पंजाब

कौन-से हैं वो 3 कृषि कानून?, जिसे मोदी सरकार वापस लेने में हुई मजबूर

Gulabi
19 Nov 2021 12:46 PM GMT
कौन-से हैं वो 3 कृषि कानून?, जिसे मोदी सरकार वापस लेने में हुई मजबूर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह राष्ट्र को संबोधित करते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह राष्ट्र को संबोधित करते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है. इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देंगे."
आइए, अब उन तीनों कृषि कानूनों को जानते हैं, जिनका विरोध किया जा रहा था
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों के हित में तीन कृषि कानून बनाए थे. पहला कानून था- कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम -2020, दूसरा कानून था- कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम 2020 और तीसरा कानून था- आवश्यक वस्तुएं संशोधन अधिनियम 2020.
कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम -2020
इस कानून के तहत देश के किसानों को उनकी उपज बेचने के लिए अधिक विकल्प मुहैया कराना मुख्य उद्देश्य था. ये कानून देश के किसानों को अच्छी कीमत पर अपनी फसल बेचने की स्वतंत्रता देता था. इसके अलावा यह, राज्य सरकारों को मंडी के बाहर होने वाली उपज की खरीद-फरोख्त पर टैक्स वसूलने से रोक लगाता था. इस कानून के तहत किसान अपनी फसलों को देश के किसी भी हिस्से में किसी भी व्यक्ति, दुकानदार, संस्था आदि को बेच सकते थे. इतना ही नहीं, किसान अपनी उपज की कीमत भी खुद तय कर सकते थे.
कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम 2020
इस कानून के तहत देशभर के किसान बुआई से पहले ही तय मानकों और तय कीमत के हिसाब से अपनी फसल को बेच सकते थे. सीधे शब्दों में कहें तो यह कानून कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से जुड़ा है. इस कानून को लेकर सरकार का कहना था कि इसके जरिए किसानों को नुकसान का जोखिम कम रहेगा. इसके अलावा उन्हें फसल तैयार होने के बाद खरीदारों को जगह-जगह जाकर ढूंढने की भी जरूरत नहीं होगी. इतना ही नहीं, इसके जरिए देश का किसान समानता के आधार पर न सिर्फ खरीदार ढूंढ पाने में सक्षम होगा बल्कि उसकी पहुंच बड़े कारोबारियों और निर्यातकों तक बढ़ जाएगी.
आवश्यक वस्तुएं संशोधन अधिनियम 2020
फसलों के भंडारण और फिर उसकी काला बाजारी को रोकने के लिए सरकार ने पहले Essential Commodity Act 1955 बनाया था. इसके तहत व्यापारी एक सीमित मात्रा में ही किसी भी कृषि उपज का भंडारण कर सकते थे. वे तय सीमा से बढ़कर किसी भी फसल को स्टॉक में नहीं रख सकते थे. नए कृषि कानूनों में आवश्यक वस्तुएं संशोधन अधिनियम 2020 के तहत अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू जैसी कई फसलों को आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट से बाहर कर दिया. सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा, अकाल या ऐसे ही किसी विपरीत हालात के दौरान इन वस्तुओं के भंडारण पर कोई सीमा नहीं लगेगी.
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