पंजाब
सिनेमा का सुनसान दौर, Amritsar के सिंगल स्क्रीन हॉल्स की कहानी
Ratna Netam
6 May 2026 1:11 PM IST

x
Punjab.पंजाब: शहर की गलियों और प्रमुख बाजारों में स्थित कई सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल्स अब खाली पड़े हैं। एक समय जब ये हॉल्स फिल्म प्रेमियों का केंद्र हुआ करते थे, आज ये अपनी सुनसान दीवारों और टूटी हुई कुर्सियों के साथ शहर की बदलती सांस्कृतिक कहानी बयां कर रहे हैं। अमृतसर के प्रमुख सिनेमा हॉल्स, जैसे कि (नाम), (नाम) और (नाम), दशकों तक फिल्म प्रेमियों को मनोरंजन की दुनिया में ले जाते थे। पुराने दिनों में यहां नई फिल्मों की रिलीज पर भीड़ लगी रहती थी, लोग घंटों लाइन में खड़े होकर टिकट लेने के लिए इंतजार किया करते थे। लेकिन अब डिजिटल स्ट्रीमिंग, मल्टीप्लेक्स और बदलते मनोरंजन के तरीकों के कारण ये हॉल्स अपनी चमक खो चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंगल स्क्रीन हॉल्स सिर्फ फिल्मों के लिए नहीं थे, बल्कि ये सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का हिस्सा भी थे। यहां लोगों ने अपने पहले डेट, दोस्तों के साथ फिल्म देखने की यादें, और परिवारिक पल बिताए। अब ये हॉल्स खाली पड़े हैं और उनकी दीवारों पर पुराने पोस्टर्स और धूल जम चुकी है। हॉल के प्रबंधकों ने बताया कि आर्थिक कारणों और दर्शकों की बदलती पसंद के कारण उन्हें हॉल बंद करना पड़ा। टिकट बिक्री में लगातार गिरावट, रख-रखाव की लागत और प्रतिस्पर्धी मल्टीप्लेक्स के सामने इन हॉल्स को बनाए रखना मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि यदि समय पर मदद और समर्थन मिलता तो ये हॉल्स अभी भी काम कर सकते थे।
फिल्म और संस्कृति विशेषज्ञों का कहना है कि सिंगल स्क्रीन हॉल्स केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं थे, बल्कि ये स्थानीय फिल्म उद्योग और युवा कलाकारों के लिए मंच भी थे। उन्होंने कहा कि इन हॉल्स के बंद होने से न केवल फिल्मी संस्कृति प्रभावित हुई है बल्कि स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। स्थानीय निवासी याद करते हैं कि छुट्टियों और त्योहारों में इन हॉल्स में कितनी हलचल रहती थी। बच्चें अपनी पहली फिल्म का अनुभव यहां प्राप्त करते थे और बड़े लोग शाम की चाय के साथ फिल्मों का आनंद लेते थे। अब ये हॉल्स सिर्फ यादों और तस्वीरों में बचे हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि यदि इन हॉल्स को किसी सांस्कृतिक या शैक्षणिक गतिविधियों के लिए पुनः तैयार किया जाए, तो ये शहर के सांस्कृतिक जीवन में फिर से योगदान दे सकते हैं। शहर के इतिहास और फिल्म प्रेमियों के लिए ये हॉल्स अभी भी महत्वपूर्ण हैं और इन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए।
Tagsसिनेमा का सुनसान दौरAmritsarसिंगल स्क्रीन हॉल्स की कहानीThe deserted era of cinemathe story of singlescreen hallsजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





