
राजस्थान | राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की है कि राज्य दिवस अब अंग्रेजी कैलेंडर की तिथियों पर नहीं, बल्कि भारतीय पंचांग के हिसाब से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बदलाव का उद्देश्य राजस्थान की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को और अधिक आत्मसात करना है, जिससे भारतीय परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान बढ़े।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने वार्ता में बताया कि अब तक राजस्थान दिवस अंग्रेजी कैलेंडर की तिथियों पर मनाया जाता था, जो कि विदेशी प्रणाली पर आधारित है। उनका कहना था कि "हमें अपने देश की जड़ें, हमारी सांस्कृतिक पहचान और भारतीय पंचांग के महत्व को समझते हुए इसे अपनाना चाहिए।" मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि भारतीय पंचांग में निहित गणना और तिथियाँ हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें अपनाने से राजस्थान दिवस का महत्व और भी बढ़ जाएगा।
भारतीय पंचांग, जिसे भारतीय पारंपरिक कैलेंडर भी कहा जाता है, में त्योहारों, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक उत्सवों की गणना पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करने के लिए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय पंचांग की तिथियाँ, न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक गतिविधियों के आयोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राजस्थान दिवस का यह नया स्वरूप राज्य की आत्मनिर्भरता और स्थानीय संस्कृति को उजागर करेगा। उनका मानना है कि भारतीय पंचांग के अनुरूप उत्सव मनाने से राजस्थान की जनता में गर्व की भावना बढ़ेगी और युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से अधिक जुड़ाव महसूस करेगी।
इस बदलाव से न केवल सांस्कृतिक स्तर पर बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने कहा है कि पंचांग के आधार पर मनाए जाने वाले उत्सवों में पारंपरिक नृत्य, संगीत, लोक कला और हस्तशिल्प को प्रमुखता मिलेगी, जिससे स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को नया मंच मिलेगा। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इस पहल से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि विदेशी पर्यटक भारतीय परंपरा और रीति-रिवाजों में रुचि दिखाते हैं।
इसके अलावा, राज्य में आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक मेलों, मेले और उत्सवों में भी इस बदलाव का प्रभाव दिखाई देगा। राज्य के विभिन्न जिलों में पंचांग आधारित आयोजन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलेगा। विभिन्न नगरपालिकाओं और पंचायतों को सरकारी सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे आयोजन की गुणवत्ता और दर्शनीयता में सुधार हो सकेगा।
राजनीतिक दृष्टिकोण और आगे की योजनाएं
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह भी कहा कि यह बदलाव केवल एक सांस्कृतिक कदम नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की राजनीतिक पहचान को भी मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि राजस्थान की प्राचीनता, वीरता और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए अब राज्य दिवस का आयोजन एक नई पहचान के साथ किया जाएगा।
राज्य सरकार ने आगामी दिनों में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए एक समिति का गठन करने का भी निर्णय लिया है, जिसमें सांस्कृतिक विशेषज्ञ, पंचांग विद्वान और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। इस समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य दिवस के आयोजन में भारतीय पंचांग के अनुरूप सभी कार्यक्रम और गतिविधियाँ पूरी पारदर्शिता और उत्कृष्टता के साथ आयोजित हों।
निष्कर्ष
राजस्थान का यह ऐलान एक महत्वपूर्ण कदम है, जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान को आत्मसात करने के साथ-साथ उसकी परंपरा को भी उजागर करेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह परिवर्तन संदेश देता है कि राजस्थान अपनी सांस्कृतिक विरासत को महत्व देता है और आधुनिकता के साथ-साथ परंपरा को भी अपनाता है। आने वाले वर्षों में भारतीय पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला राजस्थान दिवस राज्य की जनता, युवा पीढ़ी और पर्यटकों के बीच उत्साह का नया स्तर स्थापित करेगा।





