राजस्थान

Bikaner: पशुधन से मजबूत हो रही ग्रामीण आजीविका, परिवारों के लिए बना आय का सहारा

Admindelhi1
19 Aug 2026 9:30 AM IST
Bikaner: पशुधन से मजबूत हो रही ग्रामीण आजीविका, परिवारों के लिए बना आय का सहारा
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है पशुधन, परिवारों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका

बीकानेर: राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत ‘वर्षा ऋतु में ऊंटों का वैज्ञानिक प्रबंधन’ विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। केन्द्र में आयोजित कार्यक्रम में बीकानेर जिले के आसपास के गांवों जिनमें लालमदेसर, ककू, बापेउ, कल्याणसर, पलाना, गेरसर, जांगलू, कीरतसर, लिखमीसर, सुरधना आदि के 74 अनुसूचित जाति पशुपालकों (महिला एवं पुरुषों) ने भाग लिया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने वर्षा ऋतु में ऊँटों एवं अन्य पशुधन के स्वास्थ्य, पोषण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी तथा कृषि एवं पशुपालन तकनीकों का प्रदर्शन कर आवश्यक इनपुट वितरित किए।

केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि पशुधन ग्रामीण परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। पशुओं का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन, उचित पोषण, समय पर स्वास्थ्य जांच एवं रोगों की रोकथाम अपनाकर पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन में सुधार के साथ-साथ पशुपालकों की आय में भी वृद्धि की जा सकती है।

केन्द्र के पूर्व निदेशक डॉ. आर.के. सावल ने वर्षा ऋतु में चारे के उचित संग्रहण एवं संरक्षण तथा मरुक्षेत्र की स्थानीय वनस्पतियों एवं जड़ी-बूटियों के महत्व की जानकारी दी। प्रधान वैज्ञानिकों में डॉ. राकेश रंजन ने पशुओं की देखभाल, थनैला रोग एवं परजीवी नियंत्रण तथा मक्खी, मच्छर एवं चीचड़ से बचाव के उपायों के साथ समय पर टीकाकरण एवं दवाओं के उचित उपयोग पर जोर दिया तथा डॉ. वेदप्रकाश ने श्रेष्ठ नस्ल एवं उपयुक्त नर के चयन, दूध की गुणवत्ता तथा ऊँटनी को दुधारू पशु के रूप में विकसित करने संबंधी केन्द्र की पहलों की जानकारी दी।

वरिष्ठ वैज्ञानिकों में डॉ. बसंती ज्योत्सना ने जलवायु परिवर्तन के बावजूद ऊंटों की बेहतर अनुकूलन क्षमता पर प्रकाश डालते हुए पशु स्वास्थ्य, संतुलित आहार एवं समन्वित कृषि-पशुपालन प्रणाली अपनाने पर जोर दिया तथा डॉ. रतन कुमार चौधरी ने पशु कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए पशुपालकों से उनका अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। वहीं कार्यक्रम के सह समन्वयकों में डॉ. प्रियंका गौतम ने तकनीकी प्रदर्शन के दौरान शुष्क क्षेत्र के अनुरूप फसल चयन, फसल-चक्र, मृदा परीक्षण, बीजारोपण एवं खरपतवार प्रबंधन की जानकारी दी तथा डॉ. श्याम सुंदर चौधरी ने वर्षा ऋतु में भेड़, बकरी एवं ऊँट के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं व्यावसायीकरण से पशुपालकों की आय बढ़ाने की

एससीएसपी के नोडल अधिकारी एवं कार्यक्रम समन्वयक मनजीत सिंह ने अनुसूचित जाति उप-योजना के प्रावधानों की जानकारी देते हुए इसे भारत सरकार द्वारा एससीएसपी वर्ग हेतु सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने की महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्याम सुंदर चौधरी एवं श्री नेमीचन्द बारासा ने किया।

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