राजस्थान

कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले में आईपीएस आनंद शर्मा समेत 24 पुलिसकर्मी बरी

SHIDDHANT
19 Jun 2026 7:50 PM IST
कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले में आईपीएस आनंद शर्मा समेत 24 पुलिसकर्मी बरी
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Jaipur जयपुर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर से जुड़े चर्चित कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद निचली अदालत के पहले के आदेश को रद्द कर दिया है। इस फैसले के साथ ही आईपीएस अधिकारी आनंद शर्मा समेत 24 पुलिसकर्मियों पर लगाए गए फर्जी एनकाउंटर और हत्या के सभी आरोप खारिज कर दिए गए हैं। सेशन कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि कमलेश प्रजापत की मौत न तो पूर्व नियोजित हत्या थी और न ही कोई फर्जी एनकाउंटर। अदालत ने माना कि पुलिस टीम ने अपनी जान बचाने के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में आत्मरक्षा के तहत कार्रवाई की थी।
इस फैसले से राजस्थान पुलिस के उन अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले लगभग पांच वर्षों से कानूनी कार्यवाही और मानसिक तनाव का सामना कर रहे थे। यह मामला 22 अप्रैल 2021 की रात का है, जब एक विशेष पुलिस टीम ने बाड़मेर सदर थाना क्षेत्र में कमलेश प्रजापत के घर पर छापा मारा था। पुलिस को सूचना मिली थी कि वह अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। पुलिस के अनुसार, जब कमांडो दस्ते ने उसके घर को घेर लिया तो आत्मसमर्पण करने के बजाय उसने भागने की कोशिश की। आरोप है कि उसने अपनी महिंद्रा एक्सयूवी गाड़ी स्टार्ट की, तेज रफ्तार से बाहर निकलने का प्रयास किया और मुख्य लोहे का गेट तोड़ दिया। पुलिस के मुताबिक, भागने के दौरान उसने गाड़ी पुलिसकर्मियों और कमांडो की ओर मोड़ दी, जिससे कई अधिकारियों को खुद को बचाने के लिए पीछे हटना पड़ा।
पुलिस का कहना है कि अपनी जान पर खतरा देखते हुए कमांडो ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। उन्होंने गाड़ी के टायरों और चालक की तरफ निशाना साधा। गोली लगने से कमलेश प्रजापत घायल हो गया और अस्पताल पहुंचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। बाद में उसके घर की तलाशी के दौरान कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी, कई लग्जरी वाहन, डोडा-पोस्त का दूध (अफीम लेटेक्स) और अवैध हथियार बरामद किए गए। जांच एजेंसियों ने इसे कमलेश प्रजापत द्वारा संचालित कथित आपराधिक नेटवर्क के सबूत के रूप में पेश किया। एनकाउंटर के बाद बाड़मेर और आसपास के जिलों में विवाद खड़ा हो गया। कमलेश प्रजापत के परिवार और प्रजापत समाज के लोगों ने पुलिस के दावे को खारिज करते हुए इसे पहले से सुनियोजित राजनीतिक हत्या बताया, जिसे एनकाउंटर का रूप दिया गया। परिजनों का आरोप था कि कमलेश प्रजापत का उस समय कांग्रेस सरकार में राजस्व एवं कैबिनेट मंत्री रहे हरीश चौधरी के भाई के साथ विवाद चल रहा था।
इस विवाद के चलते पूरे मारवाड़ क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन, धरने और रैलियां हुईं, जिससे तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया। प्रजापत समाज और विपक्षी दलों के बढ़ते दबाव के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मई 2021 में मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने निष्कर्ष निकाला कि उपलब्ध साक्ष्य पुलिस के दावे का समर्थन करते हैं और कमलेश प्रजापत की मौत आत्मरक्षा में की गई फायरिंग के कारण हुई। इसके बाद एजेंसी ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर पुलिसकर्मियों और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी को क्लीन चिट दे दी।
मामले ने अप्रैल 2025 में नया मोड़ लिया, जब कमलेश प्रजापत की पत्नी जसोदा ने सीबीआई की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए विरोध याचिका दाखिल की। याचिका पर सुनवाई के दौरान जोधपुर की एसीजेएम सीबीआई अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी और तत्कालीन बाड़मेर एसपी आनंद शर्मा तथा पाली एसपी कालूराम रावत समेत 24 पुलिसकर्मियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने हरीश चौधरी और उनके भाई की कथित भूमिका की दोबारा जांच के भी निर्देश दिए।
इसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों और सीबीआई ने एसीजेएम अदालत के फैसले को जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट में चुनौती दी। अपने ताजा फैसले में सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश में गंभीर खामियां पाईं और उसे रद्द कर दिया। अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को बहाल रखते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य हत्या या फर्जी एनकाउंटर के आरोपों का समर्थन नहीं करते। अदालत ने माना कि पुलिसकर्मियों ने अपनी जान पर तत्काल खतरा होने की स्थिति में आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी। इस फैसले के बाद 24 पुलिसकर्मियों पर हत्या के मुकदमे का खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है। वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई और अनिश्चितता के बाद यह फैसला संबंधित पुलिस अधिकारियों के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।
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