राजस्थान

कचरे के मैदान में तब्दील हुए नाले

Admin Delhi 1
1 May 2023 1:21 PM GMT
कचरे के मैदान में तब्दील हुए नाले
x

कोटा: स्मार्ट सिटी में सफाई व्यवस्था के प्रति नगर निगम कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा शहर के प्रमुख नालों की तस्वीर देखकर ही लगाया जा सकता है। हर साल बारिश से पूर्व लाखों रुपए खर्च कर सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। नियमित सफाई पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं है। जरा-सी बारिश होते ही नालों का सड़ांध मारता गंदा पानी सड़कों पर जमा हो जाता है। हालात यह है, मकानों व दुकानों के बीच से गुजर रहे नालों में कचरे व गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। जिससे नाले कम और कचरे के मैदान अधिक नजर आ रहे हैं। दो नगर निगम होने के बावजूद सफाई के प्रति अधिकारी व जनप्रतिनिधि जरा भी संजीदा नहीं है। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण शहर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है, साथ ही संक्रमण व गंभीर बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। बारिश में हालात बेकाबू हो जाते हैं। नालों का पानी सड़कों से होते हुए घरों की चौखट तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद निगम अधिकारी व जनप्रतिनिधि बेपरवाह बने हुए हैं।

2 निगम, 150 पार्षद और 2800 सफाईकर्मी, फिर भी गंदगी

शहर में दो नगर निगम हैं, जो साधन-संसाधन से सम्पन्न है। वहीं, 150 पार्षद और 2800 से अधिक सफाईकर्मी होने के बावजूद शिक्षा नगरी गंदगी के ढेर पर खड़ी है। निगम आयुक्त, उपायुक्त और महापौर एयरकंडीशनर चैम्बर में बैठ सफाई महकमे के अधिकारियों को सफाई के निर्देश तो देते हैं लेकिन जमीनी हकीकत पर आंखें मूंद लेते हैं। ऐसा नहीं है कि कचरे से अटे नाले इन्हें दिखाई नहीं देते, यहां से रोजाना उनका गुजरना होता है, इसके बावजूद वे अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं।

कचरे का मैदान बना संजय नगर का नाला

संजय नगर स्थित नाले की बरसों से सफाई नहीं करवाई गई। यहां नाले में इतना अधिक कचरा जमा है कि वह नाला कम और कचरे का मैदान ज्यादा नजर आता है। स्थानीय निवासी कुलदीप सिंह, दुकानदार भगवान प्रसाद, राधेश्याम सैन ने बताया कि दक्षिण नगर निगम ने पांच साल में एक बार भी इस नाले की सुध नहीं ली। पॉलिथीन व गंदगी से अटा पड़ा है। पानी की निकासी नहीं होने से बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या रहती है। गंदगी से उठती बदबू से सांस लेना तक मुश्किल हो गया है।

सांस लेना तक हो रहा मुश्किल

दादाबाड़ी निवासी कपिल जैन, सुरभी माहेश्वरी, अजय कुमार ने बताया कि दादाबाड़ी नाले की करीब एक साल से सफाई नहीं हुई। गंदगी और कचरे का ढेर लगा हुआ है। खतरनाक बीमारियों के मच्छर पनप रहे हैं। चौराहों पर लगे फास्ट फू्रड के ठेले वाले गंदगी और कूड़ा-कचरा नाले में फेंक रहे हैं। जिससे पानी की निकासी नहीं हो पा रही। गंदगी से उठती दुर्गंध से मोहल्लेवासियों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। कई बार लिखित व मौखिक रूप से महापौर को समस्या से अवगत कराया। सफाई करवाने का आग्रह किया। आश्वासन जरूर मिला लेकिन आज तक सफाई नहीं हुई। इतना ही नहीं, फास्ट फू्रड के ठेले वालों व दुकानदारों के खिलाफ नाले में कचरा फेंकने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

जलकुंभी से अटा साजीदेहड़ा का नाला

किशोरपुरा स्थित साजीदेहड़ा का नाला जलकुंभी से अटा पड़ा है। इसके मौखे तक बंद हो गए हैं। बंजारा कॉलोनी निवासी इरफान, प्रमुलाल, सलीम, नरेश ने बताया कि गत वर्ष बरसात से पूर्व निगम ने चैन माउंटेन मशीन से सफाई करवाई थी, जिससे नाले के मौखे नजर आने लगे थे। इसके बाद से अब तक नाले की सुध नहीं ली गई। साजीदेहड़ा निवासी हनीफ, राकेश ने बताया कि इन दिनों बे-मौसम हो रही बारिश से पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर आ रहा है। निकासी अवरूद्ध होने से सडांध मार रहा है।

