राजस्थान

Jaipur: वित्तीय सुधारों के लिए नगरीय निकायों पर वित्त आयोग की नजर

Admindelhi1
23 July 2026 11:25 AM IST
Jaipur: वित्तीय सुधारों के लिए नगरीय निकायों पर वित्त आयोग की नजर
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वित्त आयोग करेगा नगर निकायों की वित्तीय स्थिति का आकलन

जयपुर: सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट 4 फरवरी, 2026 को विधानसभा के पटल पर प्रस्तुत की थी। इसके उपरांत आयोग द्वारा प्रदेशभर में विभिन्न संभागों में संवाद कार्यक्रम आयोजित कर स्थानीय निकायों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से व्यापक सुझाव प्राप्त किए गए हैं, ताकि भविष्य की अनुशंसाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

उन्होंने बताया कि इसी क्रम में बुधवार को स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन, निदेशक जुईकर प्रतीक चन्द्रशेखर, राज्य वित्त आयोग के सचिव नरेश ठकराल, विभिन्न नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों, अधिशाषी अधिकारियों एवं अन्य अधिकारियों के साथ सार्थक संवाद आयोजित किया गया। बैठक में नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति, संसाधन सुदृढ़ीकरण तथा विकास कार्यों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

अध्यक्ष ने कहा कि संवाद के दौरान यह बात उभरकर सामने आई कि वित्त आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर स्थानीय निकायों को उपलब्ध होने वाले संसाधन वर्तमान आवश्यकताओं की तुलना में पर्याप्त नहीं हैं। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) सहित विभिन्न करों की वसूली के लिए प्रभावी एवं पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे राजस्व संग्रहण बढ़े और विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में नगर निगम, विकास प्राधिकरण एवं अन्य नगरीय संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र के स्पष्ट निर्धारण, भवनों के अद्यतन डाटा की उपलब्धता, पर्याप्त मानव संसाधन तथा वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों पर भी महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए। इन सुधारों से स्थानीय निकायों की कार्यक्षमता एवं वित्तीय सुदृढ़ता को और मजबूती मिलेगी।

अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2047 तक प्रदेश एवं देश में नगरीकरण की गति तेज होने तथा लगभग 50 प्रतिशत आबादी के शहरी क्षेत्रों में निवास करने की संभावना को देखते हुए बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नगरीय निकायों के लिए अधिक वित्तीय प्रावधान किए जाएं।

उन्होंने कहा कि आयोग प्राप्त सभी सुझावों एवं तथ्यों का समग्र परीक्षण कर एक विस्तृत एवं संतुलित प्रतिवेदन तैयार करेगा, जिसे राज्यपाल के माध्यम से राज्य सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा। यह प्रतिवेदन स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होगा।

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