राजस्थान

Dungarpur: परित्यक्त बालिका के जीवन में आई नई उम्मीद, एकल माता बनी सहारा

Admindelhi1
18 July 2026 1:49 PM IST
Dungarpur: परित्यक्त बालिका के जीवन में आई नई उम्मीद, एकल माता बनी सहारा
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डूंगरपुर: राजकीय शिशु गृह में आवासित एक परित्यक्त बालिका को एकल माता (सिंगल मदर) को गोद देने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में आयोजित दत्तक ग्रहण समिति की बैठक में केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) द्वारा चयनित एकल माता को बालिका अंतरिम रूप से सौंपने का निर्णय लिया गया।

बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक डॉ. कल्पित शर्मा ने बताया कि बैठक में वर्षों से प्रतीक्षारत चयनित एकल माता उपस्थित हुईं। इस दौरान उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब वे और उनकी दत्तक पुत्री एक-दूसरे का संबल बनकर जीवन व्यतीत करेंगे।

बैठक में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष भावेश कुमार जैन तथा शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव यादव ने एकल माता के दस्तावेजों की विस्तृत जांच की। जांच में उन्हें बालिका को गोद लेने के लिए पूर्णतः उपयुक्त पाए जाने पर दत्तक ग्रहण समिति ने सर्वसम्मति से बालिका को अंतरिम रूप से उनके सुपुर्द करने का निर्णय लिया। इसके बाद एकल माता को जिला मजिस्ट्रेट देशल दान के समक्ष प्रस्तुत किया गया। जिला मजिस्ट्रेट ने उनके व्यवसाय, वार्षिक आय और मूल निवास की जानकारी लेने के साथ ही बालिका की उच्च शिक्षा एवं बेहतर परवरिश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

डॉ. शर्मा ने बताया कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2021 के तहत अब जिला बाल संरक्षण इकाई के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अंतिम दत्तक ग्रहण आदेश के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आदेश जारी होने के बाद बालिका को एकल माता की जैविक पुत्री के समान सभी कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे।

शिशु गृह के प्रबंधक कुलदीप शर्मा ने बताया कि 'कारा' पोर्टल के नियमों के अनुसार एकल महिला बालक अथवा बालिका, दोनों में से किसी को भी गोद ले सकती है, जबकि एकल पुरुष केवल बालक को ही गोद लेने के पात्र हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पोर्टल पर रिश्तेदारी एवं सौतेले दत्तक ग्रहण को भी कानूनी मान्यता देने की प्रक्रिया संचालित की जा रही है।

बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता जिमिका भावसार एवं नर्स मनीषा खराड़ी भी उपस्थित रहीं।

बाल अधिकारिता विभाग ने आमजन से अपील की है कि अनचाहे नवजात शिशुओं को असुरक्षित स्थानों पर छोड़ने के बजाय शिशु गृह अथवा जिला चिकित्सालय स्थित पालना गृह में सुरक्षित रूप से छोड़ा जाए। विभाग ने स्पष्ट किया कि ऐसा करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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