राजस्थान

Former Chief Justice DY Chandrachud's statement: Umar Khalid has the right to a speedy trial

SHIDDHANT
18 Jan 2026 11:32 PM IST
Former Chief Justice DY Chandrachuds statement: Umar Khalid has the right to a speedy trial
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Jaipur जयपुर: भारत के पूर्व चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने उमर खालिद के मामले को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उमर खालिद पिछले पांच वर्षों से जेल में हैं और उन्हें जल्द सुनवाई का अधिकार होना चाहिए। पूर्व चीफ जस्टिस ने यह स्पष्ट किया कि वे अपने कोर्ट की आलोचना नहीं कर रहे हैं, लेकिन बेल की शर्तों का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए शर्तें लगाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में अगर जल्द सुनवाई संभव नहीं है तो बेल नियम होना चाहिए, अपवाद नहीं।
डी.वाई. चंद्रचूड़ ने अपने 24 महीने के कार्यकाल के दौरान किए गए बेल निपटारे के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान लगभग 21,000 बेल आवेदनों का निपटारा किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामले होते हैं जिनके बारे में लोग तब नहीं सोचते, जब वे किसी विशेष मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बेल न देने की आलोचना करते हैं।
पूर्व चीफ जस्टिस ने कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के एक केस का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्हें गुवाहाटी में फ्लाइट में चढ़ते समय गिरफ्तार किया जाना था। पैरामिलिट्री फोर्सेज ने उनके विमान को घेर लिया था, लेकिन वकीलों की त्वरित प्रतिक्रिया और कोर्ट की हस्तक्षेप से उन्हें गिरफ्तार होने से बचाया गया। चंद्रचूड़ ने कहा कि पवन खेड़ा ने जो कुछ कहा, वह असभ्य था, लेकिन कानून के तहत वह अपराध नहीं था। इस प्रकार की कार्रवाईयों में न्यायपालिका ने विवेकपूर्ण हस्तक्षेप किया।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ असभ्य टिप्पणियों को अपराध मानना न्यायिक प्रक्रिया के दायरे से बाहर हो सकता है। चंद्रचूड़ ने न्यायपालिका की संवेदनशीलता और विवेकशीलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेल नियम और जल्द सुनवाई की प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों और न्यायिक स्वतंत्रता की कसौटी हैं।
पूर्व चीफ जस्टिस ने अपने भाषण में यह भी स्पष्ट किया कि बेल न देने या देर से सुनवाई के मामलों में न्यायपालिका की आलोचना को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अदालतें केवल नियमों और कानून के दायरे में कार्य करती हैं और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोपरि है।
डी.वाई. चंद्रचूड़ का यह बयान उन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया, राजनीतिक हस्तक्षेप और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। उनके अनुभव और उदाहरण दिखाते हैं कि न्यायपालिका कभी भी पक्षपाती नहीं होती और हर व्यक्ति को कानूनी अधिकारों का सम्मान करना अनिवार्य है।
इस प्रकार का बयान उमर खालिद और अन्य लंबित मामलों में न्याय प्रक्रिया की पारदर्शिता और जल्दी सुनवाई की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। साथ ही यह विपक्षी नेताओं और सामान्य नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा को भी न्यायपालिका के नजरिए से समझने का अवसर प्रदान करता है।
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