राजस्थान

‘चीन एक इंच जमीन नहीं ले पाएगा’, अरुणाचल के गृह मंत्री मामा नटुंग का बयान

nidhi
26 Oct 2026 9:35 AM IST
‘चीन एक इंच जमीन नहीं ले पाएगा’, अरुणाचल के गृह मंत्री मामा नटुंग का बयान
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जयपुर: अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नटुंग ने कहा है कि चीन भारत की एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं कर पाएगा। राजस्थान के सिरोही जिले में रविवार को एक कार्यक्रम में पहुंचे नटुंग ने मीडिया से बातचीत के दौरान सीमा सुरक्षा पर भरोसा जताया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चीनी अतिक्रमण से संबंधित खबरों को अफवाह और सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे कयास बताया। उनका कहना था कि सीमा पर तैनात सेना के जवानों के साथ राज्य की जनता मजबूती से खड़ी है।
नटुंग ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय संस्थान के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान भारत को वर्ष 1962 की परिस्थितियों से नहीं देखा जाना चाहिए। सीमाओं पर समय-समय पर तनाव की खबरों के संबंध में उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ तनाव होना नई बात नहीं है। हालांकि, उनका बयान राज्य सरकार के मंत्री का पक्ष है। इससे सीमा के प्रत्येक स्थान की वर्तमान सैन्य स्थिति का स्वतंत्र सत्यापन नहीं होता।
गृह मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों को देखने के दृष्टिकोण में बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश को पहले देश का आखिरी राज्य कहा जाता था, जबकि अब उसे पहला राज्य कहा जाता है। इसी तरह सीमा पर स्थित गांवों को अंतिम गांव के बजाय देश के पहले गांव की पहचान दी जा रही है। उनके बयान का जोर सीमावर्ती आबादी के महत्व और राष्ट्र की सुरक्षा में स्थानीय लोगों की भूमिका पर था।
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट रहा है। विदेश मंत्रालय ने बार-बार कहा है कि राज्य भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। मई 2025 में चीन द्वारा राज्य के स्थानों के नाम बदलने के प्रयास पर भी मंत्रालय ने यही बात दोहराई थी। भारत ने कहा था कि नए नाम गढ़ने से वास्तविक स्थिति नहीं बदलती। यह कूटनीतिक रुख नटुंग के ताजा बयान की व्यापक पृष्ठभूमि है।
चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा जताता रहा है, जिसे भारत लगातार खारिज करता आया है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से सीमा विवाद है और वर्ष 1962 में युद्ध भी हुआ था। हालांकि, वर्तमान सीमा स्थिति का आकलन केवल पुराने घटनाक्रम के आधार पर नहीं किया जा सकता। किसी नए दावे के लिए संबंधित स्थान, समय और प्रमाण की जरूरत होती है। अतिक्रमण, गश्ती दलों के आमने-सामने आने और कूटनीतिक दावों को एक ही घटना मान लेना स्थिति को समझने में भ्रम पैदा कर सकता है।
नटुंग पहले भी चीनी कब्जे से संबंधित दावों को खारिज कर चुके हैं। पूर्ववर्ती खबरों के अनुसार, उन्होंने मीडिया से सीमा संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने से पहले उसकी पुष्टि करने को कहा था। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी घुसपैठ से जुड़े दावों का खंडन किया था। ये प्रतिक्रियाएं पहले सामने आए दावों से संबंधित थीं। इन्हें किसी अन्य तारीख या अलग स्थान की घटना पर स्वतः लागू नहीं माना जाना चाहिए।
सीमावर्ती गांवों को महत्व देने की बात केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम में भी दिखाई देती है। सरकारी विवरण के मुताबिक, इस कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय भू-सीमाओं के पास स्थित गांवों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका की सुविधाएं मजबूत करना है। सितंबर 2026 के सरकारी विवरण में इसके दोनों चरणों का संयुक्त परिव्यय 11,639 करोड़ रुपये बताया गया है। यह राशि पूरे कार्यक्रम से संबंधित है, केवल अरुणाचल प्रदेश के लिए निर्धारित राशि नहीं।
कार्यक्रम के पहले चरण की शुरुआत 2023 में हुई थी। गृह मंत्रालय के अनुसार, इसके तहत उत्तरी सीमा के पास चयनित गांवों के समग्र विकास की व्यवस्था की गई। सीमावर्ती आबादी के लिए सुविधाएं बढ़ाना केवल निर्माण कार्य का विषय नहीं है। इसका संबंध लोगों के अपने गांवों में रहने, रोजगार पाने और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच से भी है। हालांकि, किसी योजना की घोषणा और प्रत्येक चयनित गांव में काम पूरा हो जाने की स्थिति अलग-अलग होती है।
नटुंग के बयान में स्थानीय जनता और सेना के बीच भरोसे पर विशेष जोर है। इसका एक व्यापक संदेश यह है कि सीमावर्ती नागरिकों को केवल दूरदराज रहने वाली आबादी के रूप में नहीं देखा जाए। वे देश के सामाजिक और प्रशासनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके लिए बेहतर सुविधाएं और स्पष्ट सूचनाएं आवश्यक हैं। दूसरी ओर, सुरक्षा संबंधी दावों के मूल्यांकन में राजनीतिक वक्तव्यों के साथ संबंधित अधिकृत एजेंसियों की जानकारी देखना भी जरूरी रहता है।
सीमा से जुड़ी किसी खबर को समझते समय उसके स्रोत और संदर्भ का महत्व बढ़ जाता है। पुराने वीडियो, स्थान स्पष्ट न करने वाली तस्वीरें अथवा बिना तारीख वाले संदेश वर्तमान घटनाक्रम का भरोसेमंद प्रमाण नहीं बनते। इसी तरह किसी दावे का खंडन करते समय यह स्पष्ट होना चाहिए कि वह किस घटना के बारे में है। नटुंग ने अपने ताजा बयान में अतिक्रमण की खबरों को खारिज किया है, लेकिन किसी विशिष्ट स्थान का विस्तृत तकनीकी या सैन्य ब्योरा नहीं दिया।
फिलहाल गृह मंत्री का संदेश सीमा की सुरक्षा के प्रति भरोसा और अरुणाचल की जनता की एकजुटता पर केंद्रित है। उन्होंने चीन के कब्जे से जुड़े दावों को स्वीकार करने से इनकार किया और सीमावर्ती गांवों की नई पहचान रेखांकित की। आगे किसी विशेष घटनाक्रम की स्थिति संबंधित अधिकृत जानकारी से ही स्पष्ट होगी। भारत का घोषित कूटनीतिक रुख यही है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
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