राजस्थान

हिंगोनिया गौशाला में कारकस निस्तारण के लिए बनेगा नया प्लांट

Admindelhi1
19 Oct 2026 11:32 AM IST
हिंगोनिया गौशाला में कारकस निस्तारण के लिए बनेगा नया प्लांट
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हिंगोनिया गौशाला में नए प्लांट के लिए डेढ़ एकड़ जमीन तय

जयपुर: जयपुर की हिंगोनिया गौशाला में मृत पशुओं के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण के लिए नया कारकस प्लांट बनाया जाएगा। श्रीकृष्ण बलराम सेवा ट्रस्ट की ओर से प्रस्तावित इस प्लांट का निर्माण मुंबई की एक कंपनी करेगी। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी हो चुके हैं। करीब डेढ़ एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस प्लांट का काम जल्द शुरू होने की संभावना है।

गौशाला में पहले से एक कारकस प्लांट बना हुआ है, लेकिन करीब चार-पांच महीने पहले तेज आंधी और बारिश के दौरान उसकी चिमनी क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद से प्लांट बंद है। पुराने प्लांट की मरम्मत कर उसे दोबारा चालू करने की तैयारी भी की जा रही है। वहीं, नए प्लांट के निर्माण में एक साल से अधिक समय लगने का अनुमान है।

गौशाला प्रशासन के अनुसार पुराना प्लांट क्षमता के लिहाज से जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं था। इसी को ध्यान में रखते हुए बड़े प्लांट की योजना बनाई गई है। इसके निर्माण में प्रदूषण नियंत्रण संबंधी दिशा-निर्देशों की पालना की जाएगी। यह प्लांट हाईकोर्ट के निर्देश पर बनाया जा रहा है। इसका निर्माण गौशाला परिसर में उसी स्थान पर प्रस्तावित है, जहां पहले मृत गोवंश को दफनाया जाता था।

हिंगोनिया गौशाला के प्रबंध संचालक प्रेमानंद ने बताया कि चिमनी क्षतिग्रस्त होने के कारण मौजूदा कारकस प्लांट लंबे समय से बंद है। अब नया प्लांट बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है और आगामी समय में इसका निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। पुराने प्लांट की मरम्मत कर उसे भी फिर से चालू किया जाएगा।

कारकस प्लांट का उद्देश्य मृत पशुओं के शवों का स्वच्छ और नियंत्रित तरीके से निस्तारण करना है। इसके जरिए खुले में शव छोड़ने या दफनाने से होने वाली दुर्गंध और संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। प्लांट में प्रसंस्करण के बाद हड्डियों और अन्य अवशेषों को अलग कर उपयोगी उप-उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, इनके उपयोग और पर्यावरणीय प्रभाव का निर्धारण संबंधित तकनीक तथा लागू मानकों के अनुसार होता है।

हिंगोनिया गौशाला में 25 हजार से अधिक गोवंश के रहने की जानकारी दी गई है। जयपुर शहर की सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गोवंश को नगर निगम द्वारा पकड़कर यहां पहुंचाया जाता है। गोवंश के चारे-पानी, देखभाल और उपचार पर निगम की ओर से खर्च किया जाता है। गौशाला का संचालन श्रीकृष्ण बलराम सेवा ट्रस्ट कर रहा है।

नगर निगम ने निराश्रित गोवंश के संरक्षण और उपचार के उद्देश्य से हिंगोनिया गौशाला शुरू की थी। वर्ष 2015 में यहां गोवंश की मौतों का मामला चर्चा में आया था। इसके बाद गौशाला के प्रबंधन की जिम्मेदारी श्रीकृष्ण बलराम सेवा ट्रस्ट को सौंपी गई। सरकार और ट्रस्ट के बीच हुए समझौते के तहत गौवंश की देखभाल तथा चारे-पानी की व्यवस्था के लिए अनुदान का प्रावधान किया गया।

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