पंजाब

पंजाब में प्रतिबंधित कैप्सूल की बिक्री पर बवाल

Ratna Netam
22 Oct 2026 5:18 PM IST
पंजाब में प्रतिबंधित कैप्सूल की बिक्री पर बवाल
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चंडीगढ़। पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच प्रतिबंधित और नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं की कथित अवैध बिक्री को लेकर सियासत तेज हो गई है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने गुरुवार को राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद कुछ कैप्सूल अलग-अलग नामों से बाजार में बेचे जा रहे हैं। परगट सिंह ने सवाल उठाया कि प्रतिबंधों और शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
प्रतिबंध के बावजूद कैप्सूल की बिक्री का आरोप
परगट सिंह ने कहा कि वर्ष 2021 में कांग्रेस सरकार ने पंजाब के कई जिलों में नशे के लिए दुरुपयोग होने वाले कुछ कैप्सूल की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था। उनका दावा है कि इसके बावजूद इन उत्पादों की बिक्री दूसरे नामों से जारी रही।उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रतिबंधित उत्पाद बाजार तक कैसे पहुंच रहे हैं और इनके वितरण के लिए कौन जिम्मेदार है।कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, नशे के खिलाफ अभियान केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई आवश्यक है।
परविंदर झोटा के अभियान का किया जिक्र
परगट सिंह ने नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 2023 में एक दुकानदार को कथित तौर पर ऐसे कैप्सूल बेचते हुए पकड़ा था।कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उनके पास इस घटना से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना भी मौजूद है।उन्होंने कहा कि झोटा लगातार नशीली दवाओं की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाते रहे थे। इसके बावजूद उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।परगट सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण प्रतिबंधों का प्रभावी पालन नहीं हो सका।
झोटा की हत्या के बाद फिर उठा मुद्दा
पंजाब के मानसा जिले में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हालिया हत्या के बाद नशीली दवाओं की अवैध बिक्री का मुद्दा दोबारा चर्चा में आया है।झोटा मेडिकल स्टोरों के माध्यम से कथित रूप से बेची जा रही नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान चला रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर कई वीडियो साझा कर अवैध बिक्री और प्रशासनिक निष्क्रियता के आरोप लगाए थे।उनकी हत्या के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने नशीली दवाओं के कारोबार तथा कानून लागू करने वाली एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, हत्या के पीछे वास्तविक कारणों का निर्धारण पुलिस जांच से ही होगा।
मेडिकल स्टोरों की निगरानी पर उठे सवाल
पंजाब में प्रेगाबालिन युक्त कैप्सूल के दुरुपयोग को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। प्रेगाबालिन एक चिकित्सकीय दवा है, जिसका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर कुछ प्रकार के तंत्रिका दर्द और अन्य चिकित्सकीय स्थितियों में किया जाता है।मानसा प्रशासन ने वर्ष 2021 में 75 मिलीग्राम से अधिक क्षमता वाले प्रेगाबालिन कैप्सूल की बिना चिकित्सकीय पर्चे बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था।ऐसे में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि प्रतिबंध किस दवा, किस मात्रा और किन परिस्थितियों में लागू था। सभी प्रेगाबालिन दवाओं को पूरी तरह प्रतिबंधित बताना सही नहीं होगा।
सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग
परगट सिंह ने आरोप लगाया कि प्रतिबंधों और शिकायतों के बावजूद नशीली दवाओं के अवैध कारोबार को रोकने में राज्य सरकार विफल रही है।उन्होंने प्रशासन से संबंधित दुकानदारों, आपूर्ति करने वालों और नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।इस बीच झोटा की हत्या के बाद पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने औषधि नियंत्रण अधिकारियों को मेडिकल स्टोरों की जांच तेज करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
पंजाब में नशे को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस
पंजाब में नशीली दवाओं की उपलब्धता लंबे समय से गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बनी हुई है। विपक्ष सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, जबकि प्रशासन अवैध बिक्री रोकने के लिए निरीक्षण अभियान चलाने की बात कह रहा है।परगट सिंह के ताजा आरोपों ने एक बार फिर प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री, मेडिकल स्टोरों की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देती है और अवैध बिक्री रोकने के लिए आगे कौन से कदम उठाए जाते हैं।
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