राजस्थान

नकली सोने की चूड़ियों से डेढ़ करोड़ की ठगी राजस्थान में 7 आरोपी गिरफ्तार

nidhi
11 Aug 2026 8:41 AM IST
नकली सोने की चूड़ियों से डेढ़ करोड़ की ठगी राजस्थान में 7 आरोपी गिरफ्तार
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नकली सोना गिरवी रखकर करोड़ों की ठगी टोंक पुलिस ने गैंग का किया पर्दाफाश
जयपुर: राजस्थान में नकली सोने की चूड़ियों को असली बताकर गोल्ड लोन लेने वाले एक गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य मेरठ से नकली चूड़ियां खरीदकर राजस्थान लाते थे और उन्हें असली सोने के आभूषण बताकर अलग-अलग वित्तीय संस्थानों से गोल्ड लोन हासिल करते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने इस तरीके से करीब 1.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
पुलिस ने मामले में गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया है और उनसे पूछताछ कर ठगी के नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
नकली चूड़ियों को असली बताकर लेते थे लोन
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पहले नकली चूड़ियों का इंतजाम करते थे। इसके बाद इन चूड़ियों को इस तरह तैयार किया जाता था कि पहली नजर में वे सोने की बनी हुई लगें। गिरोह के सदस्य इन आभूषणों को लेकर गोल्ड लोन देने वाली संस्थाओं के पास पहुंचते थे। वहां चूड़ियों को सोना बताकर उनके बदले लोन लिया जाता था। लोन की रकम मिलने के बाद आरोपी वहां से निकल जाते थे और बाद में जब आभूषणों की वास्तविक जांच होती थी तो उनके नकली होने का पता चलता था।
मेरठ से आता था नकली माल
जांच में कथित तौर पर यह बात सामने आई है कि गिरोह नकली चूड़ियां मेरठ से लेकर आता था। इसके बाद उन्हें राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मेरठ में नकली चूड़ियां तैयार करने या उपलब्ध कराने वाले लोग कौन हैं और क्या उनका इस गिरोह से सीधा संबंध था। अगर जांच में सप्लाई नेटवर्क की पुष्टि होती है तो मामले में आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है।
डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी का आरोप
पुलिस के अनुसार गिरोह ने अलग-अलग मामलों में गोल्ड लोन के नाम पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये हड़प लिए। आरोपियों ने एक ही तरीके का इस्तेमाल कर कई जगहों से लोन लेने की कोशिश की। अलग-अलग पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने की भी जांच की जा रही है। पुलिस अब बैंक और वित्तीय संस्थानों से संबंधित रिकॉर्ड जुटाकर यह पता लगा रही है कि गिरोह ने कुल कितने लोन लिए थे।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
गोल्ड लोन देने वाली संस्था में जमा किए गए आभूषणों की बाद में जांच की गई तो उनमें सोने की मात्रा और गुणवत्ता को लेकर गड़बड़ी सामने आई। जांच में आभूषणों के नकली होने का पता चलने के बाद संबंधित संस्थान ने पुलिस से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस कथित गिरोह तक पहुंची।
पुलिस ने आरोपियों को किया गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने गिरोह से जुड़े कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान कथित तौर पर ठगी के तरीके और नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस आरोपियों से यह भी पूछ रही है कि नकली चूड़ियां कहां तैयार होती थीं, उन्हें राजस्थान तक कौन पहुंचाता था और गोल्ड लोन लेने के लिए किन-किन संस्थानों को निशाना बनाया गया।
कई शहरों में नेटवर्क की आशंका
जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह गिरोह केवल एक शहर या एक वित्तीय संस्था तक सीमित नहीं था। गोल्ड लोन की प्रक्रिया में अलग-अलग संस्थानों की पहचान और जांच प्रणाली को समझकर ठगी करना गिरोह की संगठित गतिविधि की ओर संकेत कर सकता है। पुलिस दूसरे जिलों और राज्यों में भी इसी तरह की शिकायतों और मामलों का रिकॉर्ड खंगाल सकती है।
गोल्ड लोन कंपनियों के लिए बढ़ी चुनौती
इस तरह के मामले गोल्ड लोन देने वाली वित्तीय संस्थाओं के लिए भी बड़ी चुनौती हैं। सोने के आभूषणों की शुद्धता जांचने के बावजूद अगर नकली आभूषण सिस्टम से निकल जाते हैं तो इससे वित्तीय संस्थानों को सीधे आर्थिक नुकसान होता है। इसलिए ऐसी घटनाओं के बाद कंपनियां अपने आभूषण मूल्यांकन और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत कर सकती हैं।
नकली सोने की पहचान कैसे होती है?
सोने की शुद्धता जांचने के लिए वित्तीय संस्थानों में अलग-अलग तकनीकों और प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें आभूषण का वजन, शुद्धता, हॉलमार्क और अन्य तकनीकी जांच शामिल हो सकती है। अगर आभूषण के बाहरी स्वरूप में सोने जैसा आवरण हो, लेकिन अंदर की धातु अलग हो, तो विस्तृत जांच में इसका पता लगाया जा सकता है। इसी वजह से गोल्ड लोन लेते समय वित्तीय संस्थान आभूषण की जांच को महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानते हैं।
पुलिस कर रही है आगे की जांच
गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आरोपियों ने कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किए, कितने गोल्ड लोन लिए और ठगी की रकम का इस्तेमाल कहां किया। इसके अलावा मेरठ से राजस्थान तक नकली चूड़ियों की सप्लाई में शामिल लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
ठगी का तरीका बना जांच का अहम हिस्सा
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि आरोपियों ने सीधे नकद ठगी करने के बजाय नकली आभूषणों के बदले बैंकिंग और गोल्ड लोन सिस्टम से पैसा हासिल करने का कथित तरीका अपनाया। इससे जांच एजेंसियों के लिए पूरे नेटवर्क का पता लगाना जरूरी हो जाता है। अगर एक ही गिरोह ने कई संस्थानों को निशाना बनाया है तो अन्य मामलों के खुलने की संभावना भी हो सकती है।
आम लोगों के लिए भी सबक
यह मामला आम लोगों के लिए भी सावधानी का संदेश देता है। सोने के आभूषण खरीदते समय उनकी शुद्धता और बिल की जांच करना जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति से बिना प्रमाणित जांच के महंगे आभूषण खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। वहीं, वित्तीय संस्थानों को भी गोल्ड लोन से पहले आभूषणों की तकनीकी जांच और ग्राहक के दस्तावेजों का सत्यापन बेहद सावधानी से करना जरूरी है।
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