राजस्थान

जोधपुर में तरंग शक्ति 2026 कई देशों के लड़ाकू विमानों ने भरी उड़ान

Ratna Netam
8 Oct 2026 3:41 PM IST
जोधपुर में तरंग शक्ति 2026 कई देशों के लड़ाकू विमानों ने भरी उड़ान
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जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर में भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास 'तरंग शक्ति 2026' जारी है। इस अभ्यास में भारत के साथ कई मित्र देशों की वायुसेनाएं हिस्सा ले रही हैं। 26 सितंबर से शुरू हुआ यह अभ्यास 12 अक्टूबर 2026 तक एयरफोर्स स्टेशन जोधपुर और आसपास के हवाई ठिकानों पर आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष अभ्यास की थीम 'पावर इन पार्टनरशिप' यानी 'साझेदारी में शक्ति' रखी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाना, संयुक्त अभियानों की तैयारी करना और आधुनिक हवाई युद्ध से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत बनाना है। अभ्यास में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हवा में ईंधन भरने वाले विमान शामिल हैं।
इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास में भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम भी हिस्सा ले रही है। टीम के सदस्य स्क्वाड्रन लीडर गौतम त्यागी ने अभ्यास में भाग लेने को सम्मान की बात बताया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के बेहतरीन एविएटर्स और विमानन क्षेत्र के पेशेवरों के साथ आसमान साझा करना उनके लिए एक विशेष अवसर है।समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में स्क्वाड्रन लीडर गौतम त्यागी ने कहा, "मैं सारंग डिस्प्ले टीम का सदस्य हूं। तरंग शक्ति 2026 में भाग लेना हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है। इससे भी बड़ी बात यह है कि हमें दुनिया के बेहतरीन एविएटर्स और प्रोफेशनल्स के साथ आसमान साझा करने का मौका मिल रहा है।"
उनके इस बयान से अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय वायुसेना के जवानों के उत्साह और पेशेवर सहयोग की भावना का पता चलता है। सारंग टीम भारतीय वायुसेना की प्रमुख हेलीकॉप्टर एरोबेटिक टीम है, जो अपने सटीक उड़ान प्रदर्शन और हवाई करतबों के लिए जानी जाती है। यह टीम स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर का उपयोग करती है।भारतीय वायुसेना के लिए 'तरंग शक्ति 2026' केवल लड़ाकू विमानों का संयुक्त अभ्यास नहीं है, बल्कि अलग-अलग देशों के पायलटों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच भी है। इसमें शामिल वायुसेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण तकनीकों और हवाई अभियानों के संचालन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश सहित सात मित्र देशों की वायुसेनाएं भाग ले रही हैं। इनमें अलग-अलग प्रकार के लड़ाकू और सैन्य परिवहन विमान शामिल हैं। अभ्यास में एफ-35 लाइटनिंग-II, राफेल, एफ-16, ए400एम, एमआरटीटी, सी-130, सी-130जे और केसी-30ए जैसे विमान हिस्सा ले रहे हैं। इन विमानों की भागीदारी से संयुक्त अभियानों के दौरान विभिन्न तकनीकों और क्षमताओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।इस अभ्यास की एक प्रमुख विशेषता अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के एफ-35 लड़ाकू विमान की भागीदारी है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के सुखोई एसयू-30 एमकेआई, राफेल और स्वदेशी तेजस जैसे लड़ाकू विमान भी अभ्यास में शामिल हैं। इन विमानों के माध्यम से अलग-अलग प्रकार के हवाई मिशनों और संयुक्त संचालन की प्रक्रियाओं का अभ्यास किया जा रहा है।
भारतीय वायुसेना ने अभ्यास से संबंधित वीडियो भी साझा किए हैं। इनमें विभिन्न देशों के लड़ाकू विमान एक साथ उड़ान भरते दिखाई दे रहे हैं। संयुक्त फॉर्मेशन में उड़ान भरने के दौरान पायलटों को सटीक नियंत्रण, आपसी तालमेल और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। भारतीय वायुसेना ने इन गतिविधियों को भरोसे, सटीकता और सैन्य सहयोग की भावना से जोड़ा है।तरंग शक्ति 2026 का मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप संयुक्त हवाई अभियानों की योजना बनाने और उन्हें संचालित करने का अनुभव देना है। अभ्यास के दौरान हवाई रक्षा, लड़ाकू अभियानों, टोही गतिविधियों, सैन्य परिवहन और हवा में ईंधन भरने जैसी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आधुनिक युद्ध में लड़ाकू विमान अकेले काम नहीं करते, बल्कि उन्हें निगरानी प्रणालियों, परिवहन विमानों और अन्य सहायता संसाधनों के साथ समन्वय बनाकर अभियान पूरा करना होता है। ऐसे में बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच परिचालन संबंधी तालमेल विकसित करने में मदद करते हैं।इससे पहले भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2024 में तरंग शक्ति अभ्यास का पहला संस्करण आयोजित किया था। उस अभ्यास के अनुभवों को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2026 में फिर से मित्र देशों की वायुसेनाओं को एक मंच पर लाया गया है। इसका उद्देश्य संयुक्त प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग को अधिक प्रभावी बनाना है।
अभ्यास की तैयारियों के संबंध में भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने बताया था कि तरंग शक्ति का उद्देश्य एक-दूसरे से सीखना, मिलकर काम करना और भविष्य के हवाई युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयार होना है। उन्होंने कहा था कि यह अभ्यास हवाई अभियानों के विभिन्न क्षेत्रों को शामिल करता है और प्रतिभागियों को जटिल परिस्थितियों में संयुक्त मिशनों की तैयारी का अवसर प्रदान करता है।इस अभ्यास के माध्यम से भारत को अपनी वायुसेना की परिचालन क्षमताओं और स्वदेशी विमानन तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का भी अवसर मिल रहा है। सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम और स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान की भागीदारी भारतीय विमानन क्षेत्र की क्षमताओं को सामने लाती है।
स्क्वाड्रन लीडर गौतम त्यागी के अनुसार, विश्व के अनुभवी पायलटों और विमानन पेशेवरों के साथ उड़ान भरना एक महत्वपूर्ण अनुभव है। इससे अलग-अलग देशों के वायुसैनिकों को पेशेवर स्तर पर संवाद और सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलता है।जोधपुर में जारी तरंग शक्ति 2026 अभ्यास का समापन 12 अक्टूबर को निर्धारित है। तब तक विभिन्न देशों की वायुसेनाएं संयुक्त प्रशिक्षण और परिचालन गतिविधियों में हिस्सा लेंगी। 'पावर इन पार्टनरशिप' की थीम पर आयोजित यह अभ्यास भारतीय वायुसेना और मित्र देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग तथा संयुक्त प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
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