पहचान छिपाने को अंगूठा तक क्षतिग्रस्त किया, फिर भी गिरफ्त में आया VDO

जयपुर : राजस्थान पुलिस की कांस्टेबल भर्ती-2020 परीक्षा में अपने भाई की जगह डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देने के मामले में जयपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब छह साल बाद एक ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) को गिरफ्तार किया है। आरोपी घटना के समय राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत था। बाद में उसने ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली और वर्तमान में झुंझुनूं जिले के बुहाना क्षेत्र में तैनात था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने पहचान छिपाने और गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने बाएं हाथ के अंगूठे को जानबूझकर क्षतिग्रस्त कर लिया था, ताकि फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं हो सके।
पुलिस उपायुक्त (जयपुर दक्षिण) राजर्षि राज ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान मनोज यादव के रूप में हुई है। उस पर आरोप है कि उसने वर्ष 2020 में आयोजित राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में अपने भाई की जगह बैठकर लिखित परीक्षा दी थी। परीक्षा के दौरान उसने डमी अभ्यर्थी के रूप में भाई की पहचान का इस्तेमाल किया और भर्ती प्रक्रिया को धोखा देने का प्रयास किया।
इस मामले का खुलासा होने के बाद वर्ष 2021 में जयपुर के सोडाला थाने में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, आरोपी लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। जांच एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में जुटी थीं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। आखिरकार पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजों और अन्य जानकारियों के आधार पर उसे गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
पुलिस जांच के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए बाएं हाथ के अंगूठे को इस तरह क्षतिग्रस्त कर लिया था कि उसका फिंगरप्रिंट स्पष्ट रूप से मिलान न हो सके। पुलिस को आशंका है कि यह कदम उसने जांच एजेंसियों को गुमराह करने और गिरफ्तारी से बचने के उद्देश्य से उठाया था। फिलहाल इस पहलू की भी गहन जांच की जा रही है कि अंगूठे को किस परिस्थिति में और कब नुकसान पहुंचाया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले की दोबारा गहन जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि भर्ती परीक्षा में इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच एजेंसियां यह भी जानने का प्रयास कर रही हैं कि क्या आरोपी ने किसी गिरोह या संगठित नेटवर्क की मदद से परीक्षा में प्रवेश किया था या फिर यह केवल पारिवारिक स्तर पर की गई साजिश थी।
जांच के दौरान परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड, आवेदन पत्र, दस्तावेज, उपस्थिति पत्रक और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का भी मिलान किया जा रहा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने बाद में अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भी किसी प्रकार की अनियमितता की थी। चूंकि आरोपी वर्तमान में ग्राम विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत था, इसलिए उसके सेवा रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, डमी अभ्यर्थियों और फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे मामलों के बाद सरकार और जांच एजेंसियों ने भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल निगरानी और दस्तावेजों के ऑनलाइन सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। ऐसे मामलों में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उन्हें भी कानून के दायरे में लाया जाएगा।
फिलहाल आरोपी मनोज यादव से पूछताछ जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान भर्ती परीक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस पूरे मामले में किसी अन्य अभ्यर्थी, बिचौलिए या अधिकारी की भी भूमिका रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।





