राजस्थान

9 साल का मासूम बोरवेल में फंसा

Rajeshwari Nishad
16 Oct 2026 10:53 PM IST
9 साल का मासूम बोरवेल में फंसा
x
फलोदी। राजस्थान के फलोदी जिले में 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिरे नौ वर्षीय बच्चे भोमाराम को बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गुरुवार दोपहर हुए हादसे के बाद से प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और स्थानीय बचाव दल बच्चे को सुरक्षित निकालने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन बोरवेल के भीतर फंसा एक बड़ा पत्थर रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा बन गया है। शुक्रवार सुबह कैमरे के माध्यम से बच्चे की हलचल दिखाई देना बंद होने की जानकारी से परिजनों और प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है।
बचाव दल के अनुसार, बच्चा करीब 640 फीट की गहराई में फंसा हुआ बताया जा रहा है। बोरवेल में कैमरा और अन्य उपकरण नीचे पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन रास्ते में पत्थर होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी। लगातार प्रयासों के बीच बोरवेल में पानी रिसने की समस्या भी सामने आई है। इस वजह से रेस्क्यू अभियान और चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, कैमरे में हलचल नहीं दिखने का मतलब बच्चे की मौत की पुष्टि नहीं है।
गुरुवार दोपहर खेत में हुआ दर्दनाक हादसा
यह घटना फलोदी जिले की लोहावट पंचायत समिति क्षेत्र के नौसर गांव स्थित पूनियों की ढाणी की है। गुरुवार, 15 अक्टूबर को खेत में लगे बोरवेल की मरम्मत का काम चल रहा था।
जानकारी के अनुसार, भोमाराम के पिता पांचाराम भील के खेत में लगा बोरवेल खराब हो गया था। इसे ठीक कराने के लिए मशीन बुलाई गई थी। मरम्मत के दौरान बोरवेल खुला हुआ था।
इसी बीच करीब नौ साल का भोमाराम अचानक बोरवेल में गिर गया। घटना उसके पिता की मौजूदगी में हुई। बच्चे के गहराई में गिरने के बाद परिवार के लोग घबरा गए और तत्काल प्रशासन को सूचना दी।सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
1050 फीट गहरा बोरवेल, 640 फीट पर फंसा बच्चा
बोरवेल की कुल गहराई लगभग 1050 फीट बताई जा रही है, जबकि भोमाराम करीब 640 फीट की गहराई में फंसा है।इतनी अधिक गहराई के कारण बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो गया है। बोरवेल का रास्ता संकरा होने के कारण नीचे बड़े उपकरण पहुंचाना आसान नहीं है।
रेस्क्यू टीम ने शुरुआती प्रयासों में कैमरा और अन्य उपकरणों की मदद से बच्चे की स्थिति का पता लगाने की कोशिश की थी। कुछ समय तक कैमरे में हलचल दिखाई देने की जानकारी मिली थी।लेकिन बाद में उपकरण आगे नहीं बढ़ सके। इससे बच्चे की वर्तमान स्थिति की स्पष्ट जानकारी प्राप्त करना मुश्किल हो गया है।
बच्चे से ऊपर फंसा पत्थर बना बड़ी चुनौती
रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा बोरवेल के भीतर फंसा पत्थर बताया जा रहा है।बचाव दल के अनुसार, बच्चे से लगभग 30 फीट ऊपर एक बड़ा पत्थर फंसा हुआ है। इसके कारण पाइप, कैमरा और बचाव उपकरणों को नीचे तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है।
कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि कैमरा लगभग 30 फीट नीचे जाकर ही बाधित हो गया। वहीं, बच्चे की गहराई और पत्थर की स्थिति को लेकर अलग-अलग तकनीकी विवरण भी सामने आए हैं।ऐसे में बचाव दल को बहुत सावधानी से काम करना पड़ रहा है, ताकि उपकरणों का इस्तेमाल करते समय बोरवेल के भीतर की स्थिति और खराब न हो।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर तैनात
भोमाराम को बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें विशेष उपकरणों के साथ मौके पर मौजूद हैं।गुरुवार को एसडीआरएफ ने दो बार बच्चे को बाहर निकालने का प्रयास किया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। रात करीब नौ बजे अजमेर से एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच गई।
इसके बाद रातभर बचाव अभियान चलाया गया। टीम ने बोरवेल के भीतर उपकरण उतारकर बच्चे तक पहुंचने की कोशिश की। हालांकि, पत्थर के कारण अभियान में लगातार बाधाएं आती रहीं।जिला कलेक्टर अंकित कुमार और पुलिस अधीक्षक आदित्य सहित प्रशासनिक अधिकारी बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं।
देसी जुगाड़ से बच्चे को निकालने की कोशिश
