राजस्थान

इतिहास को भूलना अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होना: शेखावत

Admindelhi1
21 Oct 2026 8:52 AM IST
इतिहास को भूलना अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होना: शेखावत
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अपनी संस्कृति और परंपराओं की जानकारी जरूरी: शेखावत

जोधपुर: केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि जो समाज अपने इतिहास को भूल जाता है, वह अपनी जड़ों से कट जाता है, इसलिए जरूरी है कि हम इतिहास से लगातार जुड़े रहें।

मंगलवार को बीजेएस राजपूत सभा भवन में वीर शिरोमणि महाराव शेखाजी की जयंती एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शेखावत ने कहा कि भारत के बौद्धिक ज्ञान, विज्ञान, संपदा और समृद्धि से आकर्षित होकर अनेक आक्रांता यहां आए। भारत की सभ्यता और उसकी संपन्नता ने विदेशी शक्तियों को आकर्षित किया। सिकंदर के समय से लेकर हूणों, कुषाणों और बाद के आक्रांताओं तक भारत ने लंबे समय तक बाहरी आक्रमणों का सामना किया। इसके बावजूद भारतीय सभ्यता की निरंतरता बनी रही।

इसका श्रेय उन पूर्वजों के साहस, संघर्ष, त्याग और अपनी संस्कृति के प्रति अटूट निष्ठा को जाता है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी देश की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखा। केंद्रीय मंत्री ने समाज से अपने इतिहास और गौरवशाली परंपराओं को संरक्षित करने का आह्वान करते हुए कहा कि पूर्वजों के आदर्शों को केवल स्मरण करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, अपितु उन्हें नई पीढ़ी के संस्कारों और जीवन मूल्यों का हिस्सा बनाना चाहिए।

इतिहास से जुड़ाव ही समाज को अपनी पहचान, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक बनाए रखता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इतिहास पुरुषों के शौर्य, संघर्ष और आदर्शों को केवल जयंती समारोहों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उनके जीवन मूल्यों को आत्मसात कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। समाज का विकास केवल राजनीतिक सामर्थ्य से नहीं, अपितु शिक्षा, संस्कार, सामाजिक एकता और चरित्र निर्माण से होता है। केंद्रीय मंत्री ने समाज की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर आने वाली पीढिय़ों के लिए सशक्त, जागरूक और संस्कारवान समाज का निर्माण करना चाहिए। इसके लिए सामाजिक एकता मजबूत करने, युवाओं को प्रोत्साहित करने और अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने की आवश्यकता है।

कृषि विश्विद्यालय के कुलगुरु डॉ वीरेंद्र सिंह जैतावत, प्रोफेसर डॉ सुशीला शक्तावत, प्रोफेसर कल्याण सिंह शेखावत, मारवाड़ राजपूत सभा अध्यक्ष रविन्द्र सिंह राणावत, पार्षद स्वरूप सिंह सांगलिया सहित अनेक गणमान्य लोग एवं समाज के बंधु मौजूद रहे।

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