राजस्थान
Churu: ध्वजारोहण के समय भारतीय झंडा संहिता, 2022 का करें पालन
Tara Tandi
13 Aug 2025 11:40 AM IST

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Churu चूरू । जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अभिषेक सुराणा ने आमजन से अनुरोध किया है कि वे स्वतंत्रता दिवस समारोह को उत्साह एवं गरिमा के साथ मनाएं और ध्वजारोहण एवं अन्य आयोजनों के समय भारतीय झंडा संहिता, 2002 की अक्षरशः पालना सुनिश्चित करें।
जिला कलक्टर सुराणा ने कहा है कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज, भारत के लोगो की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिरूप है। यह हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है और सबके मन में राष्ट्रीय ध्वज के लिए प्रेम, आदर ओर निष्ठा है। यह भारत के लोगों की भावनाओं और मानस में एक अद्वितीय और विशेष स्थान रखता है। राष्ट्रीय ध्वज के लिए एक सार्वभौमिक लगाव, आदर तथा वफादारी होती है। इसलिए राष्ट्रीय झंडे के संप्रदर्शन पर लागू होने वाले कानूनों, प्रथाओं तथा परंपराओं के बारे में जागरूक रहते हुए हम ध्वजारोहण के समय भारतीय झंडा संहिता, 2002 का पालन करें।
एडीएम अर्पिता सोनी ने बताया कि भारतीय झंडा संहिता, 2002 [ 2021 एवं 2022 में यथासंशोधित] तथा राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में में अंतर्विष्ट नियमो के कड़ाई से पालन के सम्बन्ध में निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि भारतीय झंडा संहिता के भाग-॥ के पैरा 2.2 की धारा (x) के अनुसार जनता द्वारा कागज के बने राष्ट्रीय झंडो को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेलकूद के अवसरों पर हाथ में लेकर हिलाया जा सकता है। इसलिए महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेलकूद के अवसरों पर जनता द्वारा प्रयोग किये हुए कागज़ के बने राष्ट्रीय झंडो को समारोह के पूरा होने के पश्चात न तो विकृत किया जाए और न ही जमीन पर फेंका जाए। ऐसे झंडों का निपटान उनकी मर्यादा के अनुरूप एकान्त में किया जाए।
उन्होंने बताया कि भारतीय झंडा संहिता, 2002 को 30 दिसंबर, 2021 के आदेश द्वारा संशोधित किया गया और पॉलिएस्टर के कपड़े से बने एवं मशीन द्वारा निर्मित राष्ट्रीय ध्वज की अनुमति दी गई। अब व्यवस्था है कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काते गए और हाथ से बुने हुए या मशीन द्वारा निर्मित, सूती/पॉलिएस्टर/ऊनी/सिल्क खादी के कपड़े से बनाया गया हो। जनता का कोई भी व्यक्ति, कोई भी गैर-सरकारी संगठन अथवा कोई भी शिक्षा संस्था राष्ट्रीय झंडे को सभी दिनों और अवसरों, औपचारिकताओं या अन्य अवसरों पर फहरा/प्रदर्शित कर सकता है, बशर्ते राष्ट्रीय झंडे की मर्यादा और सम्मान का ध्यान रखा जाये।
उन्होंने बताया कि भारतीय झंडा संहिता, 2002 को 20 जुलाई, 2022 के आदेश द्वारा संशोधित किया गया एवं भारतीय झंडा संहिता के भाग-॥ के पैरा 2.2 की धारा (xi) के अनुसार जहां झंडे का प्रदर्शन खुले में किया जाता है या जनता के किसी व्यक्ति द्वारा घर पर प्रदर्शित किया जाता है, वहां उसे दिन एवं रात में फहराया जा सकता है। राष्ट्रीय झंडे का आकार आयताकार होगा। यह किसी भी आकार का हो सकता है, परन्तु झंडे की लम्बाई ओर ऊंचाई (चौडाई) का अनुपात 3: 2 होगा। जब कभी राष्ट्रीय झंडा फहराया जाये तो उसकी स्थिति सम्मानजनक और पृथक होनी चाहिए। फटा हुआ और मैला-कुचैला झंडा प्रदर्शित नहीं किया जाए। झंडे को किसी अन्य झंडे अथवा झंडो के साथ एक ही ध्वज दंड से नहीं फहराया जाए। संहिता के भाग-III की धारा-9 में उल्लिखित गणमान्यों जैसे राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि के सिवाय झंडे को किसी वाहन पर नहीं फहराया जाएगा। किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊँचा या उससे ऊपर या उसके बराबर में नहीं लगाना चाहिए।
अधिक जानकारी के लिए, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 और भारतीय झंडा संहिता, 2002, गृह मंत्रालय की वेबसाइट www.mha.gov.in पर उपलब्ध हैं।
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