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चंडीगढ़। देश के अलग-अलग राज्यों में स्कूल शिक्षा व्यवस्था का जायजा लेने और अच्छे शैक्षणिक मॉडल को समझने की कवायद के बीच CJP की टीम अब पंजाब के स्कूलों तक पहुंची है। टीम के इस दौरे ने इसलिए भी ध्यान खींचा, क्योंकि दूसरे स्थानों पर निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं की कमियां सामने आने की चर्चा होती रही है, लेकिन पंजाब में टीम के सदस्यों ने कई स्कूलों की सुविधाओं, पढ़ाई के माहौल और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की तारीफ की। टीम ने स्कूलों में हुए बदलावों को करीब से देखा और कई पहलों को शानदार बताया।
पंजाब सरकार पिछले कुछ वर्षों से सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। इसमें स्कूल ऑफ एमिनेंस, आधुनिक कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं, शिक्षक प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के कौशल विकास पर जोर शामिल है। ऐसे में CJP टीम का दौरा राज्य की शिक्षा व्यवस्था के आकलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि **CJP टीम की पहचान और इस खास दौरे का पूरा आधिकारिक विवरण उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में स्पष्ट नहीं है**, इसलिए टीम से जुड़े विशिष्ट दावों को संबंधित प्रतिनिधियों के आकलन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
स्कूलों की व्यवस्था देखकर प्रभावित हुई टीम
दौरे के दौरान टीम ने पंजाब के सरकारी स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। क्लासरूम से लेकर प्रयोगशालाओं और दूसरे शैक्षणिक संसाधनों तक अलग-अलग व्यवस्थाओं को देखा गया।
टीम का ध्यान केवल स्कूल की इमारत पर नहीं रहा बल्कि विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं और पढ़ाई के तरीके पर भी रहा।
पंजाब में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने के लिए राज्य सरकार ने School of Eminence मॉडल को अपनी प्रमुख शिक्षा परियोजनाओं में शामिल किया है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, लैब, खेल और दूसरी सुविधाएं विकसित करने का दावा सरकार करती रही है। पंजाब सरकार के अनुसार राज्य में 118 School of Eminence विकसित किए जा रहे हैं।
स्कूलों में किए जा रहे इन्हीं बदलावों ने निरीक्षण करने पहुंची टीम का ध्यान खींचा।
कमियों के बजाय अच्छी व्यवस्थाओं की हुई चर्चा
आमतौर पर किसी निरीक्षण या अध्ययन दौरे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा खामियों की होती है। कहीं शिक्षकों की कमी सामने आती है तो कहीं स्कूल भवन, शौचालय, प्रयोगशाला या दूसरे संसाधनों को लेकर सवाल उठते हैं।
लेकिन पंजाब के दौरे की तस्वीर इससे कुछ अलग बताई जा रही है।
यहां टीम के सदस्यों ने कमियां गिनाने की तुलना में उन व्यवस्थाओं की ज्यादा चर्चा की जो विद्यार्थियों के लिए उपयोगी दिखाई दीं। स्कूलों में विकसित किए गए आधुनिक संसाधन, पढ़ाई का माहौल और बच्चों के लिए तैयार सुविधाओं की सराहना की गई।
हालांकि किसी एक स्कूल या चुनिंदा स्कूलों के दौरे को पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था का अंतिम मूल्यांकन नहीं माना जा सकता। पंजाब में भी शिक्षकों की रिक्तियों, ग्रामीण स्कूलों की जरूरतों और शिक्षा की गुणवत्ता जैसे मुद्दे समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
इसके बावजूद अच्छे मॉडल की पहचान करना और उन्हें दूसरे स्कूलों में लागू करने की संभावना तलाशना ऐसे दौरों का महत्वपूर्ण उद्देश्य हो सकता है।
School of Eminence बना पंजाब का प्रमुख मॉडल
पंजाब की मौजूदा शिक्षा नीति में School of Eminence की सबसे ज्यादा चर्चा होती है।
इस मॉडल के तहत सरकारी स्कूलों में केवल नई इमारत तैयार करने पर जोर नहीं है बल्कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने का लक्ष्य रखा गया है।
