राजस्थान

Jaipur: राजस्थान में दीनदयाल इंडस्ट्रीज की नई शुरुआत, आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन

Admindelhi1
11 Aug 2026 3:03 PM IST
Jaipur: राजस्थान में दीनदयाल इंडस्ट्रीज की नई शुरुआत, आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन
x
राजस्थान में आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

जयपुर: दीनदयाल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने राजस्थान में आयुर्वेदिक औषधियों का उत्पादन शुरू कर दिया है। कंपनी ने राजस्थान सरकार की रसायनशालाओं में पीपीपी पार्टनर के रूप में अजमेर और भरतपुर में उत्पादन इकाइयां शुरू की हैं। इन इकाइयों में तैयार आयुर्वेदिक दवाओं की आपूर्ति प्रदेश के आयुर्वेदिक औषधालयों और चिकित्सालयों में की जाएगी।

कंपनी के निदेशक आदित्य छापरवाल ने बताया कि वर्ष 1927 से मध्यप्रदेश के ग्वालियर और भिंड में आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण किया जा रहा है। राजस्थान में नई इकाइयां इसी परंपरा का विस्तार हैं। उन्होंने कहा कि कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराना कंपनी का प्रमुख उद्देश्य है।

कंपनी के अनुसार राजस्थान में दीनदयाल के उत्पाद करीब 60 वर्षों से बाजार में उपलब्ध हैं। अजमेर और भरतपुर इकाइयों में उत्पादित औषधियों को अंतरराष्ट्रीय पैकिंग और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। दीनदयाल इंडस्ट्रीज के पोर्टफोलियो में 600 से अधिक आयुर्वेदिक उत्पाद शामिल हैं। इनमें एथिकल एवं क्लासिकल औषधियां, अवलेह, आसव, चूर्ण, तेल, वटी, रस, गूग्गल, भस्म, पिष्टी, कैप्सूल, टैबलेट, सीरप, शर्बत और ठंडाई आदि शामिल हैं। कंपनी के अनुसार उसने वटीलाइजर 303 आयुर्वेदिक कैप्सूल भी तैयार किया है। दीनदयाल च्यवनप्राश भी कंपनी के प्रमुख उत्पादों में शामिल है।

कंपनी का देशभर में 10 सुपर स्टॉकिस्ट, 40 एरिया वितरक और 300 वितरक का नेटवर्क है। जयपुर, कानपुर, रायपुर और गाजियाबाद में चार डिपो हैं। कंपनी ने अखिल भारतीय आयुर्वेदिक उत्पाद बाजार में करीब 5 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

कंपनी के चेयरमैन आनंदमोहन छापरवाल ने डॉ. गोपालकृष्ण छापरवाल दीनदयाल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की है। फाउंडेशन आयुर्वेद के क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षा, संवाद, सेमिनार और सम्मान समारोह आयोजित करता है। कंपनी के अनुसार प्रत्येक बैच की गुणवत्ता फाउंडेशन की प्रयोगशाला में जांच के बाद ही उसे बाजार में भेजा जाता है।

कंपनी का कहना है कि आधुनिक वैज्ञानिक कसौटियों के अनुरूप अनुसंधान और प्रशिक्षण के माध्यम से आयुर्वेद को आगे बढ़ाना उसका उद्देश्य है। इसके साथ ही उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आधुनिकीकरण और नए बाजारों तक पहुंच बनाने पर भी लगातार काम किया जा रहा है।

Next Story