राजस्थान

तीन पैरों पर जी रही गाय को मिली नई जिंदगी, अब चार पैरों पर भर रही कदम

Rajeshwari Nishad
29 Oct 2026 1:25 PM IST
तीन पैरों पर जी रही गाय को मिली नई जिंदगी, अब चार पैरों पर भर रही कदम
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उदयपुर। राजस्थान के राजसमंद जिले से मानवता और पशु सेवा की एक अनोखी मिसाल सामने आई है। करीब एक साल पहले सड़क दुर्घटना में अपना अगला बायां पैर गंवा चुकी गाय को उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान ने नई जिंदगी दी है। संस्थान के विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक की मदद से गाय के लिए विशेष कृत्रिम पैर तैयार किया, जिसके सहारे वह एक बार फिर चारों पैरों पर खड़ी होकर चलने लगी है। राजसमंद जिले के घोड़ाघाटी गांव की गौशाला में रहने वाली इस गाय को लंबे समय से चलने-फिरने में परेशानी हो रही थी। उसकी पीड़ा को देखकर मंदिर के पुजारी शंकर सिंह शक्तावत ने नारायण सेवा संस्थान से सहायता मांगी। इसके बाद संस्थान ने पहली बार किसी गाय के लिए विशेष मॉड्यूलर कृत्रिम पैर तैयार करके उसे नि:शुल्क लगाया।
हाईवे पर हादसे में गंवाना पड़ा था अगला पैर
जानकारी के अनुसार, राजसमंद जिले के घोड़ाघाटी क्षेत्र में करीब एक साल पहले यह गाय उदयपुर-नाथद्वारा हाईवे पर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थी। हादसे में उसका अगला बायां पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था।चोट इतनी गंभीर थी कि गाय की जान बचाने के लिए प्रभावित पैर को काटना पड़ा। इसके बाद गाय तीन पैरों के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर हो गई।गाय के लिए सामान्य तरीके से खड़े होना और चलना बेहद मुश्किल हो गया था। शरीर का पूरा वजन तीन पैरों पर आने के कारण उसे संतुलन बनाने में परेशानी होती थी।गौशाला में उसकी देखभाल की जा रही थी, लेकिन लंबे समय तक उसकी हालत में पर्याप्त सुधार नहीं हो सका। गाय की परेशानी देखकर उसकी सेवा करने वाले लोग भी चिंतित थे।
पुजारी शंकर सिंह शक्तावत ने दिखाई संवेदनशीलता
घोड़ाघाटी स्थित मंदिर के पुजारी शंकर सिंह शक्तावत लंबे समय से इस गाय की देखभाल कर रहे थे। उन्होंने गाय को दोबारा चलने योग्य बनाने के लिए मदद की तलाश शुरू की।शक्तावत का मानना था कि बेजुबान जानवर अपनी परेशानी शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए उनकी पीड़ा को समझना और उनकी सहायता करना मनुष्य की जिम्मेदारी है।इसी सोच के साथ उन्होंने उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान से संपर्क किया और गाय की स्थिति की जानकारी दी।संस्थान से सहायता मिलने की उम्मीद जगी तो गौशाला में उसकी देखभाल करने वाले लोगों को भी विश्वास हुआ कि आधुनिक तकनीक से गाय को दोबारा चलने में मदद मिल सकती है।
नारायण सेवा संस्थान ने तुरंत भेजी विशेषज्ञ टीम
गाय की स्थिति की जानकारी नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल तक पहुंची। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए संस्थान के प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स (P&O) विभाग की विशेषज्ञ टीम को घोड़ाघाटी भेजने के निर्देश दिए।
विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर गाय की शारीरिक स्थिति का आकलन किया। टीम ने प्रभावित पैर के शेष हिस्से, त्वचा की स्थिति, शरीर के वजन और कृत्रिम पैर लगाने की संभावनाओं की जांच की।इसके बाद गाय की शारीरिक बनावट के अनुसार विशेष माप लिए गए, ताकि कृत्रिम पैर लगाने के बाद उसे खड़े होने और चलने में पर्याप्त सहारा मिल सके।संस्थान के लिए यह कार्य एक नई चुनौती थी, क्योंकि वह सामान्यतः दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कृत्रिम अंग तैयार करता है।
