
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक अश्विनी शर्मा की एक टिप्पणी को लेकर जमकर हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने उनकी टिप्पणी को आपत्तिजनक बताते हुए विरोध जताया, जबकि शर्मा ने बाद में स्पष्ट किया कि उन्होंने एक पंजाबी कहावत का इस्तेमाल किया था, जिसे गलत संदर्भ में लिया गया।
विवाद की शुरुआत विधानसभा में शून्यकाल (जीरो आवर) के दौरान हुई। खनन और भूविज्ञान मंत्री नरिंदर कुमार गोयल ने खनन क्षेत्र से अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं होने के मुद्दे पर चर्चा करते हुए इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार का सहयोग किया होता तो खनन से मिलने वाला राजस्व काफी अधिक हो सकता था।
गोयल ने दावा किया कि केंद्र से उचित सहयोग मिलने पर पंजाब में खनन क्षेत्र से करीब 20,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व हासिल किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य पहले भी आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की ओर से बताया गया था।
मंत्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी विधायक अश्विनी शर्मा ने पंजाब सरकार पर हर मुद्दे के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया। इसी दौरान उन्होंने एक लड़की के जन्म का उदाहरण देते हुए एक पंजाबी कहावत का जिक्र किया।
शर्मा की इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने कड़ा विरोध जताया। आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने आरोप लगाया कि यह टिप्पणी महिलाओं और बेटियों को लेकर भेदभावपूर्ण मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि विधानसभा जैसे मंच पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है।
विरोध बढ़ने के बाद सदन में कुछ समय के लिए माहौल गर्म हो गया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विधायक से अपनी टिप्पणी वापस लेने की मांग की। वहीं, बीजेपी विधायक ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
बाद में अश्विनी शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने केवल एक पारंपरिक पंजाबी कहावत का संदर्भ दिया था। उन्होंने कहा कि कहावत का अर्थ राजनीतिक संदर्भ में था और इसे महिलाओं या बेटियों के खिलाफ टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी बात को संदर्भ से हटाकर समझा गया।
शर्मा ने कहा कि वह बेटियों और महिलाओं का सम्मान करते हैं और उनके बयान का उद्देश्य किसी भी वर्ग या समुदाय का अपमान करना नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक बहस के दौरान उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया।
विधानसभा में हुई इस बहस ने एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी में भाषा और शब्दों के चयन को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। सत्ता पक्ष का कहना था कि सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय नेताओं को संवेदनशील मुद्दों का ध्यान रखना चाहिए, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक विवाद बनाने का आरोप लगाया।
इस पूरे घटनाक्रम में खनन राजस्व का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा। पंजाब सरकार लगातार राज्य के राजस्व स्रोतों को बढ़ाने की बात करती रही है। खनन क्षेत्र से आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, लेकिन इसको लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आते रहे हैं।
मंत्री नरिंदर कुमार गोयल के बयान पर बीजेपी ने आपत्ति जताई और कहा कि राज्य सरकार अपनी नाकामियों की जिम्मेदारी केंद्र पर डाल रही है। बीजेपी विधायक अश्विनी शर्मा ने भी इसी मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि वह हर समस्या के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करती है।
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान हुए इस विवाद के बाद दोनों पक्षों के नेताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। हालांकि, शर्मा की सफाई के बाद मामला शांत हुआ और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा में इस तरह के विवाद अक्सर राजनीतिक मतभेदों के कारण सामने आते हैं, लेकिन संवेदनशील सामाजिक मुद्दों से जुड़े शब्दों के इस्तेमाल पर नेताओं को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
फिलहाल, अश्विनी शर्मा की टिप्पणी और उसके बाद दी गई सफाई ने पंजाब की राजनीति में एक नया मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है। जहां सत्ता पक्ष इसे संवेदनशीलता से जुड़ा मामला बता रहा है, वहीं बीजेपी इसे बयान को गलत समझे जाने का मामला बता रही है।





