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Jaisalmer जैसलमेर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा और गतिशीलता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में सड़क निर्माण कार्य शुरू हो गया है। बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) राजस्थान फ्रंटियर के आईजी एम.एल. गर्ग ने बताया कि भारत सरकार ने कुल 1600 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण की स्वीकृति दी है, जिनमें से कई स्थानों पर काम प्रारंभ हो चुका है। आईजी गर्ग ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में “मोबिलिटी यानी तेज आवाजाही” बेहद अहम है। ऐसे में सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास बीएसएफ की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार सीमा पर आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने को लेकर पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है। सड़कें न केवल सैनिकों की आवाजाही के लिए जरूरी हैं, बल्कि आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया क्षमता को भी बढ़ाती हैं।
उन्होंने बताया कि राजस्थान के सीमावर्ती जिलों — श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर — में सड़कों के लिए भूमि से संबंधित मुद्दे अब सुलझा लिए गए हैं और निर्माण कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है। बीएसएफ और सिविल प्रशासन के बीच तालमेल से परियोजना को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। सीमा सड़क निर्माण को लेकर स्थानीय प्रशासन ने भी बीएसएफ को सहयोग देने का आश्वासन दिया है। इन सड़कों के बनने से न केवल सुरक्षा बलों की तैनाती और गश्त में सुविधा होगी, बल्कि सीमा से लगे गांवों में भी संपर्क और विकास की नई राह खुलेगी। बीएसएफ आईजी एम.एल. गर्ग ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा आवंटित 1600 किलोमीटर में से एक बड़ा हिस्सा पश्चिमी राजस्थान के संवेदनशील इलाकों में बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि सुदृढ़ सड़क नेटवर्क होने से सीमा पर किसी भी संभावित खतरे का त्वरित और प्रभावी जवाब देने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, “हमारे जवानों की सबसे बड़ी जरूरत गतिशीलता है। सीमावर्ती इलाकों में तेज और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए सड़कें अनिवार्य हैं। सरकार की इस पहल से सीमा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की ओर से ड्रोन गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई। आईजी गर्ग ने कहा कि हाल के वर्षों में ड्रोन के माध्यम से हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी एक बड़ी चुनौती बन गई है, खासकर श्रीगंगानगर और बीकानेर के कुछ हिस्सों में। उन्होंने बताया कि बीएसएफ ने इन संवेदनशील क्षेत्रों में कई एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए हैं, जिनकी मदद से कई ड्रोन गिराए गए हैं और बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के जरिए ड्रोन तस्करी को रोकने में उल्लेखनीय सफलता मिली है।
आईजी गर्ग ने कहा कि सीमा पर हर गतिविधि पर बीएसएफ की पैनी नजर है। जवानों को आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं ताकि वे तकनीकी चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-पाक सीमा पर सड़क नेटवर्क का विस्तार न केवल सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी अहम कदम है। इससे सीमावर्ती गांवों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना आसान होगा और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की इस पहल से पश्चिमी सीमा की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी, साथ ही राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में विकास की नई दिशा मिलेगी।
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