पंजाब सरकार के मुताबिक इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं, लाइब्रेरी और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जुड़े संसाधन विकसित किए जा रहे हैं।
इस योजना का मकसद सरकारी स्कूलों को ऐसा विकल्प बनाना है जहां अभिभावक अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए भेजना चाहें।
सरकार इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बढ़ाने की कोशिश के तौर पर पेश करती है।
शिक्षकों की ट्रेनिंग पर भी जोर
स्कूल में अच्छी इमारत और आधुनिक लैब होने के बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता आखिरकार शिक्षक पर निर्भर करती है।
इसी वजह से पंजाब सरकार ने शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों की ट्रेनिंग को भी अपने शिक्षा सुधार कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।
राज्य के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों और शिक्षकों के समूहों को प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा गया है। प्रिंसिपलों को सिंगापुर और शिक्षकों को फिनलैंड जैसे देशों में प्रशिक्षण देने की पहल भी सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल रही है।
इसका उद्देश्य दूसरे देशों की शिक्षा प्रणालियों से अच्छे प्रयोग सीखकर उन्हें पंजाब के सरकारी स्कूलों में लागू करना बताया गया है।
इसके अलावा भारतीय संस्थानों में भी शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों के प्रशिक्षण पर काम किया गया है।
विद्यार्थियों को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखने की कोशिश
नई शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव यह है कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तक और परीक्षा तक सीमित न रखा जाए।
स्कूलों में साइंस, टेक्नोलॉजी, खेल, कला और करियर से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
School of Eminence मॉडल में भी विद्यार्थियों के कौशल विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने की बात कही गई है।
सरकार का तर्क है कि सरकारी स्कूल का विद्यार्थी भी उसी तरह आधुनिक सुविधाओं तक पहुंच रखे जैसा महंगे निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मिलता है।
यही वजह है कि स्कूलों में लैब और डिजिटल संसाधनों को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
पंजाब सरकार लगातार कर रही शिक्षा मॉडल का प्रचार
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती रही है।
सरकार का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में बड़े स्तर पर बदलाव किया गया है।
School of Eminence के अलावा सरकारी स्कूलों की मरम्मत, नए क्लासरूम, सुरक्षा व्यवस्था और दूसरी मूलभूत सुविधाओं पर भी काम किए जाने की बात सरकार ने कही है।
पंजाब के बजट में भी शिक्षा को महत्वपूर्ण आवंटन मिलता रहा है और राज्य सरकार सरकारी स्कूलों को अपनी शासन रणनीति के प्रमुख हिस्से के रूप में पेश करती है।
क्या पंजाब मॉडल दूसरे राज्यों में लागू हो सकता है?
किसी शिक्षा मॉडल की वास्तविक सफलता का सबसे बड़ा पैमाना यह होता है कि उससे बच्चों की सीखने की क्षमता कितनी बेहतर हुई।
नई बिल्डिंग, स्मार्ट बोर्ड और आधुनिक प्रयोगशाला महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अंतिम लक्ष्य विद्यार्थियों के सीखने के परिणाम सुधारना है।
इसी वजह से किसी भी मॉडल को दूसरे राज्य में लागू करने से पहले कई चीजों का अध्ययन जरूरी होता है।
पंजाब की जनसंख्या, स्कूलों की संख्या, बजट, शिक्षक उपलब्धता और भौगोलिक स्थिति दूसरे राज्यों से अलग है। इसलिए किसी योजना को हूबहू लागू करने के बजाय उसके सफल हिस्सों को स्थानीय जरूरत के मुताबिक अपनाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
टीम के दौरे का महत्व भी इसी संदर्भ में देखा जा सकता है।
