Dausa: माल्टा में बसी धोली मीना ने राजस्थानी परंपराओं को किया जीवित

दौसा: दौसा जिले की बहू धोली मीना ने यूरोप के देश माल्टा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए राजस्थानी संस्कृति और खान-पान को विश्व पटल पर शानदार तरीके से प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति और भारतीय स्टाल की सजावट ने 60 से अधिक देशों के हजारों मेहमानों का मन मोह लिया।
धोली मीना ने बताया कि उन्होंने माल्टा में 18वीं सदी में निर्मित फोर्ट पेम्ब्रोक में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वार्षिक महोत्सव में भाग लिया। इस महोत्सव में भारत सहित 43 देशों के खाने के स्टॉल लगाए गए थे। भारतीय स्टॉल पर, धोली ने अपने हाथों से तैयार किए गए राजस्थान के सुप्रसिद्ध व्यंजनों जैसे दाल, बाटी, चूरमा, और समोसा व पकौड़ा परोसे। विदेशी मेहमानों ने इन व्यंजनों की जमकर सराहना की।
धोली ने न केवल स्वादिष्ट भोजन परोसा, बल्कि भारतीय फूड स्टॉल को भी अपनी रचनात्मकता से राजस्थानी संस्कृति के रंगों से सजाया। उनकी सजावट की मेहमानों ने खूब तारीफ की और इसे पूरे कार्यक्रम में सबसे अच्छी स्टॉल सजावट बताया। लोग भारतीय स्टॉल पर बड़े चाव से खाना खाते नजर आए। इस आयोजन की एक खास बात यह भी रही कि भारतीय और चीन की स्टॉल एक-दूसरे के करीब थीं, जो सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बनीं। खान-पान के अलावा, धोली मीना ने अपनी कला का भी प्रदर्शन किया।
उन्होंने कार्यक्रम में राजस्थानी लोकनृत्य ढोल-थाली की शानदार प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया। उनके डांस के बाद विदेशी लोगों में उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ मच गई। धोली ने ढोल-थाली नृत्य की प्रस्तुति रंगबिरंगी मटकी को सिर पर रखकर दी। इस मटकी को धोली ने खुद अपने हाथों से सजाया था, और यह विदेशी मेहमानों के लिए अचरज भरा रहा, क्योंकि यूरोप में भारत जैसी मिट्टी की मटकी नहीं मिलती। धोली इसे भारत से ही लेकर गई थीं और खुद तैयार किया था।
धोली ने बताया कि वह इससे पहले भी कई बार अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में राजस्थानी लोकनृत्य घूमर की प्रस्तुति दे चुकी हैं। लेकिन इस बार उन्होंने कुछ नया और अप्रदर्शित करने का निर्णय लिया। उन्होंने ढोल-थाली को मटकी के साथ प्रस्तुत करने का विचार किया और यह पहली बार था जब उन्होंने सिर पर मटकी रखकर नृत्य किया। धोली मीना की इस पहल ने न केवल राजस्थानी संस्कृति को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई, बल्कि भारत की समृद्ध परंपराओं को भी विश्व के सामने गौरवान्वित किया।