चार दिन में तैयार किया आधुनिक कृत्रिम पैर
नारायण सेवा संस्थान के विशेषज्ञों ने गाय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मॉड्यूलर कृत्रिम पैर बनाने का फैसला किया।इसकी तकनीकी जिम्मेदारी संस्थान के पीएंडओ विभाग के प्रमुख डॉ. मानस रंजन साहू ने संभाली।टीम ने कार्बन फाइबर और अन्य विशेष सामग्री की मदद से मजबूत एवं हल्का कृत्रिम पैर तैयार किया। इसे गाय की शारीरिक बनावट, वजन और संतुलन को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया।जानकारी के अनुसार, विशेषज्ञों ने लगभग चार दिन में यह कृत्रिम पैर तैयार कर लिया।कृत्रिम पैर बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि गाय के प्रभावित हिस्से पर अनावश्यक दबाव न पड़े और उसे चलने के दौरान पर्याप्त सहारा मिल सके।
कृत्रिम पैर लगते ही चारों पैरों पर खड़ी हुई गाय
कृत्रिम पैर तैयार होने के बाद नारायण सेवा संस्थान की तकनीकी टीम दोबारा घोड़ाघाटी गौशाला पहुंची।विशेषज्ञों ने सावधानीपूर्वक गाय के प्रभावित पैर पर कृत्रिम अंग लगाया। इसके बाद उसे धीरे-धीरे खड़ा करने का प्रयास किया गया।शुरुआती कोशिशों के बाद गाय कृत्रिम पैर का सहारा लेकर चारों पैरों पर खड़ी होने में सफल रही। इसके बाद उसने धीरे-धीरे चलना भी शुरू कर दिया।करीब एक साल से तीन पैरों के सहारे जीवन गुजार रही गाय को दोबारा खड़ा होते देखकर गौशाला के संचालकों और सेवादारों में खुशी का माहौल बन गया।चिकित्सकों के अनुसार, गाय को नए कृत्रिम पैर के साथ सहज होने में कुछ समय लगेगा। इसलिए उसके चलने, संतुलन बनाने और कृत्रिम अंग की फिटिंग पर निगरानी रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर पैर में आवश्यक बदलाव भी किए जाएंगे।
एक लाख रुपये का कृत्रिम पैर बिल्कुल मुफ्त लगाया
इस कृत्रिम पैर की अनुमानित बाजार कीमत करीब एक लाख रुपये बताई गई है। हालांकि, नारायण सेवा संस्थान ने गाय की सहायता के लिए कोई शुल्क नहीं लिया।कृत्रिम अंग के निर्माण से लेकर उसकी फिटिंग तक की पूरी प्रक्रिया नि:शुल्क पूरी की गई।इस पहल से न केवल गाय को दोबारा चलने का अवसर मिला है, बल्कि यह भी सामने आया है कि आधुनिक पुनर्वास तकनीक का इस्तेमाल जरूरतमंद पशुओं के लिए भी किया जा सकता है।
संस्थान ने पहली बार किसी गाय के लिए बनाया कृत्रिम अंग
नारायण सेवा संस्थान लंबे समय से दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास, कृत्रिम अंग निर्माण और विभिन्न सेवा गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।लेकिन किसी गाय के लिए कृत्रिम पैर तैयार करना संस्थान के लिए पहला अनुभव रहा।संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने इस प्रयास की सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि सेवा का उद्देश्य केवल मनुष्यों की सहायता करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद और पीड़ित मूक प्राणियों की मदद करना भी है।उन्होंने भविष्य में भी जरूरत पड़ने पर ऐसे पशुओं की सहायता करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
बेजुबान पशुओं के लिए उम्मीद की नई किरण
राजसमंद की इस घटना ने पशु कल्याण और आधुनिक चिकित्सा तकनीक के उपयोग की नई संभावनाएं सामने रखी हैं।सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले कई पशु गंभीर चोटों के कारण स्थायी रूप से चलने-फिरने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे पशुओं की देखभाल के लिए लंबे समय तक उपचार, पुनर्वास और विशेषज्ञ सहायता की जरूरत पड़ सकती है।कृत्रिम अंग सभी घायल पशुओं के लिए उपयुक्त नहीं होते, लेकिन सही चिकित्सकीय जांच और विशेष डिजाइन की सहायता से कुछ पशुओं की गतिशीलता बेहतर बनाई जा सकती है।
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