Dholpur: पक्षियों के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र का विश्लेषण

धौलपुर: विश्व आद्रभूमि दिवस पर धौलपुर जिले में स्थित विभिन्न साइट पर वन विभाग के अधिकारी तथा पक्षी विशेषज्ञों ने पारिस्थितिकी तंन्त्र का अध्ययन किया।
चंबल अभयारण्य के डीएफओ डॉ. आशीष व्यास ने बताया कि सोमवार को जिले के रामसागर, तालाबशाही, पार्वती बांध एवं एवं उर्मिला सागर आद्रभूमि पर केवलादेव नेशनल पार्क भरतपुर एवं डब्लयूडब्लयूएफ से आए पक्षी विशेषज्ञ गीतांजली कंवर ने वन विभाग के साथ जलीय पक्षियों एवं आद्रभूमि पारिस्थितिकी तंन्त्र का अध्ययन किया। विशेषज्ञों ने रामसागर की अद्वितीय पारिस्थितिकी महत्ता को रेखांकित करते हुए बताया कि यहां दुर्लभ जलीप प्रवासी पक्षी प्रवास करते हैं एवं उभयचरों एवं सरीसृपों तथा विविध जलीय वनस्थतियों का आश्रय स्थल है। डॉ. व्यास ने बताया कि रेंजर दीपक मीना के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई है। जो कि गश्ती बोट से अवैध शिकार के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
हाल ही में अवैध रूप से जलीय क्षेत्र में शिकार की कार्रवाई को रोकने के लिए मोटर बोट रामसागर के लिए ली गई है। जिसमे क्षेत्र शिकार की स्टाफ निरन्तर गस्त करेगा। इसके साथ ही क्षेत्र के ग्रामीणों एवं किसानों को भी इस अलौकिक तन्त्र को संभालने के लिए समझाइस की जाती रहती है। बताते चलें कि हाल ही में वन विभाग द्वारा करवाए गए एशियन वाटरबर्ड सेंसस में यहां 200 से अधिक प्रजाति के पक्षी पाए गए हैं। जिनमें ओपनबिल, सारस, कोरमोरेन्ट, सिट, पिनटैल तथा सोवलर मुख्य हैं। इसके साथ ही यहां मगरमच्छ व कछुओं की भी अच्छी संख्या है।





