राजस्थान

Dungarpur: यूसीसी जनसुनवाई में नाता प्रथा पर प्रतिबंध और एसटी वर्ग को छूट की मांग

Admindelhi1
16 July 2026 7:40 PM IST
Dungarpur: यूसीसी जनसुनवाई में नाता प्रथा पर प्रतिबंध और एसटी वर्ग को छूट की मांग
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जनसुनवाई में यूसीसी पर आए विविध सुझाव, एसटी वर्ग के लिए छूट की भी मांग

डूंगरपुर: राजस्थान में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रस्तावित प्रारूप को लेकर आमजन और विभिन्न वर्गों की आकांक्षाओं को टटोलने की कवायद तेज हो गई है। इसी कड़ी में डूंगरपुर जिला मुख्यालय पर राजस्थान समान नागरिक संहिता-2026 को लेकर दो दिवसीय वर्चुअल जनसुनवाई का सफल आयोजन मंगलवार व बुधवार को किया गया। राजस्थान उच्च न्यायालय के अतिरिक्त महाधिवक्ता एवं यूसीसी समिति के सदस्य बसंत सिंह छाबा की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और संपत्ति अधिकारों जैसे संवेदनशील पारिवारिक कानूनों पर विभिन्न जिलों के जनप्रतिनिधियों, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने खुलकर अपनी राय रखी और कई दूरगामी सुझाव सौंपे।

जिला मुख्यालय स्थित जिला परिषद के ईडीपी सभागार से आयोजित इस जनसुनवाई में जिला कलेक्टर देशलदान, अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रकाश चंद्र रैगर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी हनुमान सिंह राठौड़ सहित विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों, बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं और राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समिति के समक्ष अपनी बात रखी। जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी सुझावों एवं अभ्यावेदनों को नियमानुसार संकलित कर अग्रिम कार्यवाही हेतु संभागीय आयुक्त, उदयपुर को प्रेषित कर दिया गया है।

इस दौरान समाज में व्याप्त कुप्रथाओं को खत्म करने और महिला सशक्तिकरण को लेकर बेहद महत्वपूर्ण सुझाव उभरकर सामने आए। वरिष्ठ पत्रकार तनुज शर्मा ने अंचल में प्रचलित 'नाता प्रथा' पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा इस प्रथा से जन्म लेने वाली संतानों के अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान शामिल करने की वकालत की। वहीं, मन की उड़ान संस्थान की संस्थापिका कामना चौबीसा ने आधुनिक दौर की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए लिव-इन रिलेशनशिप के संबंध में स्पष्ट कानूनी दिशा-निर्देश तय करने, बहु-विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और लैंगिक न्याय के तहत महिला व पुरुष दोनों को समान अधिकार देने की मांग की। इसके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता पूजा मखीजा और राजकुमारी ने विधवा महिलाओं के हितों की सुरक्षा और भरण-पोषण पर बल दिया, जबकि वनवासी कल्याण परिषद के प्रतिनिधि नरेश ने 'एक देश, एक विधान' की अवधारणा का समर्थन किया।

आदिवासी और अनुसूचित क्षेत्रों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान व परंपराओं के संरक्षण का मुद्दा भी इस जनसुनवाई में प्रमुखता से उठा। बार एसोसिएशन डूंगरपुर के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह चुंडावत ने लैंगिक समानता का समर्थन करने के साथ ही सुझाव दिया कि उत्तराखंड राज्य की तर्ज पर राजस्थान में भी अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग को यूसीसी के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाना चाहिए। इसी सुर में सामाजिक कार्यकर्ता सोमा लाल कोटेड ने भी शेड्यूल एरिया अनुसूचित क्षेत्रों की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए विशेष प्रावधानों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करते हुए समाजसेवी सतीश जैन ने बाल विवाह पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान शामिल करने का सुझाव दिया।

सुनवाई के अंत में मोहम्मद इस्माइल कुरैशी, कमलेश अहारी सहित विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अपने-अपने बहुमूल्य सुझाव दर्ज कराए। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट प्रकाश चंद्र रेगर ने बताया कि जनसुनवाई के अलावा अब आमजन गृह विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी क्यूआर कोड एवं वेबसाइट के माध्यम से भी अपने सुझाव एवं अभ्यावेदन ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकते हैं।

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