राजस्थान

लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए बड़ी खुशखबरी, थार में तीन चूजों का संरक्षण शुरू

nidhi
31 July 2026 9:30 AM IST
लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए बड़ी खुशखबरी, थार में तीन चूजों का संरक्षण शुरू
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थार की धरती पर गूंजेगी गोडावण की आवाज, तीन चूजों को बनाया जा रहा जंगली जीवन के लिए तैयार
जैसलमेर: राजस्थान के थार रेगिस्तान में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संरक्षण अभियान को नई उम्मीद मिली है। जैसलमेर में इस दुर्लभ पक्षी के तीन चूजों को सुरक्षित वातावरण में बड़ा किया जा रहा है, जहां वे धीरे-धीरे प्राकृतिक जीवन जीने के तौर-तरीके सीख रहे हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इन चूजों का संरक्षण प्रजाति को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन्हें इस तरह तैयार किया जा रहा है कि भविष्य में वे खुले प्राकृतिक वातावरण में खुद को बेहतर ढंग से ढाल सकें।
विलुप्ति के खतरे से जूझ रहा है गोडावण
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शामिल है। कभी राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले इस पक्षी की संख्या अब बहुत कम रह गई है।
बिजली की हाईटेंशन तारें, आवास क्षेत्र में कमी और बदलते पर्यावरणीय हालात इसके अस्तित्व के लिए बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं।
बाड़े में सीख रहे हैं प्राकृतिक व्यवहार
इन तीन चूजों को नियंत्रित वातावरण वाले विशेष बाड़े में रखा गया है। यहां उन्हें भोजन तलाशने, चलने-फिरने और आसपास के माहौल को समझने जैसे प्राकृतिक व्यवहार विकसित करने का अवसर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञ लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं, ताकि वे धीरे-धीरे जंगल में रहने के लिए तैयार हो सकें।
संरक्षण कार्यक्रम से बढ़ी उम्मीद
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए राजस्थान में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। वैज्ञानिक प्रजनन और कृत्रिम संरक्षण कार्यक्रमों के जरिए इस दुर्लभ पक्षी की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सफल संरक्षण से आने वाले समय में गोडावण की आबादी को स्थिर करने में मदद मिल सकती है।
थार की पहचान से जुड़ा पक्षी
गोडावण राजस्थान के मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पक्षी थार के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में भूमिका निभाता है और राज्य की जैव विविधता की पहचान भी है।
इसके संरक्षण से न केवल एक प्रजाति बचेगी, बल्कि रेगिस्तानी पर्यावरण की सुरक्षा में भी मदद मिलेगी।
भविष्य के लिए नई आशा
इन तीन चूजों का स्वस्थ विकास संरक्षण विशेषज्ञों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि वे सफलतापूर्वक प्राकृतिक जीवन के लिए तैयार हो जाते हैं, तो यह गोडावण संरक्षण अभियान की बड़ी उपलब्धि होगी।
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