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Amritsar अमृतसर: अजनाला के बॉर्डर के धुसी बांध के पास स्थित गांव गग्गड़ में कुछ परिवारों ने आर्थिक तंगी और हालात के कारण सिख धर्म छोड़ ईसाई धर्म अपना लिया था। लेकिन अब उन्होंने घर वापसी कर ली है। सिंह साहिब ज्ञानी रघुबीर सिंह और बाबा गुरदेव सिंह कुल्ली वाले ने इन परिवारों को फिर से सिख धर्म में शामिल कराया और उनका मनोबल बढ़ाते हुए उनके टूटे हुए घरों की नींव भी रखी। गुरुद्वारा नानकसर में शनिवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें भाई गुरदेव सिंह कुल्ली वाले और भाई दर्शन सिंह कुल्ली वाले ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए घरों की नींव रखकर निर्माण कार्य की शुरुआत की। यह कार्य उन परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है जिन्होंने बाढ़ में अपने घर खो दिए थे।
इस मौके पर सिंह साहिब ज्ञानी रघुबीर सिंह ने खुद हाजिरी भरकर परिवारों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि बाढ़ में तबाह हुए इलाकों के पुनर्वास के लिए शिरोमणि कमेटी पहले दिन से ही मैदान में है। इस दौरान उन्होंने बताया कि तीन परिवारों, सरदार सुच्चा सिंह, सरदार प्रीत सिंह और सरदार कुलदीप सिंह, के घर पूरी तरह ढह चुके थे, जिनके घरों की नींव का पत्थर रखा गया। कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि गग्गड़ गांव के कुछ परिवार, जो ईसाई धर्म अपना चुके थे, वे फिर से सिख धर्म में लौट आए। सिंह साहिब ने उन्हें समझाया कि सिख धर्म एक समृद्ध और गौरवशाली विरासत है, जिसकी रक्षा के लिए लाखों सिखों ने अपनी जानें कुर्बान की हैं। यह सुनकर परिवारों ने सिंह साहिब से माफी मांगी और वचन दिया कि अब वे कभी भी अपना धर्म नहीं छोड़ेंगे।
बाबा गुरदेव सिंह कुल्ली वाले और बाबा हरनेक सिंह सियार वाले ने भी इस सेवा कार्य में विशेष योगदान दिया। संगत के सहयोग से तीन घरों की नींव रख दी गई है और जल्द ही ये परिवार अपने नए घरों में शिफ्ट हो जाएंगे। सिंह साहिब ने कहा कि हमारा पंथ बहुत समृद्ध है। किसी भी लालच या बहकावे में आकर सिखी छोड़ना हमारी विरासत से विश्वासघात है। हम अपनी नौजवान पीढ़ी को भी यह संदेश देना चाहते हैं कि वे किसी भी परिस्थिति में अपने धर्म से न डिगें। उन्होंने यह भी कहा कि जो परिवार किसी कारणवश अपने धर्म से दूर हो गए हैं, वे वापस मुख्यधारा में आएं। शिरोमणि कमेटी और सामाजिक संगठन हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं। पीड़ित परिवारों ने सिंह साहिब, शिरोमणि कमेटी और सेवादारों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के समय कोई राहत सामग्री उन तक नहीं पहुंची थी, लेकिन आज सिंह साहिब खुद उनके पास पहुंचे और उनके नए घरों का नींव पत्थर रखा। यह उनके लिए एक नई शुरुआत है। परिवारों ने कहा कि अब वे सिख धर्म में दृढ़ रहेंगे और किसी भी तरह के प्रलोभन में नहीं आएंगे।
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