राजस्थान

बजरी खनन से रोक हटी : जनता को 40 प्रतिशत सस्ती बजरी मिलेगी, सरकार को भी सालाना राजस्व मिलेगा 400 करोड़

Sonali
12 Nov 2021 11:30 AM GMT
बजरी खनन से रोक हटी : जनता को 40 प्रतिशत सस्ती बजरी मिलेगी, सरकार को भी सालाना राजस्व मिलेगा 400 करोड़
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार में जैसे ही राजस्थान में 4 साल से लगी बजरी खनन पर रोक हटाई तो राजस्थान में बड़े स्तर पर वैध बजरी खनन फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है. इस फैसले के बाद अब राजस्थान की 65 बड़ी बजरी खानें फिर से चालू हो सकेंगी.

जनता से रिश्ता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार में जैसे ही राजस्थान में 4 साल से लगी बजरी खनन पर रोक हटाई तो राजस्थान में बड़े स्तर पर वैध बजरी खनन फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है. इस फैसले के बाद अब राजस्थान की 65 बड़ी बजरी खानें फिर से चालू हो सकेंगी.

हालांकि जब 4 साल पहले यह खनन रोका गया था तो खनन लीज की संख्या 53 थी. यह खानें प्रदेश के राजसमंद की तहसील राजसमंद और नाथद्वारा की और टोंक जिले की देवली तहसील की नदियों में है. खनन के चलने से जहां एक और राजस्थान सरकार के खजाने में सालाना 400 करोड़ रुपए अधिक राजस्व पहुंचेगा.
बजरी उत्पादन बढ़कर होगा 700 लाख टन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश की 65 लीज नदियों में चालू हो सकेंगे. जिससे उत्पादन 700 लाख टन हो जाएगा. यह उत्पादन सुप्रीम कोर्ट की साल 2017 में लगाई गई रोक से पहले 568 लाख टन था. इससे सरकार को तो 400 करोड़ सालाना राजस्व मिलेगा ही, आम आदमी को भी 1400 से 1500 रुपये टन मिलने वाली बजरी करीब 900 से 950 रुपये टन में मिलेगी. दरअसल बजरी के सस्ते होने में अब किराए का भी योगदान रहेगा.
उदाहरण के तौर पर जयपुर में बजरी देवली के कोटड़ी या अन्य दूरदराज के क्षेत्रों से आ रही थी, जिसका किराया और अन्य खर्च ही जयपुर तक 800 से 1000 रुपए प्रति टन पढ़ रहा था. लेकिन अब टोंक व आसपास के क्षेत्र से बनास व अन्य नदियों में खनन चालू होने से यह किराया और अन्य खर्चे आधे से कम हो जाएंगे. यही हाल प्रदेश के अन्य जिलों में भी है जहां दूरदराज से मंगाए जाने के चलते खर्च बढ़ जाता था और बजरी महंगी हो जाती थी.
खातेदारी की 177 खानें बंद होगी
नदियों के बेटे के 5 किलोमीटर परिधि में चल रही 177 खाने अब बंद कर दी जाएंगी. क्योंकि इन खानों को नदियों में बजरी खनन पर रोक लगने के बाद खातेदारी भूमि में दी गई थी. लेकिन इन खानों के नाम पर लगातार अवैध रूप से नदी से बजरी निकालकर इन्हें बेचा जा रहा था. सेंट्रल एंपावर्ड कमेंटी की रिपोर्ट के बाद अब यह 177 खानें बंद होंगी. वहीं 23 खानें जो नदी पेटे से 5 किलोमीटर की परिधि से बाहर है वह चालू रहेगी, लेकिन इन खानों को चालू रखने से पहले इनका ड्रोन सर्वे करवाया जाएगा. बीकानेर में खातेदारी में 80 खानें जो पहले से चल रही है वह चलती रहेगी.


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