राजस्थान

बैंक फ्रॉड केस में पूर्व शाखा प्रबंधक दोषी 7 साल की सजा

Ratna Netam
5 Oct 2026 6:44 PM IST
बैंक फ्रॉड केस में पूर्व शाखा प्रबंधक दोषी 7 साल की सजा
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जयपुर। जयपुर की एक सीबीआई अदालत ने 3.61 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की गोपालपुरा बाईपास शाखा, जयपुर के पूर्व शाखा प्रबंधक राम भरोस मीना को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 2.85 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसी मामले में निजी व्यक्ति माखन लाल मीना को तीन साल के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।अदालत ने इस मामले में 30 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र की गोपालपुरा बाईपास शाखा से जुड़ा हुआ है और इसमें कुल 3.61 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का आरोप था। सुनवाई के बाद सीबीआई अदालत ने मामले में दोनों आरोपियों को सजा सुनाई।
पूर्व शाखा प्रबंधक को सात साल की सजा
मामले में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, गोपालपुरा बाईपास शाखा, जयपुर के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राम भरोस मीना को अदालत ने सात साल के कठोर कारावास की सजा दी। इसके साथ ही उन पर 2.85 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।अदालत का यह फैसला बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले की सुनवाई के बाद आया। मामले में बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक की भूमिका को लेकर सीबीआई ने जांच की थी और आरोपों के आधार पर मुकदमा चलाया गया।
निजी व्यक्ति को भी जेल
इसी मामले में निजी व्यक्ति माखन लाल मीना को भी अदालत ने दोषी ठहराते हुए तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।इस तरह 3.61 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग सजा सुनाई। पूर्व शाखा प्रबंधक को सात साल और निजी व्यक्ति को तीन साल के कठोर कारावास की सजा मिली है।
बैंक की शिकायत पर शुरू हुई कार्रवाई
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के जयपुर स्थित जोनल कार्यालय की ओर से दी गई लिखित शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू की थी। बैंक ऑफ महाराष्ट्र, जोनल कार्यालय, जयपुर ने 3 जून 2016 को इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मामले की जांच की और बाद में 9 नवंबर 2016 को केस दर्ज किया। इसके बाद मामले में जांच आगे बढ़ाई गई और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चली।
2016 में दर्ज हुआ था मामला
सीबीआई ने 9 नवंबर 2016 को बैंक धोखाधड़ी से संबंधित मामला दर्ज किया था। यह मामला बैंक की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायत में 3.61 करोड़ रुपये से जुड़े बैंक धोखाधड़ी के मामले की जानकारी दी गई थी।जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपों की जांच की। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा, जहां आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुनाया है।
30 सितंबर को आया फैसला
जयपुर की सीबीआई अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मामले में फैसला सुनाया। अदालत के फैसले के तहत राम भरोस मीना को सात साल का कठोर कारावास और 2.85 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं माखन लाल मीना को तीन साल के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई।अदालत के इस फैसले के बाद 3.61 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपियों के खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण का समापन हुआ है।
बैंक धोखाधड़ी के मामलों में सख्त कार्रवाई
बैंकों से जुड़े वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में जांच एजेंसियां शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच करती हैं। इस मामले में भी बैंक ऑफ महाराष्ट्र के जोनल कार्यालय की लिखित शिकायत के बाद सीबीआई ने केस दर्ज किया था। जांच के बाद मामला अदालत तक पहुंचा और सुनवाई के दौरान आरोपों पर विचार किया गया।जयपुर की सीबीआई अदालत द्वारा सुनाई गई सजा में दोनों आरोपियों के लिए अलग-अलग कारावास और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। पूर्व शाखा प्रबंधक राम भरोस मीना को सात साल का कठोर कारावास मिला है, जबकि निजी व्यक्ति माखन लाल मीना को तीन साल की सजा सुनाई गई है।फिलहाल अदालत के 30 सितंबर 2026 के फैसले के साथ 3.61 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में दोनों आरोपियों को सजा सुनाई जा चुकी है। यह मामला 2016 में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के जयपुर जोनल कार्यालय की शिकायत के बाद सीबीआई द्वारा दर्ज किया गया था।
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