राजस्थान
चूरू के रेतीले खेतों में खिल रहे कपास के फूल, किसानों में बढ़ा रुझान
Ashwandewangan
10 July 2023 12:20 PM IST

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किसानों में बढ़ा रुझान
चूरू। चूरू साहवा सहित आसपास के गांवों के किसानों के कपास की खेती के प्रति बढते रूझान से यहां के रेतीले खेतों में कपास की फसलें लहलहा रही हैं । वहीं इस नवचार को अपनाने वाले किसानों की आय भी बढी है। करीब 2 दशक पहले तक साहवा सहित आसपास के क्षेत्र गांवों के किसान सिंचाई के पानी के अभाव में जहां खरीफ में बाजरा, मोठ, मूंग व ग्वार तथा रबी में केवल चना जैसी अपनी परम्परागत फसलें हुआ करती थी। वहां के कई गांवों में अब चौधरी कुंभाराम आर्य लिफ्ट नहर का सिंचाई का पानी आ जाने और कई जगह जमीन का पानी मीठा होने के कारण किसानों द्वारा अपने खेतों में सिंचाई के लिए कुए बना लेने से किसानों ने अपनी परम्परागत खेती को छोड़ चूरू जिले के इन रेतीले धोरों के खेतों में कपास की खेती करनी शुरू कर रखी है।
यह खेती कभी हरियाणा,पंजाब या फिर राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ, नागौर, अजमेर, डूंगरपूर, उदयपूर, पाली आदि जिलों के कुछ ही क्षेत्र में हुआ करती थी। कपास की खेती के प्रति यहां के किसानों के बढते रूझान के चलते किसानों की आय बढने के साथ साथ खेतहर मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर भी बढे हैं। कपासी की खेती से जूड़े गांव भाड़ंग के एमए पास किसान रामकिशन उर्फ रामजी पारीक ने बताया कि मैंने इस वर्ष नहरी पानी से सिंचाई करके 10 बीघा में कपास की बुआई की है, जिसमें अब फल लगने शुरू हो गए हैं और अब तक की तरह मौसम सही रहा तो इस 10 बीघा में करीब 70 से 80 किंवटल कपास की पैदावार होगी। जिसकी आज के बाजार भाव से करीब साढे 5 लाख से सवा 6 लाख रूपए तक की आय हो सकती है। उन्होने बताया कि कपास की 1 बीघा खेती में बीज और बुआई, निराई, गुड़ाई से लेकर खाद, सिंचाई के लिए डीजल खर्चा, कीटनाशक दवा के छिड़काव आदि सहित करीब 10 से 15 हजार रूपए की लागत आती है और एक बीघा में ओसत पैदावार 60 से 70 हजार रूपए हो जाती है। ऐसे में लागत निकालकर 50 से 55 हजार रूपए एक बीघा में एक फसल में आय हो जाती है।
बाबा लालगिरी मंदिर में मेला भरा
सादुलपुर | रामपुरा बेरी गांव के बाबा लालगिरी मंदिर में श्रावण मास की सप्तमी व बाबा लालगिरी महाराज की पुण्यतिथि पर रविवार को धार्मिक आयोजन हुए। महंत मोहनगिरी महाराज के सानिध्य में भंडारा लगाया गया। श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्रसाद चढ़ाया व धोक लगाकर खुशहाली की कामना की। मेले में बच्चों ने झूलों का आनंद लिया। हिंदू क्रांति सेना जिलाध्यक्ष अनिल भाकर ने बताया कि भंडारे में आस-पास क्षेत्र के अलावा हरियाणा के श्रद्धालुओं ने भी प्रसाद ग्रहण किया। शनिवार रात को जागरण लगाया गया, जिसमें संत भजननाथ, साधुराम, उम्मेद, सुभाष शर्मा, विकास लुहाणी, सतीश, मातुराम जांगिड़ व धर्मवीर आदि ने भजनों की प्रस्तुतियां दी।
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प्रकाश सिंह पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में हैं। साल 2019 में उन्होंने मीडिया जगत में कदम रखा। फिलहाल, प्रकाश जनता से रिश्ता वेब साइट में बतौर content writer काम कर रहे हैं। उन्होंने श्री राम स्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी लखनऊ से हिंदी पत्रकारिता में मास्टर्स किया है। प्रकाश खेल के अलावा राजनीति और मनोरंजन की खबर लिखते हैं।
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