राजस्थान
नगर निगम में एंट्री से रोके जाने का आरोप कांग्रेस नेताओं ने किया विरोध
Ratna Netam
25 Sept 2026 7:45 PM IST

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जयपुर। जयपुर नगर निगम के मेयर चुनाव के दौरान शुक्रवार को निगम मुख्यालय के बाहर सियासी हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक और आदर्श नगर विधायक रफीक खान ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें नगर निगम परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया। इसके विरोध में खान कांग्रेस नेताओं और समर्थकों के साथ मुख्यालय के गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। किशनपोल विधायक अमीन कागजी और जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा भी उनके विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।रफीक खान ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जयपुर से निर्वाचित विधायक होने के बावजूद उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। खान के मुताबिक पुलिस अधिकारियों ने उनसे कहा कि उनके दो लोग पहले ही परिसर में प्रवेश कर चुके हैं। इस पर उन्होंने अपनी विधायक की हैसियत का उल्लेख करते हुए प्रवेश रोकने का विरोध किया।
खान ने कहा कि इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की बात भी कही। उनका सवाल था कि यदि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को कानूनी तौर पर प्रवेश का अधिकार है तो उसे परिसर में जाने से किस आधार पर रोका जा रहा है। यह कांग्रेस विधायक का आरोप है; उपलब्ध रिपोर्टों में संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है।शुक्रवार को जयपुर नगर निगम में महापौर पद के लिए सुबह 10 बजे से मतदान शुरू हुआ। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान दोपहर 2 बजे तक होना था और इसके बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू की जानी थी। मतदान के लिए निर्वाचित पार्षदों को पहचान से जुड़े निर्धारित दस्तावेज लेकर आने के निर्देश दिए गए थे।
इसी दौरान निगम मुख्यालय के बाहर रफीक खान को रोके जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। खान गेट पर धरने पर बैठ गए। कुछ समय बाद अमीन कागजी और सुनील शर्मा भी उनके साथ धरने में शामिल हो गए। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं से बातचीत की।
कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने भी मतदान प्रक्रिया के दौरान व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने पार्षदों को अंदर भेजना चाहती थी, लेकिन उन्हें जानकारी मिली कि भाजपा से जुड़े एक सांसद और अन्य नेता पहले से परिसर के अंदर मौजूद थे। कागजी ने यह भी आरोप लगाया कि ये लोग मतपत्र प्रक्रिया देख रहे थे और रिटर्निंग ऑफिसर से बातचीत कर रहे थे।कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि प्रवेश से जुड़े नियम सभी राजनीतिक दलों और नेताओं पर समान रूप से लागू किए जाएं। रफीक खान ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े कथित अनधिकृत लोगों को परिसर में मौजूद रहने दिया गया, जबकि कांग्रेस के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बाहर रोका गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हुई है।
जयपुर नगर निगम का महापौर चुनाव पहले से ही राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना हुआ था। 150 सदस्यीय नगर निगम में हाल के वार्ड चुनावों के बाद भाजपा के पास 78 और कांग्रेस के पास 57 पार्षद थे, जबकि 15 निर्दलीय पार्षद चुने गए थे। कांग्रेस ने भाजपा के पास बहुमत होने के बावजूद महापौर चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया था।
महापौर पद के लिए भाजपा ने वार्ड 112 से पार्षद सुनील कोठारी को उम्मीदवार बनाया, जबकि कांग्रेस की ओर से सुनीता गुप्ता मावर मैदान में थीं। मतदान शुरू होने से पहले दोनों दलों ने अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने पर विशेष ध्यान दिया था। भाजपा के कई पार्षदों को बसों से नगर निगम मुख्यालय लाया गया।चुनाव से पहले कांग्रेस और भाजपा दोनों की ओर से राजनीतिक दावे किए गए थे। कांग्रेस नेता रफीक खान ने इससे पहले दावा किया था कि कुछ भाजपा और निर्दलीय पार्षद कांग्रेस के संपर्क में हैं। हालांकि ऐसे राजनीतिक दावों की पुष्टि मतदान के वास्तविक परिणाम से ही होनी थी।
राजस्थान में नगर निकायों के प्रमुख पदों के चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव केवल जयपुर तक सीमित नहीं रहा। चुनाव से पहले कांग्रेस ने राज्य के कई हिस्सों में पुलिस और प्रशासन के कथित इस्तेमाल का आरोप लगाया था। भाजपा की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी के रूप में खारिज किया जाता रहा है। इंडियन एक्सप्रेस ने भी चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों द्वारा पार्षदों को अलग-अलग स्थानों पर रखने और एक-दूसरे पर दबाव बनाने के आरोप लगाए जाने की रिपोर्ट की थी।जयपुर में मतदान के दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। नगर निगम मुख्यालय में प्रवेश नियंत्रित रखा गया और मतदान प्रक्रिया के लिए आने वाले पार्षदों की पहचान और आवश्यक दस्तावेजों की जांच की व्यवस्था की गई थी। इसी प्रवेश व्यवस्था के बीच कांग्रेस नेताओं को रोके जाने का विवाद सामने आया।
रफीक खान ने धरने के दौरान पुलिस और प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यदि चुनाव प्रक्रिया के दौरान बाहरी या अनधिकृत लोगों के प्रवेश पर रोक है तो यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्वाचित विधायकों को रोकना उचित नहीं है और इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया जाएगा।इस बीच शुक्रवार को मतदान और मतगणना पूरी होने के बाद भाजपा के सुनील कोठारी जयपुर नगर निगम के मेयर चुने गए। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने 150 सदस्यीय निगम में आवश्यक 76 मतों का बहुमत आंकड़ा पार किया। कांग्रेस की सुनीता मावर उनके मुकाबले में थीं।
इस तरह जयपुर मेयर चुनाव का दिन मतदान के साथ-साथ निगम मुख्यालय के बाहर हुए राजनीतिक विरोध के कारण भी चर्चा में रहा। कांग्रेस ने रफीक खान को प्रवेश से रोके जाने और भाजपा नेताओं की कथित मौजूदगी पर सवाल उठाए, जबकि उपलब्ध रिपोर्टों में प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया। रफीक खान ने अब संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की बात कही है, जिससे यह विवाद चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी राजनीतिक मुद्दा बना रह सकता है।
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