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पंजाब विधानसभा में धार्मिक अपमान-विरोधी कानून को लेकर हंगामा

Kavita2
6 Aug 2026 11:27 AM IST
पंजाब विधानसभा में धार्मिक अपमान-विरोधी कानून को लेकर हंगामा
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चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में बुधवार को धार्मिक अपमान-विरोधी कानून (Anti-Sacrilege Law) को लेकर जमकर हंगामा हुआ। शिरोमणि अकाली दल (SAD) की विधायक गनीव कौर मजीठिया ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार से इस मुद्दे पर सवाल किया, जिसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

मामला उस समय गरमा गया जब अकाली विधायक ने धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों पर सरकार की स्थिति और कानून को लेकर सवाल उठाए। इस दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं ने पलटवार करते हुए उन पर अकाल तख्त के जत्थेदार की ओर से दिए गए निर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

सदन में उठा धार्मिक अपमान-विरोधी कानून का मुद्दा

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान गनीव कौर मजीठिया ने धार्मिक अपमान के मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सरकार की ओर से क्या कदम उठाए गए हैं और लंबे समय से लंबित धार्मिक अपमान-विरोधी कानून को लेकर सरकार की क्या नीति है।

अकाली दल विधायक ने आरोप लगाया कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े गंभीर मामलों में सरकार को अधिक प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

AAP ने किया पलटवार

विपक्ष के सवालों पर जवाब देते हुए पंजाब सरकार के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और अन्य सत्तापक्ष के नेताओं ने अकाली विधायक पर निशाना साधा।

सत्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि अकाल तख्त के जत्थेदार ने सदन में धार्मिक अपमान के मुद्दे पर चर्चा नहीं करने की सलाह दी थी, इसके बावजूद यह मामला विधानसभा में उठाया गया।

AAP नेताओं ने कहा कि धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने से बचना चाहिए और सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।

अकाल तख्त के निर्देश का हवाला

सत्तापक्ष की ओर से बहस के दौरान अकाल तख्त के जत्थेदार के निर्देश का उल्लेख किया गया। AAP नेताओं का कहना था कि जब धार्मिक संस्थान की ओर से सदन में इस विषय पर चर्चा को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे, तो उनका सम्मान किया जाना चाहिए था।

हालांकि, विपक्ष ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर विधानसभा में सवाल उठाना विधायकों का अधिकार है।

कानून को लेकर पहले भी होती रही है बहस

पंजाब में धार्मिक अपमान के मामलों को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा होती रही है। राज्य में श्री गुरु ग्रंथ साहिब समेत अन्य धार्मिक प्रतीकों के अपमान के मामलों पर कड़ी सजा की मांग समय-समय पर उठती रही है।

विभिन्न राजनीतिक दल इन मामलों को लेकर अपनी-अपनी राय रखते रहे हैं और सरकारों से सख्त कानून बनाने की मांग करते रहे हैं।

विपक्ष ने सरकार से मांगा जवाब

गनीव कौर मजीठिया ने कहा कि धार्मिक अपमान के मामलों में कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

उन्होंने सरकार से पूछा कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है और कानून को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सत्ता पक्ष ने लगाए राजनीतिकरण के आरोप

AAP नेताओं ने विपक्ष पर धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार सभी धर्मों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान करती है और कानून व्यवस्था के तहत कार्रवाई करती है।

सत्ता पक्ष ने यह भी कहा कि विधानसभा में चर्चा के दौरान संवेदनशील विषयों को जिम्मेदारी के साथ उठाया जाना चाहिए।

सदन में बढ़ा राजनीतिक तनाव

इस मुद्दे पर हुई बहस के दौरान विधानसभा का माहौल कई बार गर्म हो गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।

हालांकि, बाद में सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी, लेकिन धार्मिक अपमान-विरोधी कानून का मुद्दा पंजाब की राजनीति में एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया।

आगे भी जारी रह सकती है बहस

धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों को लेकर पंजाब में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। विधानसभा में हुई इस बहस के बाद आने वाले दिनों में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।

फिलहाल, AAP सरकार और अकाली दल के बीच धार्मिक अपमान-विरोधी कानून को लेकर टकराव ने राज्य की सियासत को एक नया मुद्दा दे दिया है।

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