अगर किसी सरकारी स्कूल में कोई व्यवस्था अच्छी तरह काम कर रही है तो उसका अध्ययन कर दूसरे स्कूलों के लिए मॉडल बनाया जा सकता है।
सरकारी और निजी स्कूलों की दूरी कम करना चुनौती
देश की स्कूली शिक्षा के सामने लंबे समय से एक बड़ी चुनौती सरकारी और निजी स्कूलों के बीच संसाधनों और धारणा के अंतर की रही है।
कई परिवार आर्थिक दबाव के बावजूद अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना चाहते हैं क्योंकि उन्हें वहां बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद रहती है।
ऐसे में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और सुविधाएं बेहतर होती हैं तो इसका सबसे ज्यादा फायदा कम और मध्यम आय वाले परिवारों को मिल सकता है।
पंजाब सरकार भी School of Eminence को इसी अंतर को कम करने वाली पहल के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
अगर सरकारी स्कूल में अच्छी बिल्डिंग, प्रशिक्षित शिक्षक, आधुनिक लैब, खेल का मैदान और करियर गाइडेंस उपलब्ध हो तो अभिभावकों का सरकारी शिक्षा के प्रति भरोसा बढ़ सकता है।
सिर्फ तारीफ नहीं लगातार मूल्यांकन भी जरूरी
CJP टीम की तरफ से स्कूलों की खूबियों की चर्चा होना पंजाब के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में सुधार एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के बाद उसका रखरखाव भी उतना ही जरूरी है।
कंप्यूटर लैब बन गई तो कंप्यूटर चालू स्थिति में रहें, स्मार्ट क्लास बनाई गई तो शिक्षक उसका नियमित इस्तेमाल करें, लाइब्रेरी में किताबें हों तो बच्चे उन्हें पढ़ें—इन सभी चीजों की निगरानी जरूरी है।
इसी तरह शिक्षकों की उपलब्धता और विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति भी महत्वपूर्ण है।
किसी मॉडल की असली सफलता केवल उद्घाटन के समय दिखाई देने वाली सुविधाओं से नहीं बल्कि कई वर्षों के छात्र परिणामों से तय होगी।
दूसरे राज्यों के लिए सीख बन सकती हैं अच्छी पहल
देश में अलग-अलग राज्य शिक्षा क्षेत्र में अपने प्रयोग कर रहे हैं।
कहीं स्मार्ट स्कूल तैयार किए जा रहे हैं तो कहीं डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और कौशल विकास पर जोर है।
ऐसे में राज्यों के बीच सफल प्रयोगों को साझा करना सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए फायदेमंद हो सकता है।
अगर पंजाब के किसी स्कूल में कोई विशेष लैब, शिक्षण तकनीक या प्रबंधन व्यवस्था अच्छे परिणाम दे रही है तो दूसरे राज्य उसका अध्ययन कर सकते हैं। इसी तरह पंजाब भी दूसरे राज्यों की सफल योजनाओं से सीख सकता है।
शिक्षा क्षेत्र में इस तरह का आदान-प्रदान आखिरकार विद्यार्थियों के हित में होता है।
दौरे ने इसलिए खींचा ध्यान
CJP टीम के पंजाब दौरे की चर्चा इसलिए ज्यादा हो रही है क्योंकि इस बार कमियों से ज्यादा स्कूलों की अच्छी व्यवस्थाएं सुर्खियों में आईं।
टीम को स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जा रही कई सुविधाएं पसंद आने की बात सामने आई है।
लेकिन इस तारीफ के साथ यह भी जरूरी है कि इसे पंजाब के हर सरकारी स्कूल की स्थिति का प्रमाण न माना जाए। किसी भी राज्य में अलग-अलग स्कूलों की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
फिर भी अगर सरकारी स्कूल में ऐसा बदलाव दिखाई देता है जिसकी बाहर से आने वाली टीम तारीफ करे तो यह उस संस्थान के शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रशासन के लिए सकारात्मक संकेत है।
पंजाब सरकार के सामने अब चुनौती इन सुविधाओं को कुछ चुनिंदा मॉडल स्कूलों से आगे अधिक से अधिक सरकारी स्कूलों तक पहुंचाने की होगी।
अंततः सरकारी शिक्षा में असली सफलता तभी मानी जाएगी जब आधुनिक इमारत और सुविधाओं के साथ बच्चों के सीखने के परिणाम, शिक्षक उपलब्धता और अभिभावकों का भरोसा भी लगातार बेहतर हो।
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