
उदयपुर: राजनीति में कार्यकर्ताओं की निष्ठा और जुनून के कई रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन उदयपुर के वार्ड नंबर 64 में संगठन के प्रति समर्पण की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसकी चर्चा शहरभर में हो रही है। यहाँ भारतीय जनता पार्टी के समर्पित बूथ अध्यक्ष दिनेश सोलंकी का कठिन तप और चुनावी संकल्प पार्षद प्रत्याशी की जीत के साथ पूर्ण हुआ।
चुनावी समर के दौरान दिनेश सोलंकी ने यह कठोर प्रण लिया था कि जब तक उनके वार्ड से भाजपा के पार्षद प्रत्याशी 'विजय' दर्ज नहीं कर लेते, तब तक वे पैरों में जूते या चप्पल धारण नहीं करेंगे। चुनाव प्रचार के दौरान चिलचिलाती धूप और पथरीली राहों के बीच भी सोलंकी लगातार नंगे पैर रहकर ही घर-घर पहुंचे और संगठन के कार्य में डटे रहे।
चुनाव परिणामों में भाजपा प्रत्याशी की शानदार जीत घोषित होने के बाद बेडवास स्थित कुंवारी भोपीमां मंदिर, कालाजी-गोराजी, भैरूजी मालीबाग मंदिर प्रांगण में एक विशेष आभार एवं अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। उल्लेखनीय है कि सोलंकी ने इसी पवित्र मंदिर प्रांगण में जूते त्यागने का संकल्प लिया था और संयोग से जीत का जश्न व संकल्प पूर्ति भी इसी प्रांगण में संपन्न हुई। कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्था पार्षद अशोक नागदा ने संभाली।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भाजपा उदयपुर शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा, जिला महामंत्री देवीलाल सालवी, झामेश्वर मंडल अध्यक्ष कमलेश शर्मा, भाजपा जिला मंत्री तुषार मेहता एवं शरद बंसल ने दिनेश सोलंकी के इस अनूठे त्याग और अटूट निष्ठा की मुक्तकंठ से सराहना की। वरिष्ठ नेताओं ने इसे संगठन की असली ताकत बताते हुए अपने हाथों से सोलंकी को सम्मानपूर्वक जूते पहनाए और उनकी कठिन प्रतिज्ञा का पारण कराया।
इस भावुक और गौरवपूर्ण क्षण के दौरान मंदिर प्रांगण में उपस्थित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। इस अवसर पर पूर्व मंडल अध्यक्ष हिम्मत सिंह, अशोक नागदा, मनोहर सिंह देवड़ा, परसराम माली, अभय सिंह, पृथ्वी सिंह, शांतिलाल सोलंकी, कमलेश पुष्करणा, दीपक माली, कन्हैयालाल, गजेंद्र पुष्करणा, ओम प्रकाश, सुरेश शर्मा, किशोर सिंह, गणेश स्वामी, भूरसिंह, हर्ष धाबाई, हिम्मत सिंह मीणा, प्रदीप माली और सुरेश माली सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि व स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में पार्टी की जीत पर बधाई दी और सोलंकी के जज्बे को नमन किया।





