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PUNJAB पंजाब: आई विनाशकारी बाढ़ ने राज्य के कई हिस्सों को प्रभावित कर दिया है। तेज बारिश और नदियों के उफान के कारण कई इलाकों में जलभराव हुआ है। इस संकट के बीच बचाव और राहत कार्यों के लिए नावों की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है। सरकारी एजेंसियों ने हजारों नावें तैनात की हैं, वहीं आम लोग भी इन्हें बड़ी संख्या में खरीद रहे हैं।
नाव उद्योग में बढ़ी हलचल
रोपड़ में स्थित बिशन सिंह एंड संस की नाव फैक्ट्री में मजदूर दिन-रात मोटर बोट बनाने में जुटे हुए हैं। फैक्ट्री में 1966 से नाव निर्माण का काम कर रहे 78 वर्षीय मोहन सिंह का कहना है कि उन्हें 1988 की बाढ़ के दौरान भी इतनी मांग नहीं देखी गई थी। मौजूदा समय में उन्हें रोजाना लगभग 150 फोन कॉल मिल रहे हैं, जिसमें नावों की खरीद और ऑर्डर के लिए संपर्क किया जा रहा है।
मोहन सिंह ने बताया कि इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उन्होंने अतिरिक्त मजदूरों को काम पर रखा है। फैक्ट्री में नौ से दस अतिरिक्त कारीगर तैनात किए गए हैं ताकि समय पर नावें तैयार की जा सकें। उन्होंने कहा कि पुराने जमाने की नावें अब कम समय में बनाई जा रही हैं और आधुनिक मोटर बोटों की निर्माण प्रक्रिया भी तेज हो गई है।
सरकारी और निजी दोनों स्तर पर राहत कार्य
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ एनडीआरएफ और पुलिस बल ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में नावों का उपयोग किया है। लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने और जरूरतमंदों तक खाद्य और राहत सामग्री पहुंचाने में नावों की अहम भूमिका रही है।
स्थानीय लोग भी सुरक्षा और बचाव के लिए नाव खरीदने में आगे आए हैं। कुछ लोग अपने निजी मकानों और जमीनों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए नावें खरीद रहे हैं।
असर और चुनौतियां
बाढ़ की गंभीर स्थिति ने व्यापारियों और नाव निर्माताओं के लिए चुनौती पैदा की है। बढ़ती मांग के साथ-साथ सामग्री और कच्चे माल की कमी एक बड़ी समस्या बन गई है। इसके बावजूद, नाव निर्माण उद्योग ने अपने संसाधनों का पूरा उपयोग करते हुए बचाव कार्यों में सहयोग किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश और बाढ़ का सिलसिला जारी रहा, तो नावों की मांग और बढ़ सकती है। ऐसे में सरकारी और निजी दोनों स्तर पर राहत कार्यों के लिए पर्याप्त तैयारी की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, पंजाब की बाढ़ ने नाव उद्योग को गति दी है और राहत कार्यों में उनकी भूमिका अहम बनी हुई है। फैक्ट्रियों में मजदूर दिन-रात जुटे हुए हैं ताकि नावों की आपूर्ति समय पर की जा सके और बाढ़ प्रभावित लोगों तक सुरक्षा और राहत पहुंचाई जा सके।
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