पंजाब

50 हजार की रिश्वत लेते पकड़ी गई सब इंस्पेक्टर सुनीता बावा की बढ़ीं मुश्किलें

Kavita2
29 Sept 2026 4:54 PM IST
50 हजार की रिश्वत लेते पकड़ी गई सब इंस्पेक्टर सुनीता बावा की बढ़ीं मुश्किलें
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मोगा। कोट इसे खां थाने की एसएचओ रहते हुए 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार की गई सब इंस्पेक्टर सुनीता बावा की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। विजिलेंस ब्यूरो ने अब उसके खिलाफ पहले से लंबित शिकायतों की जांच भी दोबारा शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस विभाग और विजिलेंस ब्यूरो के पास सुनीता बावा के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें पहुंची थीं। इनमें से कुछ शिकायतों की जांच पूरी नहीं हो सकी थी और वे लंबित पड़ी थीं।

रिश्वत मामले में गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने सुनीता बावा से जुड़ी पुरानी शिकायतों की फाइलें भी खंगालनी शुरू कर दी हैं। अब इन मामलों में पुराने शिकायतकर्ताओं से दोबारा संपर्क किया जा रहा है। शिकायतों में लगाए गए आरोपों से संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

विजिलेंस की कोशिश है कि पुरानी शिकायतों में लगाए गए आरोपों की नए सिरे से जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि उनमें कोई ठोस तथ्य या कार्रवाई योग्य सामग्री मौजूद है या नहीं। जिन शिकायतों की जांच पहले किसी कारण से लंबित रह गई थी, उनकी स्थिति की भी समीक्षा की जा रही है।

सुनीता बावा की गिरफ्तारी के बाद उसके सेवाकाल से जुड़े मामलों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। बताया गया है कि वह वर्ष 2011 में पंजाब पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुई थी। इसके बाद उसने पुलिस विभाग में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं और पदोन्नति के बाद सब इंस्पेक्टर के पद तक पहुंची।

कोट इसे खां थाने में एसएचओ रहते हुए उसके खिलाफ रिश्वत लेने का मामला सामने आया। आरोप है कि उसने 50 हजार रुपये की रिश्वत ली, जिसके बाद विजिलेंस ब्यूरो ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। अब इसी मामले के बाद पुराने आरोप भी जांच के दायरे में आ गए हैं।

विजिलेंस ब्यूरो की ओर से पुरानी शिकायतों की जांच दोबारा शुरू किए जाने के बाद यह देखा जा रहा है कि संबंधित शिकायतें किस समय की हैं और उनमें किन घटनाओं या मामलों का उल्लेख किया गया था। शिकायतकर्ताओं से संपर्क कर उनके बयान और उपलब्ध दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं।

जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि शिकायतकर्ताओं ने पहले जो आरोप लगाए थे, उनके समर्थन में कोई रिकॉर्ड, लेन-देन से जुड़ा दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं या नहीं। केवल शिकायत के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय विजिलेंस तथ्यों का सत्यापन करेगी।

रिश्वत मामले में हुई गिरफ्तारी और पुरानी शिकायतों की जांच अलग-अलग प्रक्रिया का हिस्सा हैं। पुराने मामलों में आरोप सिद्ध हुए हैं या नहीं, इसका फैसला संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

विजिलेंस ब्यूरो के सामने अब एक साथ कई पहलुओं की पड़ताल की जिम्मेदारी है। सबसे पहले मौजूदा रिश्वत प्रकरण से जुड़े साक्ष्यों को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ पुराने शिकायतकर्ताओं के आरोपों को भी रिकॉर्ड के आधार पर जांचा जा रहा है।

सुनीता बावा के खिलाफ पुलिस विभाग में पहुंची शिकायतों का रिकॉर्ड भी देखा जा सकता है। यह पता लगाया जाएगा कि इन शिकायतों पर उस समय क्या कार्रवाई हुई थी, जांच किस स्तर तक पहुंची थी और मामला लंबित रहने की वजह क्या थी।