विशेष उपकरणों से सफलता नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने स्थानीय विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया।जानकारी के अनुसार, बोरवेल में फंसे लोगों को निकालने का अनुभव रखने वाले स्थानीय विशेषज्ञ मादाराम और उनकी टीम को बुलाया गया है।टीम ने लोहे के सरियों को जोड़कर विशेष उपकरण तैयार किया है। इसकी सहायता से बोरवेल में फंसे पत्थर की बाधा पार करने और बच्चे तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।स्थानीय तकनीक का इस्तेमाल भी बेहद सावधानी से किया जा रहा है, क्योंकि बोरवेल के भीतर बच्चे की स्थिति का स्पष्ट अंदाजा नहीं लग पा रहा है।
बोरवेल में पानी रिसने से बढ़ी परेशानी
रेस्क्यू अभियान के दौरान बोरवेल के भीतर पानी रिसने की जानकारी भी सामने आई है।इससे बचाव दल के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। पहले ही पत्थर और अत्यधिक गहराई के कारण उपकरण नीचे पहुंचाने में मुश्किल हो रही थी।अब पानी की मौजूदगी ने बचाव अभियान को और जटिल बना दिया है।रेस्क्यू टीम बोरवेल के अंदर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तैयार कर रही है। अधिकारियों की प्राथमिकता बच्चे तक सुरक्षित पहुंचना है।
घटनास्थल पर पहुंचे मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर
राजस्थान सरकार के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर भी घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव अभियान की जानकारी ली।उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और बचाव दल से बातचीत की। मंत्री ने बच्चे की स्थिति को चिंताजनक बताया।प्रशासन की ओर से उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञों की मदद से भोमाराम को बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।इस दौरान आसपास के ग्रामीण भी घटनास्थल पर मौजूद रहे।
पिता की आंखों के सामने हुआ हादसा
भोमाराम के बोरवेल में गिरने की घटना उसके पिता पांचाराम भील की मौजूदगी में हुई थी।जानकारी के अनुसार, खेत में बोरवेल की मरम्मत के दौरान बच्चा अचानक गहराई में गिर गया। परिवार के सदस्यों ने तत्काल मदद के लिए आवाज लगाई।घटना के बाद से परिजन बच्चे की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं।
काफी समय बीत जाने और बचाव अभियान में लगातार बाधाएं आने के कारण परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। आसपास के ग्रामीण भी बचाव अभियान की सफलता की कामना कर रहे हैं।
पहले रेस्क्यू में केवल बच्चे की शर्ट निकली
बचाव अभियान के शुरुआती चरण में टीम ने बोरवेल के भीतर उपकरणों की सहायता से बच्चे को निकालने का प्रयास किया था।रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को चलाए गए एक प्रयास के दौरान बच्चे की शर्ट बाहर निकली थी, लेकिन भोमाराम को नहीं निकाला जा सका।इसके बाद बचाव दल ने दूसरे तरीकों से प्रयास शुरू किए।विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चे तक पहुंचने के लिए बोरवेल में फंसी बाधाओं को सुरक्षित तरीके से पार करना है।
खुले बोरवेल की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
फलोदी की इस घटना ने खुले बोरवेल और उनकी मरम्मत के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।खेतों में बोरवेल की मरम्मत या सफाई के दौरान यदि उन्हें खुला छोड़ दिया जाए, तो बच्चों और अन्य लोगों के गिरने का खतरा रहता है।विशेषज्ञों के अनुसार, बोरवेल की मरम्मत के दौरान आसपास सुरक्षित घेराबंदी और चेतावनी व्यवस्था होनी चाहिए।इसके अलावा उपयोग में नहीं आने वाले बोरवेल को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार बंद करना भी जरूरी है।
भोमाराम की स्थिति को लेकर चिंता बरकरार
शुक्रवार, 16 अक्टूबर की शाम तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भोमाराम को सुरक्षित बाहर निकालने की पुष्टि नहीं हो सकी थी। पत्थर की बाधा के कारण बचाव कार्य कुछ समय प्रभावित हुआ, जिसके बाद नए उपकरणों की मदद से प्रयास आगे बढ़ाए गए।
सबसे अधिक चिंता कैमरे के जरिए बच्चे की हलचल स्पष्ट दिखाई नहीं देने को लेकर है। हालांकि, तकनीकी बाधा के कारण उसकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।प्रशासन और बचाव दल का पूरा ध्यान भोमाराम तक पहुंचने और उसे सुरक्षित बाहर निकालने पर है। अब सभी की नजर बचाव अभियान की अगली सफलता पर टिकी हुई है।
Next Story