राजस्थान

Bundi: वंदे गंगा जल संरक्षण जन-अभियान: बूंदी में जल क्रांति का सफल आयोजन

Tara Tandi
10 July 2025 6:47 PM IST
Bundi: वंदे गंगा जल संरक्षण जन-अभियान: बूंदी में जल क्रांति का सफल आयोजन
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Bundi बूंदी। राजस्थान सरकार ने 5 जून, 2025 को गंगा दशमी और विश्व पर्यावरण दिवस के अनूठे संयोग पर "वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान" का भव्य शुभारंभ किया। बूंदी जिले के केशोरायपाटन में प्रसिद्ध केशवराय मंदिर से चंबल नदी के किनारे चंबल माता को चुनरी ओढ़ाकर माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की। यह अभियान 5 जून से 20 जून, 2025 तक चला, जिसका मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण को एक जन आंदोलन बनाना था।
अभियान के प्रमुख उद्देश्य
अभियान के चार मुख्य उद्देश्य निर्धारित किए गए थे। पहला उद्देश्य जल संग्रहण और संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता लाकर इसे एक व्यापक जन आंदोलन बनाना था। दूसरा, आगामी मानसून से पहले राज्य में वर्षा जल के अधिकतम संग्रहण के लिए नई जल संचय संरचनाओं की शुरुआत करना और पूर्ण हो चुके कार्यों का अवलोकन या लोकार्पण करना था। तीसरा, जल स्रोतों की साफ-सफाई करना और पारंपरिक जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार करना शामिल था। अंत में, चारागाहों और अन्य स्थानों पर "हरियालो राजस्थान वृक्षारोपण महाअभियान 2025" के लिए अग्रिम तैयारी करना भी इस अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य था।
आयोजित प्रमुख गतिविधियां
अभियान के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण को हमारी परंपरा और संस्कृति से जोड़ते हुए कई महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें वंदे गंगा कलश यात्रा और वंदे गंगा जल सेवा जैसे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनुष्ठान शामिल थे। पशु-पक्षियों के लिए जल की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई और विभिन्न जलाशयों पर विशेष पूजन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त, व्यापक जन जागरूकता फैलाने के लिए प्रभात फेरी, कार्यशालाएं, रात्रि चौपाल और ग्राम सभाएं भी आयोजित की गईं।
जनभागीदारी और सहभागिता
"वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान" ने राज्य सरकार के सभी विभागों, भामाशाहों, स्वयंसेवी संस्थाओं, उद्योगपतियों, धार्मिक संस्थाओं और आम जनता की सक्रिय भागीदारी से एक सच्चे जन आंदोलन का रूप ले लिया। उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं, व्यक्तियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिससे दूसरों को भी प्रेरणा मिली।
इस अभियान में कृषि व उद्यानिकी, पशुपालन, सूचना एवं जनसंपर्क, देवस्थान, जिला प्रशासन, शिक्षा, ऊर्जा, वन एवं पर्यावरण, भू-जल, उद्योग, स्थानीय निकाय, स्वयंसेवी संस्थाएं, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, सार्वजनिक निर्माण विभाग, कॉपरेटिव, राजीविका, ग्रामीण विकास व पंचायती राज, जल संसाधन और वाटरशेड विभागों सहित कुल 20 विभागों की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। इन विभागों ने जल संरक्षण और जल के महत्व की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के लिए 8168 गतिविधियां आयोजित की, जिनमें कुल 5,74,928 लोगों ने भाग लिया।
स्वीकृत और पूर्ण किए गए प्रमुख कार्य
अभियान के तहत जल संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य हुए। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के अंतर्गत बूंदी जिले की प्राचीन बावड़ियों के जीर्णोद्धार के लिए ₹61 लाख की राशि के 11 कार्य स्वीकृत किए गए। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत वाटरशेड, पंचायती राज, वन, ग्रामीण विकास, कृषि, हॉर्टिकल्चर और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा जल संरक्षण के 800 कार्य पूर्ण करवाए गए। "कर्मभूमि से मातृभूमि" के तहत 286 कार्य स्थलों का चयन जिसमें 50 रिचार्ज शाफ्ट स्ट्रक्चर पूर्ण हुए। अभियान के दौरान जल ग्रहण विकास एवं भू-विकास विभाग के ₹2453.82 लाख की राशि के 334 कार्य पूर्ण करवाए गए। इस अवधि में जिले में महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत ₹1217.72 लाख की लागत के 221 नए कार्यों का शुभारंभ भी हुआ।
आमजन तक पहुंचा जल संरक्षण का संदेश
यह अभियान सिर्फ एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक आंदोलन था जिसने जल संरक्षण के महत्व को आमजन तक पहुंचाया। इसकी विशेषताएँ थीं कि यह गंगा दशमी और विश्व पर्यावरण दिवस के साथ समन्वय करके भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ लाने का एक अनूठा प्रयास था। इसमें अभूतपूर्व जनभागीदारी देखी गई, जहाँ सरकारी विभागों से लेकर निजी संस्थाओं, भामाशाहों और आम नागरिकों तक, सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अभियान ने जल संग्रहण, जल स्रोतों की सफाई, पारंपरिक संरचनाओं का पुनरुद्धार और वृक्षारोपण की तैयारी जैसे बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाये, जिसने इसे अधिक प्रभावी बनाया। साथ ही, स्वीकृत और पूर्ण किए गए कार्यों की संख्या और धनराशि अभियान की गंभीरता और सफलता को दर्शाती है।
"वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान" राजस्थान सरकार की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक दूरदर्शी और क्रांतिकारी पहल है, जिसने भविष्य के लिए जल संरक्षण की नींव मजबूत की हैं।
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