यदि किसी शिकायत में पहले विभागीय जांच हुई थी तो उससे संबंधित रिकॉर्ड भी मौजूदा जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है। विजिलेंस पुराने दस्तावेजों और नए बयानों का मिलान कर तथ्यों की पुष्टि करने का प्रयास करेगी।

सुनीता बावा के पुलिस सेवा में वर्ष 2011 से रहने के कारण उसके अलग-अलग कार्यकाल और तैनाती से जुड़ी शिकायतों को भी अलग-अलग देखा जा सकता है। हालांकि किन स्थानों से और कितनी शिकायतें मिली थीं, इसका पूरा विवरण अभी सामने नहीं आया है।

फिलहाल विजिलेंस का मुख्य फोकस लंबित मामलों को दोबारा खोलकर शिकायतकर्ताओं से संपर्क करने पर है। जिन लोगों ने पहले शिकायतें दी थीं, उनसे घटना से संबंधित पूरी जानकारी मांगी जा रही है।

विजिलेंस यह भी देखेगी कि पुराने आरोप किसी व्यक्तिगत विवाद से जुड़े थे या उनमें भ्रष्टाचार अथवा पद के कथित दुरुपयोग से संबंधित तथ्य मौजूद थे। जांच के बाद ही तय होगा कि किसी शिकायत में आगे कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं।

मौजूदा रिश्वत मामले में भी विजिलेंस कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई आगे बढ़ा रही है। आरोप से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जांच का हिस्सा हैं। मामले में सुनीता बावा का पक्ष भी न्यायिक और जांच प्रक्रिया के दौरान दर्ज किया जाएगा।

50 हजार रुपये की कथित रिश्वत के मामले ने उसके खिलाफ पहले से मौजूद शिकायतों को फिर से चर्चा में ला दिया है। विजिलेंस अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी पुरानी शिकायत बिना जांच के लंबित न रह जाए।

पुराने शिकायतकर्ताओं से दोबारा संपर्क किए जाने से उन मामलों में नई जानकारी मिलने की संभावना है। यदि शिकायतकर्ताओं के पास पहले उपलब्ध नहीं रहे दस्तावेज या अन्य साक्ष्य सामने आते हैं तो उन्हें भी रिकॉर्ड में शामिल किया जा सकता है।

पुलिस विभाग में किसी अधिकारी के खिलाफ आने वाली शिकायतों की जांच विभागीय और कानूनी स्तर पर अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में विजिलेंस यह भी देख सकती है कि किस शिकायत का संबंध उसके अधिकार क्षेत्र से है।

सुनीता बावा की गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ पुरानी शिकायतों की फाइलों के दोबारा खुलने से मामले का दायरा बढ़ गया है। अब जांच केवल 50 हजार रुपये के कथित रिश्वत प्रकरण तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि पुराने आरोप भी जांच के आधार पर आगे बढ़ सकते हैं।

हालांकि हर पुरानी शिकायत को सही मान लेना उचित नहीं होगा। विजिलेंस की जांच में जो तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उन्हीं के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

जिन शिकायतों में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलेंगे, उनमें जांच बंद भी की जा सकती है। वहीं यदि किसी शिकायत में प्रथम दृष्टया ठोस तथ्य सामने आते हैं तो उसके आधार पर अलग कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल सुनीता बावा के खिलाफ लगाए गए पुराने आरोपों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इतना स्पष्ट है कि विजिलेंस ब्यूरो लंबित शिकायतों की दोबारा जांच कर रहा है और संबंधित लोगों से संपर्क किया जा रहा है।

इस पूरी कार्रवाई के बाद अब यह देखना होगा कि पुराने मामलों की जांच में क्या सामने आता है। 50 हजार रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस की ओर से उठाया गया यह कदम सुनीता बावा के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

फिलहाल रिश्वत मामले के साथ पुरानी शिकायतों की जांच भी आगे बढ़ रही है। आरोपों की अंतिम सत्यता जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

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