राजस्थान

नकली ऑक्सीटोसिन मामला, केंद्र और WHO ने रिपोर्ट मांगी

Kavita2
28 Jun 2026 10:44 AM IST
नकली ऑक्सीटोसिन मामला, केंद्र और WHO ने रिपोर्ट मांगी
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Rajasthan राजस्थान: कोटा में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के कथित इस्तेमाल से हुई महिलाओं की मौतों का मामला अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर होता जा रहा है। इस मामले में कोटा के एक दवा डिस्ट्रीब्यूटर का लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राजस्थान सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी भारत सरकार से देशभर में नकली ऑक्सीटोसिन के प्रसार और इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर फार्माकोविजिलेंस रिपोर्ट मांगी है।

जानकारी के अनुसार, यह मामला मई महीने का है, जब कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सी-सेक्शन (C-Section) के बाद कम से कम पांच महिलाओं की मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई कि इन मौतों के पीछे अनियंत्रित रक्तस्राव (अनकंट्रोल्ड ब्लीडिंग) और नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल एक प्रमुख कारण हो सकता है।

इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और औषधि नियंत्रण एजेंसियों ने जांच तेज कर दी थी। जांच में कोटा के एक दवा डिस्ट्रीब्यूटर पर नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन सप्लाई करने का आरोप सामने आया, जिसके बाद उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद पूरे राज्य में दवा सप्लाई सिस्टम और इंजेक्शन की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस घटना को गंभीर मानते हुए राजस्थान सरकार से पूरी रिपोर्ट मांगी है, जिसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि नकली दवाओं की आपूर्ति कैसे हुई, किन अस्पतालों तक यह दवा पहुंची और इसमें किन-किन स्तरों पर लापरवाही हुई।

इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस मामले में चिंता जताते हुए भारत सरकार से विस्तृत फार्माकोविजिलेंस रिपोर्ट मांगी है। WHO ने यह जानना चाहा है कि देश में नकली ऑक्सीटोसिन जैसे जीवनरक्षक दवाओं की निगरानी प्रणाली कितनी प्रभावी है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

राजस्थान के कोटा, बीकानेर और जोधपुर के सरकारी अस्पतालों में हाल के दिनों में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत और सी-सेक्शन के बाद जटिलताओं के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऑक्सीटोसिन एक महत्वपूर्ण दवा है जिसका उपयोग प्रसव के बाद रक्तस्राव रोकने और गर्भाशय संकुचन के लिए किया जाता है। यदि यह नकली या मानक से कम गुणवत्ता वाली हो, तो यह जीवन के लिए खतरा बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाओं की सप्लाई सिस्टम में सेंध एक गंभीर समस्या है, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान से जुड़ी हुई है। ऐसे मामलों में न केवल अस्पताल प्रशासन, बल्कि सप्लाई चेन और नियामक एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है।

इस घटना के बाद राज्य सरकार ने दवा आपूर्ति और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। साथ ही, संबंधित अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं।

केंद्रीय एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में लापरवाही या जानबूझकर नकली दवा की सप्लाई की पुष्टि होती है, तो मामले में और सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल इस पूरे मामले की जांच कई स्तरों पर चल रही है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर भारत की दवा निगरानी व्यवस्था और अस्पताल सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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