशीनरी तथा विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की स्थिति शामिल होगी।

उन्होंने कहा कि चंबल अभयारण्य की जैव विविधता, घड़ियालों और जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार न्यायालय के निर्देशों की पूरी तरह पालना सुनिश्चित करने के लिए शून्य-सहनशीलता की नीति पर काम कर रही है।

उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की समयबद्ध पालना और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय एवं निगरानी समिति का गठन किया गया है। समिति में खान, वन, गृह, राजस्व, वित्त, परिवहन और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के उच्चाधिकारी तथा संबंधित पांच जिलों के जिला कलेक्टर शामिल होंगे। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक समिति के सदस्य सचिव होंगे।

यह समिति अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई, निगरानी तंत्र और मासिक प्रगति की नियमित समीक्षा करेगी। चंबल में अब अवैध खनन पर नजर सिर्फ गश्ती दल की नहीं, बल्कि कैमरों, ड्रोन और बहु-विभागीय निगरानी तंत्र की भी होगी।

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