राजस्थान

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें उर्स पर अजमेर शरीफ में चादर पेश

SHIDDHANT
27 Dec 2025 9:37 PM IST
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें उर्स पर अजमेर शरीफ में चादर पेश
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Ajmer अजमेर: राजस्थान में स्थित विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 814वें उर्स के मौके पर श्रद्धा और आस्था का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर राजस्थान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने अजमेर शरीफ दरगाह पहुंचकर मखमली चादर और फूल पेश किए तथा देश और प्रदेश में अमन, शांति और खुशहाली की दुआ मांगी। उर्स के अवसर पर अजमेर शरीफ में देश-विदेश से जायरीन बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। दरगाह परिसर में सूफी संगीत, कव्वाली और धार्मिक रस्मों के बीच ख्वाजा साहब की शिक्षाओं—इंसानियत, भाईचारे और प्रेम—को याद किया गया। मदन राठौड़ ने दरगाह में मत्था टेककर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह सदियों से सामाजिक सौहार्द और एकता का प्रतीक रही है।

मीडिया से बातचीत में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने प्रेम, करुणा और मानवता का रास्ता दिखाया, जो समाज को जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि उर्स जैसे आयोजन भारत की गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करते हैं और सभी धर्मों के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। 814वें उर्स के दौरान अजमेर शरीफ में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस, प्रशासन और दरगाह कमेटी समन्वय के साथ व्यवस्थाएं संभाल रही है। जायरीन के लिए पेयजल, चिकित्सा और यातायात की सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं।

उर्स के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों से राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक हस्तियां दरगाह पहुंच रही हैं। चादर पेश करने की परंपरा के तहत विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधिमंडलों द्वारा ख्वाजा साहब की दरगाह पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और जायरीन का कहना है कि अजमेर शरीफ की दरगाह केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और शांति का केंद्र है। यहां हर धर्म और समुदाय के लोग बिना किसी भेदभाव के माथा टेकते हैं। कुल मिलाकर, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें उर्स ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत की सूफी परंपरा प्रेम, सौहार्द और मानवता के मूल्यों को आगे बढ़ाने का कार्य करती है, और अजमेर शरीफ इस परंपरा का सबसे बड़ा प्रतीक बना हुआ है।
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