राजस्थान

Gehlot का बड़ा दावा: 2022 का राजनीतिक संकट उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष पद से रोकने की साजिश थी

Kavita2
8 Jun 2026 12:01 PM IST
Gehlot का बड़ा दावा: 2022 का राजनीतिक संकट उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष पद से रोकने की साजिश थी
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Rajasthan राजस्थान: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को कहा कि सितंबर 2022 में राज्य में पैदा हुआ राजनीतिक संकट वास्तव में उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष पद से दूर रखने की एक साजिश थी। गहलोत ने यह बयान उस समय दिया जब 2022 की घटनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।

गहलोत ने कहा कि उस समय उनके गुट के विधायकों ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया था, जबकि वे स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की तैयारी में थे। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा विवाद राजनीतिक रूप से उन्हें कमजोर करने की कोशिश का हिस्सा था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “हमसे बार-बार पूछा जाता है कि 25 सितंबर को क्या हुआ था। हम कभी भी हाईकमान के खिलाफ बगावत नहीं कर सकते। हमारा विरोध इस बात को लेकर था कि अगर मैं कांग्रेस अध्यक्ष बनता हूं तो मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट का नाम फाइनल किया जाए।”

उन्होंने आगे 2022 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय जयपुर में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें राज्य के नेतृत्व पर चर्चा होनी थी। गहलोत ने आरोप लगाया कि उनके करीबी कुछ विधायक उस बैठक में शामिल नहीं हुए और उन्होंने एक अलग बैठक कर ली।

गहलोत ने कहा कि उस समय उनके समर्थक विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के घर पर सामूहिक इस्तीफे की पेशकश की थी, जो सचिन पायलट को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाने के विरोध में था। उन्होंने इसे राजनीतिक असहमति का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस की अंदरूनी प्रक्रिया का हिस्सा था, लेकिन इसे गलत तरीके से बगावत के रूप में पेश किया गया।

पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान ने एक बार फिर राजस्थान की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। 2022 के घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस के भीतर पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं और गहलोत-पायलट गुटों के बीच तनाव की चर्चा समय-समय पर होती रही है।

गहलोत का कहना है कि उस समय की परिस्थितियों को सही तरीके से नहीं समझा गया और उनके खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाया गया। उन्होंने यह भी दोहराया कि वे हमेशा पार्टी नेतृत्व के प्रति वफादार रहे हैं और किसी भी प्रकार की बगावत का हिस्सा नहीं रहे।

इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में फिर से बहस शुरू हो गई है कि 2022 में राजस्थान में वास्तव में क्या हुआ था और उसके पीछे क्या राजनीतिक रणनीति थी। कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय देखने को मिल सकती है।

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