जवाहर नगर का नाला हुआ ओवरफ्लो

पश्चिमी विक्षोम के कारण शहर में कुछ दिनों से लगातार मौसम बदल रहा है और बे-मौसम बारिश हो रही है। कभी मूसलाधार तो कभी झमाझम बारिश का दौर जारी है। वहीं, शहर के प्रमुख नाले पॉलिथीन, जलकुंभी, अपशिष्ट पदार्थ सहित कूड़े-कचरे से अटे पड़े हैं। रविवार शाम को हुई झमाझम बारिश से जवाहर नगर का नाला ओवरफ्लो हो गया और गंदा पानी सड़कों पर जमा हो गया। वहीं, कॉलोनियों में जलभराव की समस्या हो गई। मुख्य चौराहे स्थित दुकानों में पानी भर गया। इसके अलावा विज्ञान नगर, संजय नगर, तलवंडी, दादाबाड़ी सहित कई इलाकों की कॉलोनियों में पानी भर गया।

बालाकुंड के नाले में खड़े कचरे व मिट्टी के पहाड़

बालाकुंड निवासी दुकानदार योगेश आहूजा, विमल प्रजापति, ब्रजेश का कहना है, यह नाला कॉलोनियों व मुख्य बाजार से गुजर रहा है। दिनभर दुर्गंध से राहगीरों व दुकानदारों का जीना मुश्किल हो रहा है। पार्षद से लेकर महापौर, सफाई समिति अध्यक्ष व अधिकारियों तक शिकायत कर चुके हैं। फिर भी लंबे समय से सफाई नहीं हुई। बदबू की वजह से ग्राहक भी दुकान पर नहीं आते। जिससे उन्हें नुकसान झेलना पड़ रहा है। किससे शिकायत करें कोई सुनने वाला ही नहीं।

मंत्री शहर चमका रहे और जनप्रतिनिधि सड़ा रहे

कोटा को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए यूडीएच मंत्री पूरी ताकत झौंक रहे हैं। करोड़ों रुपए खर्च कर शहर का सौंदर्य चमका रहे हैं। वहीं, निगम अधिकारी व जनप्रतिनिधि शहर की सुंदरता पर ग्रहण लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। हालात यह हैं, कोटा दक्षिण नगर निगम क्षेत्र के नालों की स्थिति सबसे बुरी है। इनमें विज्ञान नगर, संजय नगर, जवाहर नगर, दादाबाड़ी, टीचर्स कॉलोनी, बालाकुंड और साजिदेहड़ा का नाला कचरे के मैदान में तब्दील हो चुके हैं। ये नाले जलकुंभी और पॉलिथीन से अटे पड़े हैं। पानी की निकासी अवरूद्ध हो चुकी है। गंदगी से उठती दुर्गंध से लोगों का सांस लेना तक दुश्वार हो गया। जरा सी बारिश में सड़ांध मारता पानी घरों की चौखट तक पहुंच रहा है। शिकायतों पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।

कचरा हटे तो बहे पानी

नालों में कचरा अटा होने से बरसात में पानी बहता ही नहीं। इससे नाले उफन कर गंदगी सड़क पर फैला देते हैं। सड़कों पर गड्ढे हो रहे हैं, ऐसे में बरसात का पानी सड़क पर भरने से राहगीरों को गड्ढे नजर नहीं आते। जिससे कई बार दुपहिया वाहन चालक दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं।

गत वर्ष दिसम्बर में सफाई समिति की बैठक हुई थी, जिसमें मैंने निगम आयुक्त व उपायुक्त को सफाई के लिए टैंडर निकालने को कहा था। लेकिन, अधिकारी देरी पर देरी करते गए, कई महीनों तक टैंडर ही जारी नहीं किए। हालांकि, अभी टैंडर जारी हो चुके हैं, लेकिन अधिकारियों को संवेदकों द्वारा भरी गई टैंडर राशि ज्यादा लग रही है, जिसके चलते उन्होंने वर्क आॅर्डर जारी नहीं किया। उनका कहना है कि इस बार संवेदकों ने टैंडर में जो रेट भरी है वह पिछले साल से अधिक है, ऐसे में अप्रूवल नहीं दी गई। अब अधिकारी संवेदकों से रेट कम कराने की जिद पर अड़े हैं। इसके चलते सफाई कार्य में देरी हो रही है। यदि, समय पर वर्कआॅर्डर जारी कर दिया होता तो अब तक सफाई कार्य शुरू हो चुका होता। मैं लगातार अधिकारियों से वर्क आॅर्डर जारी करने का आग्रह कर रहा हूं, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा।

- पवन मीणा, उपमहापौर एवं सफाई समिति अध्यक्ष, नगर निगम कोटा दक्षिण

Next Story