राजस्थान

अधिकारियों पर सरकार का सख्त रुख, CM ने अनुशासनात्मक कार्रवाई को दी मंजूरी

Kavita2
15 July 2026 9:59 AM IST
अधिकारियों पर सरकार का सख्त रुख, CM ने अनुशासनात्मक कार्रवाई को दी मंजूरी
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जयपुर : राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक अधिकारी, राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) के दो अधिकारियों सहित राज्य सरकार के कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मंजूरी दे दी है। सरकार की ओर से मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में इस निर्णय की जानकारी दी गई। इसके साथ ही दहेज उत्पीड़न के एक मामले में दोषी पाए गए एक चिकित्सा अधिकारी को सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का भी फैसला लिया गया है।

सरकारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने संबंधित मामलों की समीक्षा के बाद विभिन्न अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुमति प्रदान की है। राज्य सरकार का कहना है कि प्रशासनिक सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन बनाए रखने के लिए नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की मंजूरी मिलने वालों में एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी और राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) के दो अधिकारी शामिल हैं। इनके अलावा राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत अन्य अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की स्वीकृति दी गई है। हालांकि आधिकारिक बयान में संबंधित अधिकारियों के नाम या उनके विरुद्ध लगे आरोपों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।

सरकार का कहना है कि सभी मामलों में संबंधित सेवा नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्रवाई की जाएगी। जिन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच या अन्य प्रक्रियाएं प्रस्तावित हैं, उन्हें भी नियमानुसार अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

इसी के साथ राज्य सरकार ने एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषी पाए गए एक चिकित्सा अधिकारी को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी और विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई के बाद यह निर्णय लिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों और दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

राज्य सरकार का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों का आचरण सेवा नियमों के अनुरूप होना चाहिए। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी गंभीर आपराधिक मामले में दोषी पाया जाता है या उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध होते हैं, तो उसके विरुद्ध सेवा नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है। इसी नीति के तहत चिकित्सा अधिकारी की सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी सेवाओं में अनुशासन बनाए रखने के लिए समय-समय पर विभागीय कार्रवाई आवश्यक होती है। इससे कर्मचारियों में जवाबदेही की भावना मजबूत होती है और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बनती है। साथ ही यह संदेश भी जाता है कि नियमों के उल्लंघन या गंभीर मामलों में दोषी पाए जाने पर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को राहत नहीं मिलेगी।

राज्य सरकार ने हाल के महीनों में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर विशेष जोर दिया है। विभिन्न विभागों में लंबित अनुशासनात्मक मामलों की समीक्षा की जा रही है और जहां आवश्यक पाया जा रहा है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में बेहतर कार्य संस्कृति स्थापित करना भी है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अनुशासनात्मक कार्रवाई की मंजूरी मिलने के बाद संबंधित मामलों में विभागीय जांच, कारण बताओ नोटिस, जवाब, सुनवाई और अन्य निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। अंतिम निर्णय संबंधित सेवा नियमों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाता है। वहीं, जिन मामलों में न्यायालय का फैसला आ चुका होता है, वहां उसके अनुरूप भी विभागीय कार्रवाई की जाती है।

सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को लेकर चर्चा है कि राज्य सरकार सरकारी सेवाओं में अनुशासन और जवाबदेही को लेकर स्पष्ट संदेश देना चाहती है। विशेष रूप से दहेज उत्पीड़न जैसे सामाजिक अपराधों में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

महिला अधिकारों से जुड़े संगठनों ने भी दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषी चिकित्सा अधिकारी को सेवा से बर्खास्त किए जाने के निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा दी गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की मंजूरी के बाद संबंधित विभाग आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करेंगे। विभागीय जांच और सेवा नियमों के अनुरूप कार्रवाई के बाद आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। सरकार ने दोहराया है कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही बनाए रखने के लिए भविष्य में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी तथा नियमों के उल्लंघन पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

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