राजस्थान

Bikaner: बच्चों में निमोनिया रोकने के लिए ‘सांस’ कार्यक्रम का आगाज़

Admindelhi1
13 Nov 2025 12:20 PM IST
Bikaner: बच्चों में निमोनिया रोकने के लिए ‘सांस’ कार्यक्रम का आगाज़
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बीकानेर: 5 वर्ष तक आयु के बच्चों में निमोनिया को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा ‘‘सांस’’ कार्यक्रम चलाया गया है यानी कि समुदाय स्तर पर निमोनिया (एआरआई) की सफलतापूर्वक रोकथाम के लिए अभियान एवं सामाजिक जागरूकता। अभियान पूरी सर्दी यानि की 28 फरवरी 2026 तक चलेगा।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ अमित यादव की अध्यक्षता में बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजन के साथ अभियान का शुभारम्भ किया गया। वीसी में राज्य स्तर से डायरेक्टर आरसीएच डॉ मधु रतेश्वर व परियोजना निदेशक डॉ प्रतीक चौधरी द्वारा जिलों में टीकाकरण, शिशु मृत्यु दर तथा सांस कार्यक्रम की बिंदुवार जानकारी साझा की गई। जिला स्तर से वीसी में आरसीएचओ डॉ राजेश कुमार गुप्ता व जिला कार्यक्रम समन्वयक मालकोश आचार्य सहित जिला स्तरीय अधिकारी शामिल हुए। वहीं खंड स्तर पर समस्त ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सीएचसी, यूपीएचसी, पीएचसी के प्रभारी, बीपीएम, बीएएफ व चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे।

मिशन निदेशक डॉ यादव ने सांस कार्यक्रम को बच्चों में निमोनिया के विरुद्ध जन आंदोलन के स्वरूप में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम में बच्चों में निमोनिया का खतरा अधिक रहता है। इस अभियान में 5 वर्ष तक की आयु वाले सभी बच्चों की निमोनिया की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके लिए आशा सहयोगिनी के माध्यम से एंटीबायोटिक अमोक्सिसिल्लिन का तथा चिकित्सक, एएनएम व सीएचओ द्वारा इंजेक्शन जेंटामाइसिन के विधिवत अनुप्रयोग के‍ लिए प्रबंधन पर जोर दिया।

डॉ रतेश्नेवर बताया कि निमोनिया 5 साल तक के बच्चों में मृत्यु के सबसे बड़े कारणों में से एक है जिसे आसानी से रोका जा सकता है। समय रहते निमोनिया के लक्षणों की पहचान कर बच्चे को तुरंत स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जाए। यदि बच्चे को खांसी जुखाम के साथ सांस लेने में तकलीफ है या पसलियां धंस रही है तो यह निमोनिया हो सकता है। ऐसे में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा आशा या एएनएम से संपर्क करना चाहिए। डॉ प्रतीक चौधरी ने बताया कि निमोनिया फेफड़ों में होने वाला सूजन या संक्रमण है जिसमें फेफड़ों की कोशिकाएं मवाद या पस से भर जाती है एवं ठोस हो जाती है। निमोनिया सामान्यतया बैक्टीरिया, वायरस, फंगस अथवा परजीवी संक्रमण के कारण होता है। उन्होंने बचाव में पेंटावेलेंट व पीसीवी वैक्सीन तथा विटामिन ए के महत्व को भी प्रतिपादित किया।

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