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चंडीगढ़ : साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां जालसाजों ने महिलाओं को शेयर बाजार में निवेश के नाम पर अपने जाल में फंसाकर करीब 3.49 करोड़ रुपये ठग लिए। आरोपियों ने इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सऐप ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट का सहारा लिया। पीड़ित महिलाओं को शुरुआत में निवेश पर अच्छा मुनाफा दिखाया गया, जिससे उनका भरोसा बढ़ता गया। इसके बाद उनसे लगातार बड़ी रकम निवेश के नाम पर जमा कराई गई।
जानकारी के मुताबिक, साइबर ठगी का यह नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचता था। आरोपियों ने फेसबुक पर निवेश और ट्रेडिंग से जुड़े विज्ञापन चलाए। इन विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को शेयर बाजार में निवेश करने और कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता था। विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले लोगों को बाद में व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ दिया जाता था।
व्हाट्सऐप ग्रुप में पहले से मौजूद सदस्य शेयर बाजार और ट्रेडिंग से जुड़े संदेश भेजते थे। कुछ लोगों को कथित तौर पर मुनाफा कमाते हुए दिखाया जाता था। फर्जी स्क्रीनशॉट और ट्रेडिंग से जुड़े आंकड़ों के जरिए पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि निवेश करने पर उन्हें बड़ा फायदा मिल सकता है। आरोपियों ने पीड़ितों को भरोसे में लेने के लिए फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट भी तैयार किए। इन अकाउंट में निवेश की गई रकम और कथित मुनाफा दिखाई देता था। जब पीड़ित अपने अकाउंट में बढ़ती रकम देखते थे तो उनका भरोसा और मजबूत हो जाता था। इसके बाद उन्हें और अधिक पैसा निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
ठगी का तरीका यहीं खत्म नहीं होता था। जब कोई पीड़ित अपने खाते में दिखाई जा रही रकम निकालने की कोशिश करता, तो आरोपियों की ओर से अलग-अलग तरह के शुल्क और टैक्स के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाती थी। पीड़ितों को बताया जाता था कि पैसा निकालने के लिए पहले टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या अन्य चार्ज जमा करना जरूरी है। इस तरह उन्हें बार-बार पैसा जमा करने के लिए मजबूर किया जाता था। शुरुआत में कुछ पीड़ितों को छोटी रकम का मुनाफा निकालने की अनुमति भी दी गई हो सकती है, जिससे उन्हें यह भरोसा हो जाए कि ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म असली है। इसके बाद जब निवेश की रकम लाखों रुपये तक पहुंच गई, तो पैसे की निकासी रोक दी गई। पीड़ितों को लगातार नए बहाने बताए जाते रहे।
चंडीगढ़ में सामने आए इस मामले में कई महिलाओं के साथ इसी तरह की धोखाधड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग पीड़ितों से ठगी गई रकम को जोड़ने पर यह आंकड़ा करीब 3.49 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इतनी बड़ी रकम की साइबर ठगी सामने आने के बाद पुलिस और साइबर जांच एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया है। जांच में पुलिस आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खातों, सोशल मीडिया अकाउंट, व्हाट्सऐप ग्रुप और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की जानकारी जुटा सकती है। साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए लेनदेन से जुड़े बैंक खातों और डिजिटल भुगतान की भी जांच की जा रही है। फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट किस तरीके से बनाए गए और उनके पीछे कौन लोग थे, यह भी जांच का अहम हिस्सा है।
साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को ऐसे ऑनलाइन निवेश प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह देते हैं। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर बाजार में निश्चित या बहुत अधिक मुनाफे का दावा किया जाए तो तुरंत पैसा निवेश नहीं करना चाहिए। किसी भी ट्रेडिंग ऐप या वेबसाइट की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।
खास तौर पर व्हाट्सऐप ग्रुप में मिलने वाले निवेश टिप्स और ट्रेडिंग सलाह पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। साइबर ठग अक्सर लोगों को प्रभावित करने के लिए फर्जी विशेषज्ञ, फर्जी स्क्रीनशॉट और नकली मुनाफे के आंकड़े दिखाते हैं। शुरुआत में सब कुछ वास्तविक दिखाई दे सकता है, लेकिन बड़ी रकम जमा कराने के बाद पीड़ित को पैसे निकालने में परेशानी होने लगती है। चंडीगढ़ का यह मामला एक बार फिर बताता है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश के नाम पर चल रहे साइबर फ्रॉड से सावधान रहने की जरूरत है। फेसबुक विज्ञापन से लेकर व्हाट्सऐप ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट तक, ठग आधुनिक डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीत रहे हैं। ऐसे मामलों में जल्द शिकायत करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर लेनदेन से जुड़े खातों और डिजिटल फंड को ट्रेस या फ्रीज करने की संभावना बढ़ सकती है।
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